दावा: रोज तीन हजार सैंपलिंग का, हकीकत: 11 दिन में 962 हुईं जांच

कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए पूल सैंपलिंग काफी प्रभावी हुई है। कई जगह तो इसके काफी सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। इसके बावजूद भी शहर में पूल सैंपलिंग के नाम पर मजाक किया जा रहा है...

ग्वालियर. कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए पूल सैंपलिंग काफी प्रभावी हुई है। कई जगह तो इसके काफी सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। इसके बावजूद भी शहर में पूल सैंपलिंग के नाम पर मजाक किया जा रहा है। हालात यह हैं कि रोज तीन हजार सैंपल के बजाय 11 दिन में बमुश्किल 962 सैंपल लिए गए हैं। इसकी वजह यह है कि इंसीडेंट कमांडर को पता ही नहीं है कि कहां जाकर पूल सैंपलिंग की जाए, जहां सबसे ज्यादा मरीज मिलने की आशंका है। प्रशासन का कोरोना संक्रमण रोकने का यही रवैया रहा तो यह संक्रमण रुकेगा नहीं बल्कि अब तेजी से बढ़ेगा। कारण यह है कि शहर में रोज आधा सैकड़ा से ज्यादा मरीज मिल रहे हैं, उसके बावजूद भी पूल सैंपलिंग के नाम पर लापरवाही की जा रही है। जबकि पूल सैंपलिंग का पूरा जिम्मा कलेक्टर ने हर एक क्षेत्र के इंसीडेंट कमांडर को सौंपा है।


दस दिनों में 962 हुई पूल सैंपलिंग
15 जुलाई 00
16 जुलाई 00
17 जुलाई 00
18 जुलाई 00
19 जुलाई 00
20 जुलाई 00
21 जुलाई 125
22 जुलाई 384
23 जुलाई 253
24 जुलाई 00
25 जुलाई 00


इंसीडेंट कमांडर हो चुका है निलंबित
कंटेनमेंट जोन में लापरवाही के चलते अभी हाल ही में कलेक्टर ने अपने एक इंसीडेंट कमांडर को निलंबित किया है। कलेक्टर ने खुद ही उनके क्षेत्र में जाकर निरीक्षण किया तो इंसीडेंट कमांडर की कई लापरवाही सामने आई थी। इससे गुस्साए कलेक्टर में तुरंत निलंबित कर दिया था। ऐसा ही एक मामला पूल सैंपलिंग का भी सामने आ सकता है। जिसमें काफी लापरवाही की जा रही है। अगर समय रहते इसे नहीं सुधारा गया तो परिणाम सामने गंभीर आ सकते हैं।


फीवर क्लीनिक पर नहीं जा रहे मरीज
कोरोना को देखते हुए अभी हाल ही में शहर के कई क्षेत्रों में फीवर क्लीनिक खोले गए। इन फीवर क्लीनिकों में मरीजों की जांच के लिए पल्स ऑक्सीमीटर , थर्मल स्क्रीनल उपलब्ध कराई गई है। लेकिन इन फीवर क्लीनिकों पर मरीजों की संख्या काफी कम ही पहुंच रही है। ऐसा ही हाल शनिवार को थाटीपुर स्थित डीडी नगर की सिविल डिस्पेसरी में देखने को मिला।


फीवर क्लीनिक पर नहीं जा रहे मरीज
कोरोना को देखते हुए अभी हाल ही में शहर के कई क्षेत्रों में फीवर क्लीनिक खोले गए। इन फीवर क्लीनिकों में मरीजों की जांच के लिए पल्स ऑक्सीमीटर , थर्मल स्क्रीनल उपलब्ध कराई गई है। लेकिन इन फीवर क्लीनिकों पर मरीजों की संख्या काफी कम ही पहुंच रही है। ऐसा ही हाल शनिवार को थाटीपुर स्थित डीडी नगर की सिविल डिस्पेसरी में देखने को मिला।


हमारे पास सभी संसाधन
पूल सैंपलिंग इंसीडेंट कमांडर को कराना है। जहां से भी पूल सैंपलिंग की मांग इंसीडेंट कमांडर करते हैं। वहां हमारी टीम पहुंचकर सभी के सैंपल लेती है। कोरोना जांच के लिए हमारे पास सभी संसाधन उपलब्ध हैं।
डॉ.अमित रघुवंशी, नोडल ऑफिसर कोरोना, मुरार जिला अस्पताल


यह कहना है इंसीडेंट कंमाडरों का
पिछले कई दिनों से पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढऩे के बाद उनके संपर्क वाले लोगों की सैंपलिंग कराई जा रही है। इसके चलते पूल सैंपलिंग पर जोर कम दिया जा रहा है, लेकिन अब पूल सैंपलिंग ज्यादा से ज्यादा कराई जाएगी।
योगिता वाजपेयी, इंसीडेंट कमांडर


हम अपने क्षेत्र में पूल सैंपल करा रहे हैं, लेकिन यह बात सही है कि पूल सैंपलिंग के लिए
लोग तैयार कम हो रहे हैं। इससे थोड़ी बहुत परेशानी आ रही है।
शारदा पाठक, इंसीडेंट कमांडर

रिज़वान खान Desk
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