बच्चों को जरूरत से ज्यादा न दें, उनको जिम्मेदार बनाएं

बच्चों को पैसे और सुविधा देने के बजाए क्वालिटी टाइम दें पैरेंट्स

By: Mahesh Gupta

Published: 01 Aug 2021, 11:30 AM IST

ग्वालियर.

कोरोना काल में बच्चे ऑनलाइन क्लास ले रहे हैं। क्लास लेते-लेते वे अन्य सामग्री देखने और गेम खेलने लग जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि माता-पिता उन पर ध्यान दें। उनके साथ ही रूम में बड़े भाई व बहन भी पढ़ाई करें। पालक बच्चों के साथ दोस्त की तरह व्यवहार करें, जिससे वे सारी बातें शेयर करेंगे और अनहोनी से बचा जा सकेगा। यह बात मनोचिकित्सक डॉ. कमलेश उदैनिया ने डिबेट में ही। यह डिबेट पत्रिका की ओर से छतरपुर में 13 साल के बच्चे ने की खुदकुशी जैसे गंभीर मामले पर ऑनलाइन रखी गई, जिस पर मनोचिकित्सक, काउंसलर, प्रिंसिपल और पैरेंट्स ने भी अपनी बात रखी। कार्यक्रम का संचालन समाजसेवी सीता पाणिग्रही ने किया।

बच्चों को डांटे मारे नहीं, उनके रिवॉर्ड बंद कर दें
डॉ. उदैनिया ने बताया कि घर के अंदर रहने से बच्चे डिप्रेशन, एंजायटी, हेजिटेशन के शिकार हो रहे हैं। उनके अंदर इंटरनेट एडिक्शन और गेम एडिक्शन बीमारी का रूप ले चुका है। ऐसे में माता पिता उन्हें सुरक्षित जगह आउटडोर एक्टिविटी में इन्वॉल्व करें। बच्चों को डांटे, मारे नहीं, बस उनके इंट्रेस्ट की चीजें और रिवॉर्ड देना बंद कर दें। बच्चे अपने आप सुधर जाएंगे।

अपनी जिम्मेदारी से पीछा न छुड़ाएं पैरेंट्स
काउंसलर अजय शर्मा ने कहा कि बच्चे अपने मार्ग से तभी भटकते हैं, जब उन पर पैरेंट्स ध्यान नहीं देते। पैरेंट्स भले ही वर्किंग हों, लेकिन उन्हें बच्चों को क्वालिटी टाइम देना होगा। उन्हें किसी और के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। बच्चों को यदि पैरेंट्स समय देने लगें, तो वे ऑनलाइन गेम की ओर नहीं जाएंगे। मोबाइल में कई ऐसे फीचर हैं, जिससे बच्चों को केवल ऑनलाइन क्लास तक ही सीमित रखा जा सकता है। बच्चों को आउटडोर एक्टिविटी से भी जोड़ें। उन्हें योग और मेडिटेशन भी कराएं।

सरकार बैन करे पेड गेम, भाई-बहन साथ पढ़ाई करें
सेंट्रल एकेडमी के प्रिंसिपल अरविंद सिंह जादौन ने बताया कि कोरोना के कारण बच्चे घर पर है। ऐसे में पैरेंट्स बच्चों का ध्यान रखें। सरकार को भी चाहिए कि ऐसे पेड गेम पर प्रतिबंध लगाए। इससे काफी संख्या में बच्चे बिगड़ रहे हैं। हमारे द्वारा बच्चों की काउंसलिंग की जा रही है। यदि माता-पिता दोनों वर्किंग है तो ऑनलाइन क्लास के दौरान भाई बहन को साथ रखें। बच्चे एक ही रूम में साथ पढ़ाई करें। इससे बच्चे अपने टै्रक से नहीं भटकेंगे।

स्कूल से ऑनलाइन हो काउंसलिंग
बच्चे पैरेंट्स की बात कम टीचर्स की बात ज्यादा मानते हैं। ऐसे में जरूरी है कि बच्चों के लिए साइकिलॉजिस्ट नियुक्त करें, जो समय-समय पर उनकी काउंसलिंग करे और अच्छे व बुरे में फर्क बताएं।
वंदना शर्मा, पैरेंट्स

न्यूक्लियर परिवार से बढ़ रहीं दिक्कतें
बदलते समय के साथ पैरेंट्स की लाइफस्टाइल में काफी परिवर्तन आया है। पहले संगठित परिवार होते थे, जिससे बच्चे दादा-दादी के साथ रहते थे। घर में उन पर ध्यान देने वाला कोई न कोई होता था। आज न्यूक्लियर परिवार से ये दिक्कतें बढ़ी हैं।
सीता पाणिग्रही, पैरेंट्स

बच्चों की जरूरत पूरी करें न कि शौक
पैरेंट्स अपने बच्चों का पैसे से लालन-पालन न करें। रिवॉर्ड के रूप में उनकी जरूरत पूरी करें, न कि शौक। उनसे बात करें, उनकी जरूरत समझें। कहानियों के माध्यम से मोरल वैल्यूज सिखाएं।
नीरू दीक्षित, पैरेंट्स

अदर एक्टिविटी के साथ मेडिटेशन कराएं
बच्चों को योग, मेडिटेशन कराएं। उन्हें अदर एक्टिविटी में इन्वॉल्व करें। उनके बर्थडे सेलिब्रेट करें। हर तरह से उनका दिल जीतें। दोस्त की तरह व्यवहार करें। वे आपसे हर बात शेयर करेंगे।
अंजू भदौरिया, पैरेंट्स

बच्चे यदि जिद करते है, तो उन्हें सिम्पल गेम खिलाने चाहिए। ऐसे गेम जिनमें टफ कॉम्पीटिशन है, वे खेलने से बचाएं। पैरेंट्स अपने सामने गेम खिलाएं तो बेस्ट रहेगा।
शिवानी सक्सेना, पैरेंट्स


बच्चों की क्लोज मॉनीटरिंग जरूरी
बच्चों की क्लोज मॉनीटरिंग जरूरी है। बच्चे पैरेंट्स को डराने का प्रयास करते हैं, इस बात को समझें। अच्छा करने पर उन्हें रिवॉर्ड दें और एप्रिशिएट करें। प्रेरक कहानियों के माध्यम से मोरल वैल्यूज सिखाएं।
सुजाता संग्राम सिंह, पैरेंट्स

Mahesh Gupta
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