व्यक्ति का विनाश कर देता है अहंकार

- लक्ष्मीगंज स्थित रामद्वारा में शिव महापुराण का पांचवा दिन

By: Narendra Kuiya

Published: 18 Feb 2020, 11:19 PM IST

ग्वालियर. साधना के क्षेत्र में सबसे बड़ी जरूरत है कि साधक अहंकार से दूर रहे। जो साधक अहंकार से दूर रहता है वही साधना के क्षेत्र में आगे बढ़ सकता है। इसके लिए तीन की कृपा का अनुभव करना होगा। पहला भगवान की कृपा का अनुभव, दूसरा सद्गुरु की कृपा का अनुभव और तीसरा माता-पिता की कृपा का अनुभव। ये तीनों अनुभव हमारे जीवन में अहंकार नहीं आने देंगे। उक्त विचार सद्गुरु परिवार सेवा समिति की ओर से आयोजित लक्ष्मीगंज स्थित रामद्वारा में में चल रही शिव महापुराण की पावन कथा में संत रामप्रसाद महाराज ने व्यक्त किए।
उन्होंने आगे बताया कि अहंकार आठ प्रकार के होते हैं पहला अहंकार सत्ता का, दूसरा संपत्ति का अहंकार, तीसरा ऊंचे कुल का अहंकार, चौथा शरीर का अहंकार, पांचवा विद्या का अहंकार, छटा तप का अहंकार, सातवां प्रभुता का अहंकार, आठवां अपने रूप का अहंकार। यह आठों अहंकार होंगे तो व्यक्ति साधना में आगे नहीं बढ़ सकता लेकिन अहंकार का समर्पण करने से होता है जो अपने माता पिता को समर्पित होता है जो अपने गुरु को समर्पित होता है जो अपने इष्ट को समर्पित होता है वह कभी भी अहंकार नहीं कर सकता। कथा में कार्तिक स्वामी की उत्पत्ति की कथा एवं गणपति की उत्पत्ति की कथा को विस्तार से कहते हुए उन्होंने बताया गणपति को प्रथम पूज्य स्थान प्राप्त हुआ वह माता पिता के प्रति समर्पित थे। इसके साथ ही अपने गुरु के प्रति समर्पित थे, इसीलिए उन्हें प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। कथा में गणपति के स्वरूप की झांकी का दर्शन करवाया गया एवं रिद्धि-सिद्धि के साथ गणपति के विवाह का दर्शन भी कराया गया।

Narendra Kuiya Reporting
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