डेंगू का पूरी तरह खात्मा मुश्किल : मलेरिया अधिकारी

डेंगू के बढ़ते प्रकोप के चलते स्वास्थ्य विभाग ने हाईरिस्क वाले क्षेत्रों में विशेष तौर पर अभियान की शुरुआत भी की है।
लेकिन ये बढ़े नहीं इसके लिए लोगों को जागरुकता दिखानी होगी।

ग्वालियर. अंचलभर में डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। डेंगू के बढ़ते प्रकोप के चलते स्वास्थ्य विभाग ने हाईरिस्क वाले क्षेत्रों में विशेष तौर पर अभियान की शुरुआत भी की है। लेकिन कई क्षेत्रों में अभी भी फॉगिंग नहीं कराए जाने और लार्वा की जांच नहीं होने से डेंगू फैलने की आशंका बनी हुई है। हालांकि मलेरिया विभाग की ओर से तो युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन कई अस्पताल प्रबंधनों द्वारा इसकी रोकथाम को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। साथ ही लोग भी जागरुकता नहीं दिखा रहे हैं, जब भी टीम लार्वा की जांच करने के लिए पहुंचती है तो लोग उन्हें दरवाजे से ही लौटा देते हैं। ऐसे में टीम को मौके से लार्वा लेने में परेशानी होती है। डेंगू पर अंकुश लगाए जाने के संबंध में मलेरिया अधिकारी मनोज पाटीदार से पत्रिका की चर्चा।

-डेंगू के अभी तक कितने मरीज मिल चुके हैं ?
- अभी तक करीब 339 मरीज डेंगू के मिले हैं, जिनका उपचार चल रहा है।
-डेंग से हाई रिस्क वाले क्षेत्र कौन- कौन से हैं और वहां रोकथाम के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं ?
- वार्ड क्रं 3,4, 18,19 और 20 वाले क्षेत्र हाई रिस्क वाले हैं, जहां पर पिछले वर्ष की अपेक्षा 70 प्रतिशत तक गिरावट हुई है। फिर भी यहां पर विशेष तौर पर अभियान चलाकर लार्वा के लिए सर्वे कराया जा रहा है, साथ ही फॉगिंग भी कराई जा रही है।
- डेंगू के खात्मे को लेकर विभाग ने क्या कार्य योजना बनाई है ?
- डेंगू का पूरी तरह से खात्मा तो मुश्किल ही है, क्योंकि अभी तक ऐसी कोई वैक्सीन नहीं बनी है। हालांकि इसके कंट्रोल के इंतजाम जरूर किए जा सकते हैं। इसके लिए ही सतत निगरानी बनाए रखे हुए हैं, साथ ही ऐसे क्षेत्रों में अभियान भी चला रहे हैं।
- कई वार्डों में न तो सर्वे हुआ है और न ही फॉगिंग की गई है?
- हमारी ओर से तो सभी जगह सर्वे कार्य कराया जा रहा है, लेकिन कई क्षेत्रों में लोग सहयोग नहीं कर रहे हैं। इसके लिए लोगों को जागरुकता दिखानी होगी। हम तो सभी से कह रहे हैं कि पानी को ज्यादा दिनों तक नहीं रखा जाए, लोग क्या पानी को पूरी तरह से खत्म नहीं करते हैं और बदलते रहते हैं। इसके लिए लोगों को गंभीरता दिखानी होगी।

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राजेश श्रीवास्तव Desk
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