दीवान का नाम, सिपाही का काम, प्रमोशन मिला पर काम वही

लंबे समय से प्रमोशन के लिए परेशान पुलिस महकमे में निचले स्तर पर थोक पदोन्नति ने फोर्स को राहत तो दी है, लेकिन पद का कद बढऩे के बाद हालात ठीक नहीं....

ग्वालियर. लंबे समय से प्रमोशन के लिए परेशान पुलिस महकमे में निचले स्तर पर थोक पदोन्नति ने फोर्स को राहत तो दी है, लेकिन पद का कद बढऩे के बाद हालात ठीक नहीं हैं। बल्कि प्रमोट हुए पुलिसकर्मियों पर काम का बोझ बढ़ गया है। खासकर सिपाही से हवलदार बने पुलिसकर्मियों की स्थिति गड़बड़ है, क्योंकि सबसे ज्यादा पदोन्नत सिपाही हुए हैं। उन्हें प्रमोट कर हवलदार तो बनाया गया है, लेकिन इससे थानों में सिपाहियों का टोटा हो गया है। इन पुलिसकर्मियों को दीवान का नाम तो मिल गया है लेकिन काम सिपाही का भी करना पड़ रहा है।
पुलिस महकमे में हाल में प्रमोशन की बयार आई थी, इसमें सिपाही से सब इंस्पेक्टर तक के पुलिसकर्मियों का थोकबंद प्रमोशन हुआ है। इन्हें कार्यवाहक पदोन्नति दी गई है। इससे पुलिसकर्मी राहत में है। उनकी पदोन्नति को लेकर बनी चिंता तो दूर हुई है, लेकिन फोर्स नहीं उलझन में भी फंस गया है। दरअसल सिपाहियों को हवलदार, हवलदार को एएसआइ, एएसआइ को एसआइ और सब इंस्पेक्टर को निरीक्षक पदोन्नत किया गया है। पदोन्नति का बड़ा असर विभाग के सबसे निचली कड़ी सिपाही पर पड़ा है। ज्यादातर सिपाही प्रमोट होकर हवलदार बन गए हैं। ऐसे में सिपाही का काम संभालने वालों का टोटा हो गया है। इसका असर सिपाही से हवलदार बने पुलिसकर्मियों को झेलना पड़ रहा है। उनसे सिपाही के साथ हवलदार का काम भी कराया जा रहा है। कोतवाली थाने में पदस्थ हवलदार ने बताया प्रमोशन लिस्ट में नाम था तो सिपाही के पद पर लंबी नौकरी के बाद हवलदार तो बन गए, लेकिन काम वही है। हवलदार का तमगा मिलने के बाद भी रात गश्त में बंदूक टांगकर गश्त करना पड़ती है, क्योंकि थाने में सिपाही नहीं है। वैसे गश्त में हवलदार टीम का प्रभारी होता रहा है।

बीट के साथ दबिश में डयूटी
मसला सिर्फ बंदूक टांग कर गश्त तक सीमित नहीं है। जनकगंज थाने में पदस्थ हवलदार का कहना है कि पदोन्नति ने खुशी तो दी लेकिन काम दोगुना हो गया। थानों में सिपाही कम, हवलदार ज्यादा हो रहे हैं, इसलिए बीट की जिम्मेदारी के साथ गुंडे बदमाशों की पकड़-धकड़ की टीम में भी शामिल होना पड़ रहा है। वैसे यह काम टीम लीडर के साथ सिपाही का है।

सिपाहियों की इस डयूटी में उलझे हवलदार
सिपाहियों की कमी की वजह से हवलदार होने के बाद भी संतरी डयूटी, दबिश, कंधे पर बंदूक टांगकर गश्त, थाना मोबाइल की ड्राइविंग सहित वह तमाम काम हवलदार बनने के बाद भी करने पड़ रहे हैं जो सिपाही के हैं। इसी तरह हवलदार से एएसआइ, एएसआइ से एसआइ और सब इंस्पेक्टर से निरीक्षक बने पुलिसकर्मियों की है। निरीक्षक बनाए गए पुलिसकर्मी का कहना है कि निरीक्षक बनने की हसरत तो पूरी हो गई, लेकिन अब हालात यह हैं कि थानों से ज्यादा निरीक्षक हो गए हैं। अभी निरीक्षक स्तर के अधिकारियों को थाना हासिल के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ता था। अब थोक में निरीक्षक हो गए हैं तो थाने की कमान हासिल करना बड़ी चुनौती हो गया है। जाहिर है जिसका रसूख वजनदार होगा वही थाने की कमान संभालेगा।

रिज़वान खान Desk
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