scriptFarmers of the division struggling with shortage of manure | खाद की कमी से जूझ रहे ग्वालियर- चबंल संभाग के किसान | Patrika News

खाद की कमी से जूझ रहे ग्वालियर- चबंल संभाग के किसान

कई जिलों में खाद के लिए रैक प्वॉइंट तक स्थापित नहीं कराए गए हैं। कई जिलों में खाद की कालाबाजारी भी की जा रही है। भिंड जिलें में शनिवार को ऐसा ही एक मामला पकड़ा गया था।

ग्वालियर

Updated: September 12, 2022 06:31:53 pm

ग्वालियर. चबंल संभाग के कई जिलों में डीएपी तथा यूरिया खाद का संकट उत्पन्न हो गया है। संभाग के किसानों को 1 लाख 54 हजार मीट्रिक टन खाद की जरूरत है, जबकि उपलब्धता महज 91 हजार 918 मीट्रिक टन ही है। रबी फसल की बोवनी शुरू हो गई है, लेकिन किसानों को यूरिया तथा खाद के लिए हर साल की तरह इस वर्ष भी कतारबद्ध होना पड़ रहा है। सालाना होने वाले खाद के संकट को लेकर प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता नहीं बरती जा रही है। कई जिलों में खाद के लिए रैक प्वॉइंट तक स्थापित नहीं कराए गए हैं। कई जिलों में खाद की कालाबाजारी भी की जा रही है। भिंड जिलें में शनिवार को ऐसा ही एक मामला पकड़ा गया था।
40 फीसदी निजी दुकानदार करते हैं खाद की बिक्री
पिछले कई सालों से खाद का वितरण सहकारी सोयायटी के माध्यम से 60 फीसदी किया जाता है, जबकि 40 फीसदी प्राइवेट दुकानों के माध्यम से हो रहा है। किसान 90 फीसद यूरिया, डीएपी व एनपीके खाद सहकारी समितियों के माध्यम से वितरण कराए जाने और 10 फीसदी प्राइवेट दुकानदारों के जरिए वितरण किए जाने की मांग कर रहे हैं। यह व्यवस्था लागू नहीं होने से किसानों के लिए खाद के संकट का स्थाई समाधान नहीं हो पा रहा है और किसानों को खाद के लिए शहर तथा कस्बों के खाद वितरण केंद्रों पर पहुंचकर रतजगा करना पड़ रहा है।
खाद की कमी से जूझ रहे संभाग के किसान
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किस जिले में खाद का कितना संकट
शिवपुरी जिले में 17 हजार मीट्रिक टन यूरिया के मुकाबले 12 हजार मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है। जबकि 42 हजार मीट्रिक टन डीएपी के मुकाबले 3800 मीट्रिक टन उपलब्ध है। वहीं 15 हजार मीट्रिक टन एनपीके खाद होने के बजाय 12 हजार मीट्रिक टन ही उपलब्ध है। श्योपुर में 7000 मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत है, जबकि उपलब्ध महज 200 मीट्रिक टन है। डीएपी की उपलब्धता भी अपेक्षानुरूप नहीं हो पाई है। इसी प्रकार मुरैना जिले में 20 हजार मीट्रिक टन खाद के स्थान पर महज तीन हजार 38 मीट्रिक टन की उपलब्धता हो पाई। वितरण उपरांत डीएपी 214 मीट्रिक टन और यूरिया 404 मीट्रिक टन है। भिण्ड जिले में 40 हजार मीट्रिक टन खाद के स्थान पर 2700 मीट्रिक टन यूरिया व 3400 मीट्रिक टन डीएपी मौजूद है।
उपलब्ध- आवश्यकता-
41604 मीट्रिक टन यूरिया 52000 मीट्रिक टन
21514 मीट्रिक टन डीएपी 77000 मीट्रिक टन
28800 एनपीके 25000 मीट्रिक टन

मांग के अनुरूप सभी जिलों में डीएपी व यूरिया उपलब्ध कराई जा रही है। जहां खाद की रैक नहीं पहुंच पाई है उन जिलों में जल्दी ही खाद पर्याप्त मात्रा में पहुंचेगी। किसानों को खाद का संकट नहीं होने दिया जाएगा।
आशीष सक्सेना, आयुक्त, चंबल संभाग, ग्वालियर

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