'आधार' में कैद होगी शिक्षकों की कुंडली

'आधार' में कैद होगी शिक्षकों की कुंडली

Manish Gite | Publish: Mar, 20 2015 12:09:00 PM (IST) Gwalior, Madhya Pradesh, India

फर्जीवाड़े को रोकने की कवायद, फैकल्टी फर्जीवाड़े को रोकने आरजीपीवी का नया प्ला...

देवेंद्र शर्मा
ग्वालियर. राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) अपने सभी निजी और शासकीय कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को आधार नंबर देने जा रहा है। इससे राज्य के हर कॉलेज में पदस्थ शिक्षकों का पेन कार्ड नंबर, मेल आईडी, आधार कार्ड नंबर, मोबाइल नंबर के साथ उनके शैक्षणिक अनुभव की जानकारी मांगी जा रही है। इसके आधार पर आरजीपीवी शिक्षकों का एक कोड नंबर भी तैयार करेगा, जिसे आधार नंबर बताया जा रहा है। यह व्यवस्था जुलाई २०१५ से शुरू होगी।

 यह नंबर शिक्षकों की नियुक्तियों में होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने में काफी मददगार साबित होगा। आरजीपीवी अपने वेब पोर्टल पर यह नंबर अपलोड करेगा, जिससे यह पता चल सकेगा कि वर्तमान में कौन सा शिक्षक कहां पदस्थ और कौन सा कॉलेज उनके नाम पर गलत तरीके से फायदा उठा रहा है।

ऐसे होता था खेल
कॉलेज संचालक आरजीपीवी को निरीक्षण के दौरान फैकल्टी की संख्या पूरी बताते हैं। यहां तक उन्हें नियुक्त कर निरीक्षण दल के सामने उपस्थित कर देते हैं। निरीक्षण होने के कुछ समय बाद संचालक फैकल्टी को बाहर कर देते हैं, लेकिन उनके नाम का वह भरपूर उपयोग करते हैं। उनको अपनी सूची, ब्रोशर और वेबसाइट पर दिखाते हैं। जबकि यह शिक्षक दूसरे कॉलेज में अपनी सेवाएं दे रहे होते हैं। इस व्यवस्था से इंजीनियरिंग की गुणवत्ता पर बट्टा लग रहा है।

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फैकल्टी के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सभी शिक्षकों की जानकारी मांगी जा रही है। इसके बाद उन्हें एक आधार नंबर दिया जाएगा। इससे उनकी वर्तमान स्थिति की सूचना मिलती रहेगी।
प्रो. पियूष त्रिवेदी कुलपति, आरजीपीवी

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