scriptCowshed for the birth of the Lord Jesus began to take shape in churche | गिरजाघरों में आकार लेने लगी प्रभु यीशु के जन्म के लिए गोशाला | Patrika News

गिरजाघरों में आकार लेने लगी प्रभु यीशु के जन्म के लिए गोशाला

शहर में क्रिसमस की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है। गिरजाघरों को रंग रोगन कर चमकाकर संजाने का काम शुरू हो गया है। इसके साथ ही प्रभु यीशु के जन्म के लिए चर्चो में गोशालाएं आकर लेने लगी हैं। कहीं गोशाला बनकर तैयार हो गई हैं तो कहीं बनाई जा रही हैं।

ग्वालियर

Published: December 22, 2021 06:56:21 pm

ग्वालियर. शहर में क्रिसमस की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है। गिरजाघरों को रंग रोगन कर चमकाकर संजाने का काम शुरू हो गया है। इसके साथ ही प्रभु यीशु के जन्म के लिए चर्चो में गोशालाएं आकर लेने लगी हैं। कहीं गोशाला बनकर तैयार हो गई हैं तो कहीं बनाई जा रही हैं।
क्रिमसस ईसाई समाज का प्रमुख त्योहार है। इस दिन प्रभु यीशु के जन्म पर ईसाई समाज खुशी मनाता है। इसके लिए गिरजाघरों को रंगरोगन कर चमकाया जा रहा है। इसके साथ ही गिरजाघरों में आकर्षक लाइटिंग के साथ ही डेकोरेट किया जा रहा है। गिरजाघरों में गोशालाएं आकार लेने लगी हैं। कहीं बनकर तैयार हो गई है तो कहीं बनाई जा रही हैं। गोशालाएं 22 दिसंबर तक तैयार हो जाएंगी। मुरार संत पॉल चर्च के प्रवक्ता एबिल एक्सट्रोस ने बताया कि इस साल में प्रार्थना के समय में बदलाव किया गया है। हर साल यह प्रार्थना रात 11.30 बजे होती थी लेकिन इस साल कोरोना के कारण प्रार्थना शाम 7.30 बजे होगी।
बाजार में हो रही झालरों व आर्टिफिशिएल फ्लोवर की खरीद
क्रिसमस के लिए एक ओर जहां गिरजाघरों को सजाया जा रहा है वहीं ईसाई परिवार भी अपने घरों को सजाने में जुट गए हैं। बाजारों में ईसाई परिवार झालरें व आर्टिफिशिएल फ्लोवर व कैंडेल खरीद रहे हैं।
गिरजाघरों में आकार लेने लगी प्रभु यीशु के जन्म के लिए गोशाला
गिरजाघरों में आकार लेने लगी प्रभु यीशु के जन्म के लिए गोशाला
क्यों बनाई जाती है चर्चों में गोशाला
महागिरिजाघर फालका बाजार पल्ली परिषद के सदस्य राजू फ्रांसिस ने बताया कि प्रभु यीशु के जन्म स्थान के प्रतीक के रूप में गोशाला बनाई जाती है जिस पर विश्वास किया जाता है कि प्रभु यीशु मसीह का जन्म बेथलहम नगर की एक गोशाला में हुआ था उनके जन्म के लिए कोई स्थान उपलब्ध नहीं था तो किसी ने अपनी गोशाला में उनको स्थान दिया और वही प्रभु यीशु का जन्म हुआ। 2000 साल के बाद भी सभी गिरजाघरों में और घरों में प्रभु यीशु के नम्र एवं दीनता के स्वरूप गोशाला बनाई जाती है।

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