कोरोना का डर: 6 महीने से सैनेटाइज नहीं हुए थाने और हवालात

शहर में फिर से कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है। पांच दिन में कोरोना के 46 नए मरीज सामने आए हैं। आंकड़ों से जाहिर है कि शहर में हर दिन करीब 9 कोरोना संक्रमित...

ग्वालियर. शहर में फिर से कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है। पांच दिन में कोरोना के 46 नए मरीज सामने आए हैं। आंकड़ों से जाहिर है कि शहर में हर दिन करीब 9 कोरोना संक्रमित मिल रहे हैं। यह गिनती परेशान करने वाली है, लेकिन संक्रमण को रोकने के लिए सख्ती के कदम नहीं उठाए गए हैं।
फिलहाल सिर्फ बिना मास्क लगाए घर से निकलने वाले रडार पर हैं। उनकी निगरानी और लापरवाही पर जुर्माने का जिम्मा पुलिस को थमाया गया है, लेकिन हैरानी की बात है कि खुद पुलिस विभाग में संक्रमण को लेकर सतर्कता नहीं है। पुलिसकर्मी कहते हैं कि थानों में सुबह से शाम तक बाहरी लोगों की आवाजाही रहती है। शासन मान रहा है कि कोरोना खत्म नहीं हुआ है, लेकिन उसके बावजूद विभाग अलर्ट नहीं है। छह महीने से थाने और हवालातों को सैनेटाइज तक नहीं किया गया है, जबकि कोरोना से पुलिस भी अछूती नहीं रही है। कुछ समय पहले तक विभाग में कोरोना संक्रमितों का आकंड़ा 200 को छू चुका था।


मास्क गायब, थाना प्रभारी के चेंबर तक सीमित सोशल डिस्टेंसिंग
दूसरों को मास्क लगवाने की जिम्मेदारी तो पुलिस को थमाई गई है, लेकिन खुद थानों में ही कोविड सुरक्षा के नियमों का पालन नहीं हो रहा है। पुलिसकर्मी कहते हैं कि अनलॉक होने के बाद से थानों में कोरोना से बचाव के नियम भी गायब हो गए हैं। सिर्फ थाना प्रभारी के चेंबर में सोशल डिस्टेंसिंग और कांच की आड़ से बातचीत का नियम चल रहा है। हेडमोहरर्र के कक्ष से लेकर हवालात तक भगवान भरोसे है।

यहां फिर संक्रमण का खतरा
पुलिसकर्मियों के मुताबिक थानों में सबसे ज्यादा संक्रमण का खतरा हवालात में बंद किए जाने वाले संदेहियों और बंदियों से होता है। संदेहियों को हवालात की बजाए थाने के कमरे में ही बैठाया जाता है, लेकिन यह पता नहीं होता कि जिसे पकड़ा गया है वह संक्रमित तो नहीं है। थानों को सरकारी सैनेटाइजर मुहैया कराने की प्रक्रिया बंद हो चुकी है। पकड़े गए संदेही या वांटेड को सैनेटाइजेशन कराने के लिए पुलिसकर्मी अपनी जेब से पैसा खर्च नहीं करेंगे। ऐसे में पकड़ा गया बंदी या संदेही संक्रमण वाहक हो सकता है यह जानते हुए भी खतरा रोज सामने रहता है। इसी तरह हवालात में हर दिन बंदियों की आवाजाही रहती है, लेकिन उनका सैनेटाइजेशन नहीं होता है। उसमें एक ही कंबल और डिब्बा बंदी इस्तेमाल करते हैं।

इस तरह के सुरक्षा उपाय बेहद जरूरी
- पुलिसकर्मी कहते हैं कि दूसरों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए पुलिस को निगरानी का जिम्मा तो दिया गया है, लेकिन विभाग को भी उससे बचाने के लिए इंतजाम जरूरी है।
- थानों में सबसे ज्यादा बाहरी लोगों की आवाजाही हैड मोहरर्र कक्ष में होती है, वहां सैनेटाइजेशन, सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क का नियम जरूरी है।
- हवालातों को कम से सात दिन में सैनेटाइजेशन होना चाहिए
- हवालात में बंदियों को रखने से पहले थर्मल स्क्रीनिंग होना चाहिए।

वैक्सीनेशन के बाद बढ़ी लापरवाही
पुलिसकर्मियों के मुताबिक थानों में कोरोना से बचाव को लेकर लापरवाही वैक्सीनेशन के बाद ज्यादा बढ़ी है। ज्यादातर पुलिसकर्मी मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग से दूरी में लापरवाही के पीछे वैक्सीनेशन का हवाला देकर सुरक्षा को अनेदखा करते हैं, जबकि लगातार कहा जा रहा है कि वैक्सीनेशन के बावजूद सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क की सुरक्षा जरूरी है।

रिज़वान खान Desk
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