पंचायत सचिव को कलेक्टर ने घर से उठवाया फिर दिया ऐसा आदेश : जानिए क्यो 

5.50 लाख का था गबन, भ्रमण को पहुंचे कलेक्टर को मिली शिकायत पर जनपद सीईओ, पीसीओ और स्वयं का गार्ड भेजकर पकड़वाया


ग्वालियर. श्योपुर में अतिरिक्त कक्ष बनवाने के 5.50 लाख रुपए निकालकर गबन करने वाले एक पंचायत सचिव को कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल ने गुरुवार को घर से उठवा लिया। जनपद पंचायत के सीईओ, पीसीओ और स्वयं के गार्ड को भेजकर सचिव को पकड़वाकर कलेक्टर ने कराहल थाने भिजवा दिया, जहां से उसे सप्ताहभर में गबन राशि जमा करने के लिखित कथन बाद एसडीएम द्वारा छोड़ा गया। 

दरअसल सचिव की पत्नी बीमार बताई गई थी। कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल ने यह कार्रवाई गुरुवार की शाम तब की जबकि वह बाढ ग्राम पंचायत के भ्रमण पर पहुंचे और वहां पर ग्रामीणों ने समस्या सुनने के दौरान गबन के आरोपी व जेल वारंट जारी हो चुके सचिव अतरसिंह यादव के गांव में ही होने की बात बताई। 

हुआ यूं कि कलेक्टर गांव के स्कूल के सामने चौपाल लगाकर सुनवाई कर रहे थे। ग्राम पंचायत में गबन और भ्रष्टाचार होने संबंधी शिकायतें ग्रामीणों ने की। जिस पर कलेक्टर ने जनपद पंचायत सीईओ को बाढ़ की जांच कर सप्ताहभर में रिपोर्ट देने के आदेश दिए, वहीं गबन के आरोपी सचिवों पर की गई कार्रवाई की जानकारी प्राप्त की। 

इसी दौरान बाढ निवासी सचिव अतरसिंह यादव का जिक्र आया जो वर्ष २०१०-११ में बाढ के सचिव थे और जिन पर निमानिया का प्रभार था, तथा जिनके खिलाफ निमानिया स्कूल में अतिरिक्त कक्ष बनवाने के साढे पांच लाख रुपए का गबन कर जाने पर जेल वारंट जारी हो चुका था।कलेक्टर के पंचायत सचिव रहे अतरसिंह यादव की पूछने पर ग्रामीणों ने उसके घर पर ही होने की बात बताई। 

जिसके बाद जनपद सीईओ, पंचायत इंस्पेक्टर विश्वनाथ सिंह तोमर को और स्वयं के गार्ड को सचिव के घर भिजवाया और उसे पकड़कर बुलवाया। जहां से उसे कराहल थाने लेकर आए, जहां पर एसडीएम वीपी श्रीवास्तव ने सचिव की पत्नी की गंभीर स्थिति की बात जानकर और सचिव द्वारा लिखित में सात दिन के भीतर गबन राशि जमा कर देने का आश्वासन देने पर उसे छोड़ दिया। 


"पंचायत सचिव पर गबन का आरोप था और वह गांव में भी था, तो पुलिस को बुलाते फिर पकड़वाते, इतने में वह भाग सकता था, इसलिए उसे घर से उठवाकर बुलवाया था, जिसे जेल भेजने थाने भिजवा दिया था, जहां उसने पत्नी की बीमारी का हवाला देते हुए सप्ताहभर में गबन राशि जमा करने की कहते हुए समय मांगा है, लिखित में समय मांगने पर उसे घर भेज दिया है।"
अभिजीत अग्रवाल, कलेक्टर , श्योपुर
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monu sahu
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