प्रतिबंध के बावजूद बाजार में बिकने आए पीओपी से बने श्रीजी

- मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लगा रखा है प्रतिबंध, आदेश भी किया था जारी - कारीगर पीओपी की प्रतिमाएं नहीं बनाएं, फिर भी पीओपी की प्रतिमाओं की भरमार
- सभी प्रमुख जगहों पर बिकती देखी जा सकती हैं पीओपी की प्रतिमाएं, जिला प्रशासन फिर भी आंखे किए है बंद

By: Narendra Kuiya

Published: 10 Sep 2021, 10:47 AM IST

ग्वालियर. गणेश चतुर्थी के पर्व के लिए शहर के सभी प्रमुख बाजारों में गणेश जी की प्रतिमाएं बिकने के लिए आ चुकी हैं। बाजार में मिट्टी की प्रतिमाओं के साथ-साथ प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी प्रतिमाएं भी बिक रही हैं और इनकी बिक्री को रोकने वाला कोई नहीं है। पीओपी से बनी ये प्रतिमाएं दिखने में काफी आकर्षक व सुंदर नजर आती है। इसी के चलते लोग इन्हें खरीदने के लिए आकर्षित हो जाते हैं। पीओपी की प्रतिमाओं पर पूर्ण प्रतिबंध होने के बावजूद जिला प्रशासन पूरी तरह से आंखे मूंदे हुए हैं। ऐसे में इन्हें बेचने वालों के हौंसले भी बुलंद हैं। वहीं आमजन को भी पीओपी से बनी प्रतिमाओं से होने वाले नुकसान का अंदाजा नहीं है। राष्ट्रीय अधिकरण के निर्देश अनुसार पीओपी से निर्मित मूर्तियों पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाया जा चुका है, क्योंकि पीओपी से बनी प्रतिमाएं जल, जलीय, जीव-जंतुओं तथा पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती है।

ये दिया था आदेश
मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से आदेश जारी किए गए थे कि गणेश एवं दुर्गा उत्सव के लिए कारीगर व मूर्तिकार पीओपी की प्रतिमाएं नहीं बनाएं, यह प्रतिबंधित है। इनकी बजाय मिट्टी की प्रतिमाएं बनाई जाएं।

कई दिन से बन रही थीं प्रतिमाएं
पीओपी से बनी ये प्रतिमाएं शहर में काफी दिनों से तैयार की जा रही थीं। इन्हें बनने से रोकने के लिए प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया था। कई दिनों से इन्हें चोरी-छिपे बनाया जा रहा था और अब गणेश चतुर्थी से पूर्व बाजार में बिक्री के लिए ला दिया गया है।

पीओपी प्रतिमाओं से नुकसान
- पीओपी प्रतिमाओं से प्रदूषण होता है।
- पर्यावरण के लिए नुकसानदायक।
- जलीय जीव-जंतुओं के लिए भी खतरा।
- विसर्जन के बाद लंबे समय तक जल में नहीं घुलती।
- प्रतिमाओं के रंग से विसर्जन स्थल का जल हो जाता है विषाक्त।
- इस जल के उपयोग से किडनी व फेफड़ों की बीमारी होने की संभावना।

इसलिए अधिक बनती हैं पीओपी की प्रतिमाएं
पीओपी से बनी प्रतिमाएं मिट्टी से बनी प्रतिमाओं से सस्ती होती हैं। मिट्टी से तैयार की गई 5 फुट की प्रतिमा की लागत 7 से 8 हजार रुपए होती है वहीं पीओपी की प्रतिमा महज 3 हजार रुपए में तैयार हो जाती है। इसके साथ ही एक दिन में पीओपी की 50 प्रतिमाएं तक तैयार हो जाती हैं, वहीं मिट्टी की प्रतिमाओं को बनने लिए महीने भर इंतजार करना पड़ता है। इस वर्ष कुछ मूर्ति और प्रतिमाएं बनाने वालों ने मिट्टी की मूर्तियों के साथ भी पीओपी मिक्स करके मूर्तियां और प्रतिमाएं तैयार ली हैैं, ऐसी प्रतिमाएं भी बाजार में बिकने आई हुई हैं।

कार्रवाई की जाएगी
पीओपी की प्रतिमाएं और मूर्तियों की बिक्री पर पाबंदी है। यदि इनकी बिक्री की शिकायत मिलती है तो इस पर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सभी एसडीएम को बता दिया गया है।
- रिंकेश वैश्य, एडीएम

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