स्नेहालय में रह रही दिव्यांग युवती की टीबी से मौत, केवल 23 किलो रह गया था वजन, फेफड़े, किडनी हो चुके थे डैमेज

सही देखभाल नहीं होने और समय पर समुचित इलाज नहीं मिलने से उसकी हालत बेहद खराब हो गई थी। वजन घटकर सिर्फ 23 किलो रह गया था, हृदय, किडनी और फेफड़े डैमेज हो चुके थे

By: Rahul rai

Published: 04 Apr 2019, 01:34 AM IST

ग्वालियर। पिछले साल सुर्खियों में रहे शेल्टर होम स्नेहालय में रह रही 22 वर्षीय दिव्यांग युवती नीतू की बुधवार को जेएएच में मौत हो गई। उसे गंभीर किस्म की टीबी थी। सही देखभाल नहीं होने और समय पर समुचित इलाज नहीं मिलने से उसकी हालत बेहद खराब हो गई थी। वजन घटकर सिर्फ 23 किलो रह गया था, हृदय, किडनी और फेफड़े डैमेज हो चुके थे। वह पिछले साल सितंबर में पहली बार अस्पताल में भर्ती कराई गई थी, उसके बाद सात बार भर्ती कराया गया।

 

पिछले साल अक्टूबर में जेएएच के डॉक्टरों ने उसकी हालत देखकर तत्कालीन कलेक्टर से उसे इलाज के लिए दिल्ली भेजने को कहा था, लेकिन कलेक्टर ने ध्यान नहीं दिया। युवती की मौत की जानकारी मिलने पर पुलिस ने शव कब्जे में लेकर तीन डॉक्टर के पैनल की निगरानी में पोस्टमार्टम कराया और उसकी भी वीडियोग्राफी कराई। इस दौरान प्रशासन और सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे। दिव्यांग युवती को पुलिस ने 2016 में मुरैना से लाकर स्नेहालय में रखवाया था। उस समय उसकी उम्र लगभग 18 साल थी।

 

पिछले साल स्नेहालय में एक दिव्यांग युवती के साथ यौन शोषण का खुलासा होने पर 23 दिव्यांगों का एग्जामिनेशन कराया गया था। इसके बाद गंभीर स्टेज पर पहुंच रहे 5 दिव्यांगों को इलाज के लिए जेएएच में भर्ती कराया गया। इनमें चार की स्थिति में सुधार हो गया था। कुछ समय बाद युवती की हालत में कुछ सुधार होने पर स्नेहालय भेज दिया गया। स्नेहालय को प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा टेकओवर किए जाने के बाद से 7 बार युवती को जेएएच में भर्ती कराया गया, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। 24 फरवरी को तबीयत ज्यादा खराब होने पर फिर भर्ती कराया गया, उसके बाद से स्थिति लगातार बिगड़ रही थी।

 

नहीं भेजा दिल्ली
-अक्टूबर में जब युवती को भर्ती कराया गया था, तब मेडिकल परीक्षण के समय उसकी हालत ज्यादा खराब देखकर डॉक्टरों ने तत्कालीन कलेक्टर अशोक वर्मा से कहा था कि उसे इलाज के लिए दिल्ली भेज दिया जाए, लेकिन कलेक्टर ने दिल्ली ले जाने के निर्देश नहीं दिए। तब दिल्ली ले जाते तो शायद उसकी जान बच सकती थी।

 

हमने उसे सात बार भर्ती कराया-
युवती को गंभीर किस्म की टीबी थी, इसके साथ वह मानसिक रूप से सक्षम नहीं थी। हमने उसे सात बार भर्ती कराया, लेकिन उसकी डेथ हो गई। हमने उसका अंतिम संस्कार लक्ष्मीगंज में करा दिया है।
राजीव सिंह, प्रशासक

 

जीरो पर कायमी, डायरी भेजी बिलौआ
स्नेहालय बिलौआ थाना क्षेत्र में आता है, इसलिए जांच बिलौआ पुलिस को करनी है। चूंकि नीतू की मौत जेएएच में इलाज के दौरान हुई है, इसलिए कंपू पुलिस ने जीरों पर कायमी कर पीएम कराया। डायरी बिलौआ थाने भेजी गई, अब बिलौआ पुलिस इसकी जांच करेगी।

 

जांच की जाएगी
नीतू को टीबी और अन्य कई बीमारियां थीं। संभवत: बीमारी से ही उसकी मौत हुई है। पीएम रिपोर्ट आने पर मौत की वजह स्पष्ट होगी। मर्ग कायम कर मामले की जांच की जा रही है।
अभय प्रताप सिंह, टीआई बिलौआ थाना

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