महापौर पद हासिल करने दावेदार लगा रहे हैं दम

महापौर पद हासिल करने दावेदार लगा रहे हैं दम
महापौर पद हासिल करने दावेदार लगा रहे हैं दम

Rajendra Talegaonkar | Updated: 09 Oct 2019, 08:58:11 PM (IST) Gwalior, Gwalior, Madhya Pradesh, India

ग्वालियर। हाईकोर्ट में शहर के रिक्त पड़े महापौर पद का मामला पहुंचने के बाद इसके लिए हाईकोर्ट द्वारा दी गई समय अवधि को देखते हुए सभी दावेदारों ने पूरी दम लगा दी है। हालांकि इस पद को लेकर सिंधिया ने शहर के नेताओं से रायशुमारी कर ली है।

प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, विधायक मुन्नालाल गोयल, विधायक प्रवीण पाठक, जिलाध्यक्ष देवेन्द्र शर्मा एवं प्रदेश महामंत्री सुनील शर्मा को सिंधिया ने नाम तय करके देने के निर्देश दिए थे। इस कारण ये सभी नेता कांग्रेस कार्यालय में बैठे भी थे, लेकिन सभी अपने-अपने पठ्ठों को लेकर अड़ गए इस कारण इस बैठक में कोई फैसला नहीं हो सका था। बाद में सभी ने चार नामों का पैनल बनाकर सिंधिया को भेज दिया था। सिंधिया ने नगर आगमन के बाद इस संबंध में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश अग्रवाल सहित अन्य नेताओं से मंत्रणा कर किसे महापौर बनाना है इस पर निर्णय ले लिया है। लेकिन यह नाम किसका है इसकी भनक अभी किसी को नहीं लग सकी है। इस बीच इस पद पर दावेदार के रुप में जो नाम आए हैं उनमें नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष कृष्णराव दीक्षित, हरी पाल, चतुर्भुज धनोलिया, राजेश भदौरिया तथा विकास जैन के नाम शामिल हैं।

विरोध के अपने-अपने कारण

जो नाम सामने आएं हैं उन नामों में विरोध के भी अपने-अपने कारण हैं। जिन नेताओं को जिम्मेदारी दी थी वे भी अपने-अपने नामों के लिए प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए प्रभारी मंत्री व अन्य मंत्रियों से भी संपर्क किया गया है। तीन बार के पार्षद कृष्णराव दीक्षित का नाम आने पर जो लोग उन्हें नहीं चाहते वे उनकी शिकायतें करा रहे हैं। वहीं हरी पाल के नाम पर तीन जनप्रतिनिधि दम लगा रहे हैं। चूंकि यह पद सामान्य वर्ग के लिए है इसलिए सभी नेता इस पद को सामान्य वर्ग को ही दिए जाने की वकालत कर रहे हैं। संगठन में पदाधिकारी राजेश भदौरिया के नाम की सिफारिश कर रहे हैं। दो दावेदारों की आपराधिक कुंडली खंगाल कर उनकी शिकायत भी कर दी है। इन शिकायतों का क्या असर होगा यह तो महापौर पद पर नाम की घोषणा के बाद ही पता चलेगा।

१४ को होगी हाईकोर्ट में सुनवाई

महापौर के पद पर नियुक्ति में देरी को लेकर शासन को १४ तक अपना जवाब पेश करना है। इस मामले में १४ अक्टूबर को सुनवाई होना है इसलिए यह तय है १४ से पहले ही महापौर का नाम सामने आ जाएगा।

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