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नगर परिषद: निर्दलीय पर दोनों दलों की नजर, सभापित को लेकर जोड़-तोड़ की राजनीति

- नगर परिषद में सभापति के लिए दिग्गज पार्षदों को उतारने की तैयारी

ग्वालियर

Published: July 28, 2022 06:56:23 pm

ग्वालियर। नगर परिषद में अब कांग्रेस पार्टी और भारतीय जनता पार्टी दोनों ही जोड़-तोड़ की राजनीति में जुटी हुई है। दोनों ही पार्टी सभापित के लिए वरिष्ठ पार्षद पर दांव खेलेगी। इसके नामों पर विचार करना शुरू कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी के पास हरिपाल, गिर्राज कंसाना जैसे दिग्गज नाम है वहीं कांग्रेस अवधेश कौरव पर दांव खेल सकती है।

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अवधेश विधायक सतीश सिंह सिकरवार के करीबी भी है। हालांकि अब भाजपा और कांग्रेस पार्टी का पूरा फोकस निर्दलीय पार्षद पर हैं। भाजपा ने यदि एक-दो निर्दलीय पार्षद अपने खेमे में कर लिए तो कांग्रेस की सभापित बनने की संभावनाएं खत्म हो जाएगी। वहीं कांग्रेस तीन निर्दलीय पार्षदों को तोड़ चुकी है और शेष के भी संपर्क में है इसके अलावा कांग्रेस भाजपा के पार्षदों को भी तोड़ने में जुटी हुई हैं। यह पूरा काम गोपनीय तरीके से चल रहा है।

हरीपाल-गिर्राज में से एक हो सकता भाजपा से सभापति
नगर निगम चुनाव में चार बार पार्षद पद पर जीत चुके हरीपाल सबसे मुख्य दावेदार है, लेकिन वह सिंधिया खेमे से है, इसलिए भाजपा के कुछ पार्षद अड़ंगा लगा सकते हैं। इसके अलावा गिर्राज कंसाना का नाम दूसरे नंबर है वे भी तीन बार पार्षद पद का चुनाव जीत चुके हैं। हालांकि भाजपा भी गोपनीय रूप से पार्षदों के साथ मिलकर नामों पर राय शुमारी कर रही है।

सिंधिया से मिले दो निर्दलीय पार्षद
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दो निर्दलीय पार्षद बुधवार को दिल्ली में केन्द्रीय विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात कर आए हैं। खबर यह है कि इनको तोड़ने का काम ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने किया है। ऊर्जा मंत्री भी बुधवार को ग्वालियर में नहीं थे। सिंधिया को निर्दलीय पार्षदों अपनी सहमति भी दे दी है। भाजपा इन पत्तों को समय पर खोलेगी। यदि ये दो पार्षद टूटकर भाजपा में शामिल हो गए तो कांग्रेस के लिए मुसीबत खड़ी हो जाएगी। और सभापति बनने की उम्मीद खत्म हो जाएगी।

इधर,सिंधिया समर्थक का गुट हुआ हावी, गृहमंत्री का गुट पिछड़ा-
वहीं दूसरी ओर जनपद अध्यक्ष के पद पर कब्जा करने के लिए बीते एक महीने से जारी रस्साकसी के बाद भितरवार जनपद अध्यक्ष के पद पर एलयूएन अध्यक्ष इमरती देवी सुमन के समर्थक गुट ने कब्जा कर लिया है। यहां गृहमंत्री गुट से भाजपा ग्रामीण के जिलाध्यक्ष कौशल शर्मा सदस्यों को अपने पाले में करने के लिए लगातार कोशिश कर रहे थे। लेकिन इमरती गुट के मोहनसिंह राठौर के साथ अधिकतर सदस्य मतगणना के बाद से ही थे।

वहीं जनपद के अध्यक्ष के साथ ही उपाध्यक्ष पद पर भी इमरती गुट ने जीत हासिल की है, जबकि मुरार जनपद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर राज्यमंत्री भारत सिंह के समर्थक सदस्य निर्वाचित हुए हैं। यहां अध्यक्ष के लिए चुनाव हुआ और उपाध्यक्ष निर्विरोध चुन लिया गया।

मुरार
18 सदस्यों ने बहादुरपुर निवासी भाजपा समर्थित जनपद सदस्य दिलराज सिंह किरार को अध्यक्ष पद के लिए समर्थन दिया है, जबकि कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी पिंकी विनयप्रताप सिंह गुर्जर को सिर्फ सात सदस्यों ने ही समर्थन दिया। यहां उपाध्यक्ष पद पर भाजपा समर्थित रनगवां निवासी सर्वेश कुमारी गुर्जर का निर्विरोध निर्वाचन हुआ।

पहले से ही तय था जीतना: मतगणना परिणाम घोषित होने के साथ ही जनपद के 18 सदस्यों का समर्थन राज्यमंत्री के साथ था। अधिकतर सदस्य भाजपा समर्थित होने की वजह से कांग्रेस समर्थित सदस्य के पक्ष में माहौल नहीं बन सका। अध्यक्ष निर्वाचन से एक दिन पहले सदस्यों ने राज्यमंत्री के पास पहुंचकर शपथ भी ली थी। दिलराज सिंह का नाम अध्यक्ष के लिए लगभग फाइनल कर लिया गया था। जबकि उपाध्यक्ष के पद पर एक ही नामांकन दाखिल हुआ।

भितरवार
14 सदस्यों ने भाजपा समर्थित सदस्य लक्ष्मीदेवी को अध्यक्ष पद के लिए समर्थन दिया। इनकी प्रतिद्वंद्वी और कांग्रेस समर्थित अध्यक्ष पद की चरखा गांव निवासी उम्मीदवार इंदिरा को 10 सदस्यों का समर्थन मिला। इसी तरह उपाध्यक्ष पद पर भाजपा समर्थित और बनवार निवासी जनपद सदस्य जगमोहन प्रजापति को 14 सदस्यों का समर्थन मिला, जबकि इनकी प्रतिद्वंद्वी दुबहाटांका निवासी जनपद सदस्य वर्षा को 10 सदस्यों का ही समर्थन मिला।

भितरवार जनपद में एलयूएन अध्यक्ष के करीबी मोहनसिंह राठौर द्वारा सदस्यों को अपने पाले में करने के बाद चुनाव के दिन ही सामने लाया गया। मोहनसिंह राठौर सदस्यों को तीन-तीन के ग्रुप में लेकर जनपद कार्यालय पहुंचे और मतदान के आखिरी समय तक वहीं रुके थे। पुलिस की मौजूदगी की वजह से तनावपूर्ण स्थिति में ही चुनाव संपन्न हुआ।

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