नाकों पर दिखावे की पहरेदारी

खांसी जुकाम से पहचानों कोरोना मरीज हिदायत देकर डाॅक्टर गायब
कोरोना से बचने के लिए नाकों पर पहरेदारी कितनी कारगर

By: Puneet Shriwastav

Published: 18 Apr 2020, 02:26 AM IST

गवालियर। इंदौर के क्वेरंटीन सेंटर की दीवार फांदकर भागे चार जमातियों ने नाकों की निगरानी में सेंध लगाकर करीब 535 किलोमीटर का सफर कैसे तय कर लिया। मुरेना में पकडे जाने पर कोरोना संक्रमितों को सवारी बनाकर ला रहे ट््र्रक चालक ने खुलासा किया कि एबी रोड से ग्वालियर में घुसा, नयागांव से बाइपास का रास्ता पकड कर मुरेना पहुंच गया।

कहीं भी न तो उसकी थर्मल स्क्रीनिंग हुई न गाडी में किसी ने झांका। कोरोना से बचने के लिए नाकों पर पहरेदारी कितनी कारगर है शुक्रवार को प़ित्रका ने भी स्थिति का जायजा लिया तो हालात चैकाने वाले थे। लाॅकडाउन फेज वन के पहले दिन से एंट्ी प्वाइंटस पर पुलिस के साथ बैठाए गए डाॅक्टर थर्मल स्क्रीनिंग गन सहित गायब है।

जिनकी डयूटी है वह स्टाफ को समझा गए हैं कि शक्ल से कोई बीमार दिखे तो उसे रोक लेना। उसमें कोरोना के लक्ष्ण दिखें तो फोन कर बुला लेना।
स्पाॅट वन - बेला की बावडी
स्मय - दोपहर 2:15 बजे करीब
फोटो---
इंदौर, भोपाल के रास्ते होकर एबी रोड से शहर में दाखिल होने के इस एट््र्री प्वाइट पर दोपहर के वक्त स्वास्थ विभाग और रेवेन्यू के दो कर्मचारी अनिल और अभय सहित एएआई बटटू तिवारी और सिपाही थे। प्वाइंट पर डाॅक्टर मनोज चैपडा की भी डयूटी थी। लेकिन दो दिन से वह नाके पर नहीं आए हैं।

थर्मल स्क्रीनिंग के लिए गन और उसे इस्तेमाल करने के लिए पैरामेडिकल स्टाफ तक नहीं है। टीम ने बताया कि डाॅक्टर आॅन काल हैं। उन्होंने कहा है कि कोई संक्रमित दिखे तो बुला लेना वह आॅनकाॅल हैं पांच मिनट में नाके पर आ जाएंगे।

हम तो रजिस्टर लेकर बैठे हैं जो आता है उसका नाम पता और मोबाइल नंबर दर्ज कर रहे हैं।
ऐसे करो संक्रमित की पहचान- नाके पर मौजूद टीम को समझाया गया है कि शहर में दाखिल होने वाला खांसता, छीकता या बीमार दिखे तो उसे रोक लिया जाए।
तलाशी नहीं सिर्फ पूछताछ- इंदौर से कोरोना संक्रमित जमातियों को नाकेबंदी का माखौल उडा कर निकले 24 घंटे भी नहीं हुए थे। उसके बावजूद वाहनों को सिर्फ रोककर उसने शहर में आने की वजह पूछकर खानापूर्ति हो रही थी।

बडे वाहनों की केबिन या लदे सामान में कोई छिपा तो नहीं है, इसकी चेकिंग नहीं थी। फोर्स दलील थी रसद, अत्यावश्यक सामान ले जा रहे वाहनों को जाने दे रहे है। तलाशी लेने पर सामान के पहुंचने में देर होगी। इसलिए बिना वजह रोकने की इजाजत नहीं है।
स्पाॅट टू- चिरवाई नाका
समय - दोपहर करीब 2:50 बजे
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चैराहे से शहर के अंदर आने वाले रास्ते को बेरीकेडस लगाकर बंद किया गया था। प्वाइंट पर नगरनिगम के कर्मचारी प्रमोद शर्मा और कुछ पुलिसकर्मी थे। शर्मा और पुलिसकर्मियों ने बताया पहले डाॅक्टर पराग गुप्ता आ रहे थे अब लाॅकडाउन फेज टू की शुरुआत के बाद से चिकित्सक नहीं आए हैं।

यह भी नहीं पता किस डाॅक्टर की यहां डयूटी है। इसलिए जरुरत पडने पर किसी बुलाएं नहीं मालूम। शुक्रवार सुबह एसपी भी आए थे। उन्हें भी हालात बता दिए हैं। प्वाइंट पर थर्मल गन भी नहीं है।

आने वाला संक्रमित हे या नहीं डाॅक्टर ही बता सकते हैं। नाके पर जो आता है उसका चेकअप तो कर नहीं सकते, इसलिए सिर्फ शहर जाने की वाजिफ वजह पर उसे आगे जाने दे रहे हैं।
स्पाॅट थ्री- विक्की फैक्ट््री
समय - दोपहर करीब 3ः20 बजे
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इस प्वाइंट पर वही कहानी थी। डाॅक्टर और थर्मल गन दोनों गायब थे। टेंट के नीचे पटवारी सुनील शर्मा और स्वास्थ विभाग के कर्मचारी राजकुमार खोईाय बैठे थे।

कर्मचारी अजय चिटनिस सहित रेवेन्यु टीम के सदस्य टेंट के पास वेंकट वीनस के कमरे में थे। चैराहे पर पुलिस फोर्स बैठा था। टीम का कहना थर्मल गन नहीं है 14 अप्रैल से डाक्टर भी नहीं आए हैं।

उनसे कहा गया है कि शक्ल देखो बीमार दिखे तो फोन कर बुलाओ। उसी आधार पर कोरोना संदिग्धों की पहचान में लगे है।
स्पाॅट फोर - निरावली नाका
समय - शाम करीब 4:10 बजे
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इस प्वाइंट पर आगरा जाने वाले रास्ते पर मुरैना पुलिस और स्वास्थ विभाग की टीम और दूसरे तरफ से शहर में आने वाली सडक पर ग्वालियर की टीम का तंबू लगा था। मुरैना की पुलिस टीम के साथ चिकित्सक श्वेता गुप्ता थर्मल गन सहित डयूटी पर थीं, लेकिन ग्वालियर के एंट््री प्वाइंट पर तंबू में रेवेन्यु के कर्मचारी मुकेश तोमर, शैलेष कुशवाह, स्वास्थकर्मी वीरेन्द्र कुशवाह और जयसिंह राजावत थे।

इन लोगों ने बताया कि लाॅकडाउन फेज टू के पहले दिन से डाक्टर ने आना बंद कर दिया है। थर्मल गन भी नही है अगर होती भी उसका इस्तेमाल किसी को नहीं आता।

इसलिए प्वाइंट पर आने वाला कोरोना संक्रमित है यह नहीं बता सकते। उसकी जरुरत को देखते हुए तय करते हैं उसे शहर में जाने दें या नहीं। रसद और सब्जियों के वाहनों को बिना रोक नहीं रहे हैं। चेकिंग प्वाइंट के जो हालात है उसकी रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को दे चुके हैं।

Puneet Shriwastav Reporting
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