रानी की गलती से पति की जगह इच्छाधारी नाग पर हो जाता है जड़ी-बूटी का असर

आर्टिस्ट्स कम्बाइन ग्वालियर का नाट्य उत्सव

By: Mahesh Gupta

Published: 12 Jul 2021, 09:37 AM IST

ग्वालियर.
आर्टिस्ट्स कम्बाइन ग्वालियर की ओर से ऑनलाइन नाट्य उत्सव के अंतर्गत रविवार को हिंदी नाटक 'नाग मंडलÓ का प्रीमियर हुआ। डेढ़ घंटे का यह नाटक नाग के बलिदान को दर्शाता है। यह प्रेम संबंधों की अनूठी गाथा है। यह प्रेम किसी मनुष्य का मनुष्य से नहीं बल्कि एक मनुष्य का नाग से है। औरत के ऊपर हो रहे जुल्म एवं पति पत्नी के बीच के संबंधों को गिरीश कर्नाड की इस कृति में बखूबी दर्शाया गया है। इस नाटक का मंचन एकलव्य थिएटर देहरादून की ओर से किया गया है। कार्यक्रम का संचालन सचिव संजय लघाटे ने किया।

ये है कहानी
रानी नव विवाहित है, उसका पति अपर्णा अधिकांश समय रखैल के साथ व्यतीत करता है, वो केवल दोपहर के भोजन के समय ही घर पर आता है। रानी केवल अपने पति का आकर्षण पाने के लिए उसके भोजन में अंधी मां द्वारा दी गई जड़ी मिला देती है, लेकिन भोजन जड़ी मिलाते ही खून के रंग में बदल जाता है। उसे देख रानी डर जाती है और वो उसे नाग की बांबी में उलट देती है। ऐसा करने से जो जड़ी-बूटी का असर उसके पति पर होना था वो इच्छाधारी नाग पर हो जाता है। अब हर रात नाग उसके पति अपर्णा का रूप धारण कर रानी के पास आता है। कुछ महीने के बाद रानी गर्भवती हो जाती है। उसका पति यह बात सुनकर अचंभित एवं क्रोधित होता है व रानी पर लांछन लगाता है और उसे पंचायत में ले जाता है और पंच उसे नाग का दिव्य करने को कहते हैं, जिसमें रानी पतिव्रता निकलती है, लेकिन उसका पति अपर्णा उसपर विश्वास नहीं करता।

पात्र परिचय
रानी- जागृति कोठारी
अपर्णा- अखिलेश नारायण
अंधी मां- परमजीत
कपर्णा- आकाश गुप्ता
नाग- हर्ष मिश्रा
कुत्ता- मयंक शाह
सूत्रधार- पंकज कुमार
सरपंच- फरमान खान

Mahesh Gupta
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