तिरंगे झंडे की बिक्री पर भी कोरोना की मार, पिछले साल 5 माह में बिके थे 6 हजार, इस बार 4 हजार ही बिके, 25 लाख रुपए की हानि

ग्वालियर. देशभर के शासकीय और अद्र्धशासकीय कार्यालयों के साथ कई मंत्रालयों पर लहराने वाले तिरंगे झंडे हमारे शहर में ही तैयार होते हैं। जीवाजीगंज स्थित मध्य भारत खादी संघ की ओर से तैयार किए जाने...

ग्वालियर. देशभर के शासकीय और अद्र्धशासकीय कार्यालयों के साथ कई मंत्रालयों पर लहराने वाले तिरंगे झंडे हमारे शहर में ही तैयार होते हैं। जीवाजीगंज स्थित मध्य भारत खादी संघ की ओर से तैयार किए जाने वाले तिरंगे झंडे को इस साल कोरोना महामारी की मार झेलनी पड़ी है। पिछले साल अप्रेल से अगस्त माह तक देश के तीसरे और प्रदेश के इकलौते संघ ने 6 हजार झंडों की बिक्री की थी, जबकि इस बार इतने ही समय में 4 हजार झंडे ही बिके हैं और इससे करीब 25 लाख रुपए की हानि हुई है। स्कूल, कॉलेज और सरकारी संस्थानों के बंद रहने से तिरंगे झंडों की बिक्री पर भी असर पड़ा है। आईएसआई प्रमाणित तिरंगे झंडे देश में कर्नाटक के हुबली, मुंबई और ग्वालियर में ही बनाए जाते हैं। शहर में तैयार होने वाले तिरंगे की खासियत यह है कि कपड़े बनाने से लेकर उसकी टेस्टिंग तक संस्था की ओर से ही की जाती है। यहां बता दें कि मध्य भारत खादी संघ की ओर से साल भर में करीब 10 हजार से अधिक तिरंगे झंडे बनाए जाते हैं।


इन साइज के बन रहे तिरंगे
मध्य भारत खादी संघ राष्ट्रीय ध्वज प्रबंधक डोंगर सिंह कुशवाह ने बताया कि वर्तमान में आइएसआइ प्रमाणित तीन साइज के तिरंगे तैयार किए जा रहे हैं। इनमें 2 बाय 3 फीट, 6 बाय 4 फीट, 3 बाय साढ़े चार फीट के झंडे शामिल हैं। संस्था की ओर से हर 15 दिनों में 300 झंडे बना लिए जाते हैं। यहां तैयार हुए झंडे मप्र के साथ-साथ बिहार, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़, बंगाल, हरियाणा और गुजरात आदि राज्यों में जाते हैं। मध्य भारत खादी संघ की स्थापना 1950 में हुई थी।


कोरोना महामारी के चलते इस साल तिरंगों के उत्पादन कम हुआ है। इसके साथ ही स्कूल, कॉलेज के बंद होने के कारण बिक्री पर बड़ा असर पड़ा है। इससे करीब 25 लाख रुपए की हानि हुई है। यहां बने आईएसआई प्रमाणित तिरंगे देश भर में जाते हैं।
वासुदेव शर्मा, अध्यक्ष, मध्य भारत खादी संघ

रिज़वान खान Desk
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