इंजीनियरिंग एंड डिजाइन फील्ड से जुड़े होने के कारण अच्छा फिल्म मेकर बनने में मिला मौका

फिल्म निर्माता एवं निर्देशक पलाश वासवानी ने स्टूडेंट्स से कहा...

By: Mahesh Gupta

Published: 22 Jul 2021, 12:39 PM IST

ग्वालियर.

फिल्म मेकिंग में मुझे इंजीनियरिंग एंड डिजाइन फील्ड से जुड़े होने के कारण भी काफी फायदा मिला। किसी भी प्लानिंग को पेपर पर करना मेरे लिए ज्यादा फायदेमंद रहा। सुबह से शाम तक और हर रोज अपने काम की प्रैक्टिस करने की आदत रही। समय की महत्वता का ज्ञान रहा। मैं किसी भी शूट को अपने दिमाग में ही एडिट भी करता रहता था, जो कि एक टाइम एफिशियंट फिल्ममेकर बनाती है। 'नॉन फिल्म स्कूल बैकग्राउंडÓ ने मुझे टेक्निकल लैंग्वेज और ट्रेडिशनल से ज्यादा सोचने पर मजबूर किया। 'डिजाइनÓ ने मुझे स्वयं की लैंग्वेज डवलप करने में मदद की। इंजीनियरिंग कॉलेज और हॉस्टल लाइफ आपको एक अलग दुनिया से रूबरू कराते हैं, जिसका एक्सपीरियंस और विजन मुझे फिल्म मेकिंग में काम आया। मैं बेहतर तरीके से जान पाया कि मुझे क्या करना चाहिए और क्या नहीं। कुछ ऐसे ही निजी अनुभवों को शेयर कर रहे थे निर्माता एवं निर्देशक पलाश वासवानी। वे आइटीएम यूनिवर्सिटी ग्वालियर में आयोजित वेबिनार में स्टूडेंट्स से इंटरेक्ट कर रहे थे।

ऐसी फिल्म देखें, जो अच्छा इंसान बनने की प्रेरण दे: रूचि सिंह
पलाश वासवानी चर्चित वेब सीरिज गुल्लक और चीज केक के निर्माता हैं। शुरुआत में आइटीएम के प्रो वाइस चांसलर डॉ एसके नारायण खेड़कर ने उनका स्वागत किया। आइटीएम की चांसलर रूचि सिंह ने उन्हें कम उम्र में ही बेहतरीन फिल्म निर्माण के लिए बधाई दी। साथ ही स्टूडेंट्स को भी कहा कि मनोरंजन के लिए भी अगर फिल्में देखना है, तो ऐसी फिल्में देखें जो वाकई में आपको बेहतर कार्य करने या अच्छा इंसान बनने की प्रेरणा दे। फिल्में समाज पर जो सवाल छोड़ती हैं उन्हें भी एक बार जरूर सोचना चाहिए।

आइआइटी में नहीं हो पाया था एडमिशन
फिल्म निर्माता पलाश ने बताया कि वे आइआइटी में दाखिला लेना चाहते थे लेकिन उनका दाखिला नहीं हो पाया। उसके बाद उन्होंने मणिपाल यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की। उस दौरान उन्होंने बहुत सी शार्ट फिल्में एवं डॉक्यूमेंट्री बनाई और इन सब को बनाते-बनाते उनके चार साल पूरे हुए। इंजीनियरिंग करने के बाद उनकी नौकरी इंफोसिस कंपनी में लग गई। पलाश ने अपने संघर्ष अपनी सफलताओं का वर्णन बहुत ही आलोचनात्मक रूप से किया। स्टूडेंट्स को उन्होंने बताया कि उन्हें बचपन से ही फोटोग्राफी, फिल्म देखना और फिल्म मेकिंग करने का शौक था। इस दौरान स्टूडेंट्स ने जिज्ञासावश कई सवाल भी किए, जिसका उन्होंने कई किस्से और अपने अनुभवों के आधार पर जवाब दिया।

गुल्लक में दिखती है मध्यमवर्गीय की पीड़ा
पलाश वासवानी ने अपनी वेब सीरीज गुल्लक के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मध्यम वर्गीय परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी एवं मध्यम वर्गीय परिवारों की पीड़ा को इसमें खासतौर पर दर्शाया गया है। यह कहानी है बिजली विभाग में कार्यरत संतोष मिश्रा के परिवार की है। उनके परिवार में उनकी पत्नी और उनके दो बच्चे हैं। बड़े बेटे का नाम अनु है, जो पढ़ाई में बहुत कमजोर है। अनु की शादी की उम्र हो गई और वह बेरोजगार है। वहीं छोटा बेटा अमन हाईस्कूल की तैयारी कर रहा है। किस तरह से एक मध्यमवर्गीय परिवार हर सदस्य की समस्या के साथ, आर्थिक तंगी के बीच संघर्ष करता है, इसे काफी बेहतर तरीके से स्क्रीन पर प्रदर्शित किया गया है। हर एपिसोड में अलग-अलग घटनाक्रम दिखाए गए हैं, जो कई सवालों के साथ मध्यमवर्गीय के प्रति एक मर्म जगाती है।

Mahesh Gupta
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