आसमां छूने को तैयार बेटियां, हर फील्ड में रास्ता खुद बनाया

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस: स्टडी के साथ समाज के लिए भी दे रहीं योगदान

By: Mahesh Gupta

Published: 11 Oct 2021, 10:41 PM IST

ग्वालियर.

बेटियां आज आसमां छूने को तैयार हैं। वे हर फील्ड में अपना रास्ता खुद बना रही हैं। अपना लक्ष्य वह कॉलेज टाइम से ही चुन रही हैं और हर परिस्थिति में अपने सपनों को पूरा कर रही हैं। बेटियां मल्टीटैलेंटेड हैं। वह किसी एक विधा में नहीं बल्कि कई विधाओं में पारंगत हैं और कॉलेज टाइम से ही वे गोल्ड मेडल व सम्मानित होकर इसका प्रमाण दे रही हैं। वे पढ़ाई के साथ ही समाज में भी अपना योगदान दे रही हैं। आज अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर आपको ऐसी ही बेटियों से परिचित करा रहे हैं।

काबलियत से पाए 7 गोल्ड मेडल, अब कैंब्रिज में स्टडी
मन में यदि कुछ अलग करने का जज्बा हो तो कोई भी काम असंभव नहीं होता। यह जज्बा उनका स्कूल टाइम से दिखा। उस दौरान उन्होंने कई अवॉर्ड अपने नाम किए। रक्षिता अग्रवाल ने 2015 में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी ओडिसा में एडमिशन लिया। पढ़ाई के साथ-साथ अदर एक्टिविटीज में भी पार्टिसिपेट किया। विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य रखा और अपने लक्ष्य पर फोकस कर 7 गोल्ड मेडल अपने नाम किए। यूनिवर्सिटी से रक्षिता पहली स्टूडेंट रही, जिन्होंने एक साथ 7 गोल्ड मेडल अपने नाम किए। उन्हें यह गोल्ड मेडल चीफ जस्टिस ऑफ ओडिसा हाईकोर्ट डॉ. एस. मुरली धर, पद्मश्री डॉ. प्रतिभा रे, कुलपति वेद कुमारी, रजिस्ट्रार प्रो. योगेश प्रताप ने दिया। इस समय रक्षिता कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल लॉ में मास्टर कर रही हैं।

शंकराचार्य जी पर कर रहीं रिसर्च, 14 विषयों पर शोध पत्र पब्लिश
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के लिए रिसर्च वर्क कर रहीं आद्या दीक्षित पढ़ाई के साथ ही समाज के लिए भी काम कर रही हैं। उन्होंने ह्यूमन टै्रफकिंग से गल्र्स को निकलवाया और ट्रांसजेंडर के लिए काम किया। आद्या 300 कविताएं, निबंध और कहानियां लिख चुकी हैं। उनके 14 विषयों पर शोध पत्र पब्लिश हो चुके हैं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की ब्रांड एम्बेसडर होने के साथ ही कई सम्मान से विभूषित हो चुकी हैं। आद्या देश में 5वें और मप्र में फस्र्ट यंगेस्ट ग्रेजुएट हैं। उन्होंने ग्रेजुएशन महज 17 साल की उम्र में ही पूरा कर लिया। वह 2015 में बालश्री अवॉर्ड से भी सम्मानित हो चुकी हैं। वह पुस्तक ‘आप्लावन’ भी लिख चुकी हैं। अभी उन्होंने गुजरात में एक माह रहकर शंकराचार्य जी पर रिसर्च किया है, जो उन्हें अगले माह सम्मिट करना है।

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