शहर के साथ छल, अफसर कर रहे बराबर पानी देने का दावा लेकिन पूरा पानी जा रहा हिम्मतगढ़

शहर के साथ छल, अफसर कर रहे बराबर पानी देने का दावा लेकिन पूरा पानी जा रहा हिम्मतगढ़

Rahul Aditya Rai | Publish: Sep, 04 2018 06:14:09 PM (IST) Gwalior, Madhya Pradesh, India

वास्तविकता में शहर के हिस्से का पानी भी हिम्मतगढ़ जा रहा है, जिससे हनुमान बांध, वीरपुर बांध, गिरवाई और मामा का बांध पूरे नहीं भर पा रहे हैं

ग्वालियर। जल संकट से जूझ रहे शहर के साथ सरकारी अफसर छल कर रहे हैं। वह दावे तो यह कर रहे हैं नयागांव पिक अप वियर से ग्वालियर और हिम्मतगढ़ को बराबर पानी दिया जा रहा है, लेकिन वास्तविकता में शहर के हिस्से का पानी भी हिम्मतगढ़ जा रहा है, जिससे हनुमान बांध, वीरपुर बांध, गिरवाई और मामा का बांध पूरे नहीं भर पा रहे हैं।

 

शहर की जमीन को रीचार्ज करने के लिए इन बांधों का भरना आवश्यक है। इसे लेकर जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री राजेश चतुर्वेदी से बात की तो उन्होंने कहा कि हम हिम्मतगढ़ और ग्वालियर को नयागांव पिक अप वियर से बराबर पानी दे रहे हैं, लेकिन उनका यह दावा तब झूठा निकला जब पत्रिका टीम मौके पर पहुंची और वहां पड़ताल की तो पता चला कि पानी का प्रवाह ग्वालियर की ओर न होते हुए हिम्मतगढ़ की ओर है।

 

सूत्रों की मानें तो अफ सर भितरवार विधायक लाखन सिंह यादव के प्रभाव से बाहर नहीं आ सके हैं। ऐसे में शहर में आने वाले समय में मुश्किल हालात बन सकते हैं।

 

हिम्मतगढ़ की ओर जा रहा पानी
यह गेट पूरा खुला हुआ था। पहाड़ी क्षेत्रों से आने वाला पानी ग्रेविटी के जरिए सीधे हिम्मतगढ़ की ओर जा रहा था।

 

रायपुर बांध की तरफ प्रवाह नहीं
ंरायपुर बांध की ओर पानी का प्रवाह शून्य था। इस ओर पानी ग्रेविटी के जरिए आगे की ओर बढ़ ही नहीं रहा था। इसलिए रायुपर सहित मामा का बांध, गिरवाई का बांध, वीरपुर और हनुमान बांध पूरे नहीं भर पा रहे हैं।

 

सीधी बात
हम दे रहे बराबर पानी

राजेश चतुर्वेदी, कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग
-वीरपुर बांध, मामा का बांध, गिरवाई और रायपुर का बांध क्यों नहीं भर रहे हैं?
हम उन्हें भरने का प्रयास कर रहे हैं, इसके लिए सिरसा डैम का बैक वाटर उक्त बाधों के लिए आ रहा है।

-नयागांव पिकअप वियर पर तो पूरा पानी हिम्मतगढ़ के लिए जा रहा है?
हमने दोनों बांधों के लिए गेट खोले हुए हैं, पानी दोनों की ओर छोड़ा गया है।
(अफसर मानने को तैयार ही नहीं हुए कि पानी केवल हिम्मतगढ़ के लिए जा रहा है। इसके लिए पत्रिका ने स्पॉट रिपोर्टिंग की और पानी के बहने की वीडियोग्राफी की, ताकि शहर को बताया जा सके कि अफसर किस प्रकार से शहर के लोगों के साथ छल कर रहे हैं)

 

यह होगी परेशानी
शहरी सीमा में शामिल हुए ग्रामीण क्षेत्र के कई वार्डों में पीने तक को पानी नहीं है। शौचालय तो बने हैं, लेकिन पानी के अभाव में उनका उपयोग नहीं होता। महिलाएं आज भी खुले में जाने को मजबूर हैं। वहीं शहर में भी हालात गर्मियां आते ही खराब हो जाते हैं। हर साल करीब २ से ३ करोड़ रुपए नई बोरिंग, पानी के टैंकर और नई पाइप लाइन के नाम पर पीएचई विभाग खर्च करता है। इसके बावजूद लोगों की परेशानियां कम नहीं होतीं। अगर हनुमान बांध के ऊपर के बांधों को भर दिया जाए तो अगले साल गर्मियों में करीब ५ लाख से अधिक की आबादी को जल संकट से बचाया जा सकता है।

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