1176 किमी. दूर स्कूटी से गर्भवती पत्नी को परीक्षा दिलाने लाए 'स्कूटी मैन' को मिला अडानी ग्रुप से ऑफर

पत्नी की पढ़ाई के लिए पति के जज्बे को सलाम करते हुए अडानी ग्रुप ने दिया ऑफर, फ्लाइट से वापस घर भेजने की जताई इच्छा..

By: Shailendra Sharma

Updated: 04 Sep 2020, 09:55 PM IST

ग्वालियर. तमाम मुश्किलों को पार कर 1176 किमी. का स्कूटी से सफर कर गर्भवती पत्नी को परीक्षा दिलाने के लिए ग्वालियर लेकर आए झारखंड के धनंजय की मदद के लिए अब हाथ बढ़ने लगे है। देश के प्रमुख उद्योगों में से एक अडानी ग्रुप ने पत्नी की पढ़ाई के प्रति धनंजय के जज्बे को देखते हुए उन्हें सलाम किया है और उनकी मदद करने की पेशकश की है। अडानी ग्रुप ने धनंजय और उनकी गर्भवती पत्नी सोनी हेम्बरम को फ्लाइट से वापस घर भेजने की इच्छा जताई है। वहीं ग्वालियर जिला प्रशासन ने भी धनंजय और उनकी पत्नी की मदद की है।

 

 

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अडानी ग्रुप ने फ्लाइट से वापस भेजने का दिया ऑफर
बांग्लादेश की सीमा से बमुश्किल 150 किलोमीटर दूर बसे झारखंड के गोड्डा जिले के गांव गन्टा टोला के रहने वाले धनंजय मांझी 1176 किमी. का सफर स्कूटी से तय कर गर्भवती पत्नी सोनी हेम्बरम को डीएलएड की परीक्षा दिलाने के लिए ग्वालियर लेकर आए हैं। तमाम मुश्किलों को पार कर पत्नी का शिक्षक बनने का सपना साकार करने में मदद करने वाले धनंजय की खबर जब मीडिया में आई तो अब उनकी मदद के लिए हाथ भी बढ़ने लगे हैं। अडानी ग्रुप ने उन्हें फ्लाइट से वापस घर भेजने का ऑफर दिया है। पत्रिका से बातचीत के दौरान खुद धनंजय मांझी ने इस बात की पुष्टि की है। धनंजय ने बताया कि अडानी ग्रुप की तरफ से उन्हें फ्लाइट की टिकिट की पेशकश की गई थी जिसके बाद उन्होंने अपने एक परिचित की मेल आईडी दी है और बातचीत के मुताबिक कल यानि कि शनिवार को उन्हें फ्लाइट की टिकिट अडानी ग्रुप की तरफ से मुहैया कराई जाएंगी।

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जिला प्रशासन ने बढ़ाया मदद का हाथ
पत्नी को परीक्षा दिलाने के लिए ग्वालियर आए धनंजय ने 1500 रुपए में एक कमरा 10 दिनों के लिए किराए पर लिया था। लेकिन जैसे ही धनंजय के संघर्ष और जज्बे की जानकारी जिला प्रशासन को लगी तो जिला प्रशासन भी मदद के लिए आगे आया। धनंजय ने दिल से प्रशासन का धन्यवाद देते हुए बताया है कि डीएम ने उनकी काफी मदद की है और जिला शिक्षा अधिकारी ने परीक्षा केन्द्र के पास ही रहने की व्यवस्था की है। भोजन आदि मूलभूत आवश्यकताओं की भी पूर्ति की गई है और साथ ही 5000 रुपए आर्थिक मदद के तौर पर मुहैया कराए हैं और परीक्षा समाप्ति के बाद उन्हें ये आश्वासन भी दिया गया है कि परीक्षा खत्म होने के बाद उनके झारखंड तक वापस पहुंचने की व्यवस्था भी प्रशासन करेगा।

सुनिए पत्रिका से धनंजय की बातचीत-

मुश्किलों भरा सफर लेकिन नहीं मानी हार
पत्रिका से बातचीत के दौरान धनंजय ने ये भी बताया कि वो हर हाल में पत्नी सोनी का शिक्षक बनने का सपना पूरा करना चाहते हैं। ट्रेन से रिजर्वेशन कराया था लेकिन ऐन वक्त पर ट्रेन कैंसिल हो गई। प्राइवेट बस वाले से बात की तो उसने तीस हजार रुपए में ग्वालियर तक पहुंचाने की बात की। धनंजय के पास इतने पैसे नहीं थे आर्थिक स्थिति कमजोर थी तो उसने पत्नी के जेवर दस हजार रुपए में गिरवी रखे और फिर उन्हीं पैसों से स्कूटी में पेट्रोल भरवाते हुए पहाड़ मैदानी रास्ते,बाढ़-बारिश और तमाम मुश्किलों को पार करते हुए परीक्षा दिलाने के लिए लेकर आए। उन्होंने रास्ते की एक रात मुजफ्फरपुर की लॉज में और लखनऊ के टोल टैक्स बैरियर पर काटी थी। बता दें कि डीएलएड की परीक्षा 1 सितंबर से शुरु हुई हैं और 11 सितंबर को खत्म होंगी।

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