24 मई 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

एक ही जमीन के कई सौदे: फर्जी रजिस्ट्री कर कंपनी संचालक से ठगे 34.50 लाख

ग्वालियर. जमीनों की फर्जी रजिस्ट्री और धोखाधड़ी के मामलों पर लगाम नहीं लग पा रही है। ताजा मामला University Police Station क्षेत्र में सामने आया है, जहां एक कंपनी संचालक को कृषि भूमि बेचने के नाम पर 34 लाख 50 हजार रुपए की चपत लगा दी गई। आरोपी ने जिस जमीन का सौदा किया, उसका बड़ा हिस्सा पहले ही अन्य लोगों को बेच चुका था। इतना ही नहीं, बाद में सरकारी रिकॉर्ड में यह भी सामने आया कि संबंधित जमीन आरोपी के नाम पर थी ही नहीं। कोर्ट के आदेश के बाद विश्वविद्यालय थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

2 min read
Google source verification
पहले दूसरों को बेच दी जमीन, फिर उसी पर कर दी नई रजिस्ट्री; म्यूटेशन में खुला करोड़ों के खेल जैसा फर्जीवाड़ा

पहले दूसरों को बेच दी जमीन, फिर उसी पर कर दी नई रजिस्ट्री; म्यूटेशन में खुला करोड़ों के खेल जैसा फर्जीवाड़ा

पहले दूसरों को बेच दी जमीन, फिर उसी पर कर दी नई रजिस्ट्री; म्यूटेशन में खुला करोड़ों के खेल जैसा फर्जीवाड़ा

ग्वालियर. जमीनों की फर्जी रजिस्ट्री और धोखाधड़ी के मामलों पर लगाम नहीं लग पा रही है। ताजा मामला University Police Station क्षेत्र में सामने आया है, जहां एक कंपनी संचालक को कृषि भूमि बेचने के नाम पर 34 लाख 50 हजार रुपए की चपत लगा दी गई। आरोपी ने जिस जमीन का सौदा किया, उसका बड़ा हिस्सा पहले ही अन्य लोगों को बेच चुका था। इतना ही नहीं, बाद में सरकारी रिकॉर्ड में यह भी सामने आया कि संबंधित जमीन आरोपी के नाम पर थी ही नहीं। कोर्ट के आदेश के बाद विश्वविद्यालय थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक माधव नगर निवासी भावेश वाधवानी ‘साईं बाबा एग्रो एक्जिम प्राइवेट लिमिटेड’ के डायरेक्टर हैं। वर्ष 2024 में उन्होंने ग्राम गिरवाई स्थित कृषि भूमि खरीदने के लिए रामपाल सिंह तोमर से सौदा किया था। यह जमीन सर्वे क्रमांक 1149 और 1150 सहित करीब 0.1872 हेक्टेयर क्षेत्र में बताई गई थी। दोनों पक्षों के बीच 34 लाख 5 हजार रुपए में सौदा तय हुआ और 2 मार्च 2024 को रजिस्ट्री भी करा दी गई।

रजिस्ट्री के बाद भावेश ने जमीन का नामांतरण कराने के लिए तहसील कार्यालय में आवेदन दिया। 13 जून को पटवारी द्वारा की गई जांच में पूरे मामले का खुलासा हुआ। रिपोर्ट में सामने आया कि जिन सर्वे नंबरों की जमीन बेची गई थी, उनमें आरोपी रामपाल सिंह तोमर के हिस्से में उतनी भूमि बची ही नहीं थी, जितनी का सौदा उसने किया था।

जांच आगे बढ़ने पर पता चला कि आरोपी ने रजिस्ट्री से पहले ही करीब 25 हजार वर्गफीट जमीन अन्य खरीदारों असन बहरानी, निशा असरानी, एकता बनवारी और ज्योति देवी को बेच दी थी। इसके बावजूद उसने भावेश वाधवानी से पूरी जमीन का सौदा कर रकम वसूल ली।

मामले में सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब पंजीयक कार्यालय से रिकॉर्ड मंगाए गए। जांच में सामने आया कि जिस दस्तावेज नंबर और ग्रंथ का हवाला देकर रजिस्ट्री कराई गई, उस पर रामपाल सिंह तोमर के नाम से कोई वैध दस्तावेज दर्ज ही नहीं है। वहीं सरकारी रिकॉर्ड में संबंधित जमीन राजेश कुकरेजा नामक व्यक्ति के नाम पर दर्ज मिली। आशंका जताई जा रही है कि आरोपी ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कराई।

पीड़ित ने पहले पुलिस से शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय की शरण ली। कोर्ट के निर्देश पर अब विश्वविद्यालय थाना पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी और कूटरचना की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।