कोरोना के चक्कर में नहीं कट पा रही खेतों में खड़ी फसल, किसान बोले-हम बर्बाद हो रहे हैं

corona affect on crop harvesting in gwalior chambal region : 1 लाख 29 हजार हैक्टेयर में खड़ा है गेहूं, हार्वेस्टर हैं पर लेबर नहीं

 

By: Gaurav Sen

Published: 27 Mar 2020, 03:42 PM IST

ग्वालियर. कोरोना संक्रमण का प्रभाव अंचल के 500 से अधिक गांवों में चना, मटर और सरसों की फसल पक चुकी है। इसमें से सरसों और मटर कट चुकी है जबकि चने की फसल पक चुकी है और कटना शुरू हो रही है। इसके लिए किसानों को लेबर नहीं मिल रही है। जबकि डबरा और भितरवार में करीब पौने दो लाख किसानों ने 1 लाख 20 हजार हैक्टेयर भूमि में गेहूं की फसल की है।

घाटीगांव और मुरार क्षेत्र में करीब 9 हजार हैक्टेयर में गेहूं बोया गया है। किसानों को इस फसल की कटाई के लिए हार्वेस्टर बुकिंग करने में परेशानी आ रही है, क्योंकि हार्वेस्टर संचालक अभी कटाई के दाम नहीं बता रहे हैं। किसानों का कहना है कि फसल कटवा भी लेंगे तो मंडी में बेचने नहीं जा सकेंगे, जिससे आर्थिक संकट खड़ा होने की संभावना है। इस मामले में कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फसल कटाई के लिए समुचित व्यवस्था करा रहें हैं, आने वाले 10 से 15 दिन में फसल कटना शुरू हो जाएगी।

बुकिंग में यह आ रही समस्या

  • पिछली साल 400 रुपए बीघा कटाई की दर थी।
  • इस बार अभी तक हार्वेस्टर संचालकों ने रेट नहीं खोले हैं।
  • हार्वेस्टर संचालकों में यह भी मैसेज है कि कटाई से पहले पंजीयन कराना पड़ेगा।
  • पंजीयन के बाद हार्वेस्टर संचालकों को एक ही क्षेत्र में बंधकर रह जाना पड़ेगा।
  • कृषि विभाग ने भी इसके लिए कोई गाइडलाइन जारी नहीं की है।

डीजल की भी किल्लत : -किसानों का कहना है कि गांव से पेट्रोल पंप तक जाने पर पंप संचालक डीजल देने से मना कर रहे हैं। सिर्फ पेट्रोल दे रहे हैं। वर्तमान में उसी किसान को डीजल दस से बीस रुपए मंहगा लेने को तैयार हो रहा है।

क्षेत्रीय लेबर गई दूसरेे जिलों में : घाटीगांव, भितरवार, डबरा क्षेत्र की आदिवासी बस्तियों में रहने वाली लेबर सरसों कटाई के लिए भिंड, मुरैना जिले में चली गई है। इसके अलावा कुछ लेबर दतिया क्षेत्र में गन्ना कटाई के लिए गई है। पाबंदी के दौरान लेबर वापस भी नहीं आ सकती है। ऐसे में डबरा, भितरवार क्षेत्र के किसानों को स्थानीय लेबर मिलना मुश्किल हो रहा है।


यह बोले किसान

  • अमरोल निवासी सतेन्द्र सिंह रावत ने बताया कि हमारे परिवार के 600 बीघा गेहूं खेतों में खड़े हैं। हार्वेस्टर तो आ गए हैं परेशानी यह है कि कटाई के बाद गेहूं सीधे मंडी नहीं ले जा पाएंगे। घर में स्टोर करने के लिए कुछ व्यवस्था करनी पड़ेगी। लेबर मिलना तो मुश्किल है।
  • डबरा के पठा-पनिहार निवासी राजेन्द्र का कहना है कि धान के बाद गेहंू की फसल की थी, अभी पकने में कुछ समय और लगेगा, कट तो हार्वेस्टर से जाएगी लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत स्टोरेज की आएगी।
  • सिरसा-सेकरा निवासी कृषक रामेन्द्र सिंह ने बताया कि 125 बीघा गेहूं की फसल खेतों खड़ी है। पकी फसल को कटवाने का समय है लेकिन लेबर की व्यवस्था अभी नहीं है। हार्वेस्टर आ रहे हैं, इसके बावजूद परेशानी यह है पुलिस हार्वेस्टरों को गांव में नहीं आने दे रही है।

क्षेत्र में फसल पककर तैयार हो रही है, अभी 10 से 15 दिन का समय और लगेगा। इसके बाद फसल कटाई शुरू होगी। चना, सरसों, मटर की फसल कटने लगी है। हार्वेस्टर के लिए लेबर की व्यवस्था कराएंगे।
आनंद बड़ोनिया, उप संचालक-कृषि

Gaurav Sen
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