नियमों के फेर में फंसी उम्मीदें ढेर, अब क्या करेंगे माननीय!

-सरकारी जमीन पर बसे 1200 लोगों को नहीं मिल पाएंगे पट्टे-700 से अधिक लोगों को पट्टा दिलाने के लिए विधायक मुन्नालाल गोयल ने की थी अनुशंसा

-एसडीएम की रिपोर्ट के बाद अब सरकारी जमीन पर रह रहे लोगों की टूटी आस

By: Dharmendra Trivedi

Published: 03 Dec 2019, 11:01 AM IST

ग्वालियर। शहर की राजस्व और वन भूमि में अतिक्रमण करके झोपड़ी, पाटौर या पक्के मकान बनाकर रह रहे लोगों को बदले में या उसी जगह पट्टे मिलना मुश्किल है। जांच के दौरान यह सामने आया है कि अधिकतर जिस स्थान पर रह रहे हैं, वे वहां के मूल निवासी ही नहीं हैं और कुछ लोगों की गांव या दूसरी जगहों पर जमीन भी है। लोगों द्वारा जानबूझकर सरकारी जमीन पर कब्जा करके आवासीय इस्तेमाल किया जा रहा था।

 

इन सरकारी जमीनों पर रह रहे लोगों के अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के विरोध में धरना-प्रदर्शन करने के बाद आवास पट्टा देने के लिए लिखा गया विधायक का पत्र भी बेकार साबित हुआ है, बल्कि आवास के लिए लिखे गए पत्र के बाद हुई जांच में अब यह भी पता चल गया है कि दूसरी जगह के रहवासी होने के बाद भी लोगों ने सरकारी जमीन पर कब्जा करके मकान बनाए थे। सूत्र बताते हैं कि पूरी तैयारी के बाद अब प्रशासन आने वाले दस से पंद्रह दिन में फिर से शासकीय और वन भूमि पर हुए अतिक्रमण को साफ करने के लिए कार्रवाई करेगा।


इसलिए हुए कैंसल

जिन 1200 लोगों को आवास पट्टा प्रदान करने के लिए विधायक ने सिफारिश की थी, उनमें से आधे से ज्यादा स्थानीय मूल निवासी नहीं निकले हैं। छानबीन के दौरान यह भी पता चला है कि जो लोग सरकारी जमीन पर रह रहे थे, उनकी दूसरी जगह पर भी जमीन है। इसके अलावा वन भूमि पर रह रहे लोगों को आवास पट्टा नहीं दिया जा सकता है।


यह है पट्टे के लिए अनिवार्य

-राजस्व भूमि पर आवासीय पट्टा प्राप्त करने के लिए वर्ष 1992 या इससे पहले के रहवासी लोगों को पात्रता मिल सकती है।
-जिस क्षेत्र में लोग रह रहे हैं, वहीं के मूल निवासी होना अनिवार्य है।

-आवास पट्टा लेने की चाह रखने वाले आवेदक के पास किसी और जगह भूमि नहीं होना चाहिए।


यहां के लिए की थी सिफारिश

-विधायक मुन्नालाल गोयल ने सिरोल पहाड़ी पर रह रहे 109, मुरार में छह नंबर चौराहे से जड़ेरुआ तक सडक़ किनारे रह रहे 34, महाराजपुरा हवाई पट्टी के पास रह रहे 35, हुरावली फूटी कॉलोनी के पास रह रहे 304, मांढरे की माता क्षेत्र में रह रहे 112, डोंंगरपुर-सिरोल में रह रहे 20, महाराजपुरा रसूल झोपड़ी क्षेत्र में रह रहे 39, भगत सिंह नगर में रह रहे 85 और लेदर फैक्ट्री एरिया में रह रहे 33 रहवासियों सहित अन्य सरकारी जमीनों पर निवासरत लोगों को आवास पट्टा प्रदान करने के लिए कलेक्टर को पत्र लिखा था।

Dharmendra Trivedi
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