भगवान के चरणों से उतरे फूल बिखेर रहे खुशबू

आमतौर पर मंदिरों में भगवान पर चढऩे वाले फूल बाद में ऐसे ही कचरे में फेंक दिए जाते हैं, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। भगवान पर चढ़ाए गए फूलों का जाने-अनजाने...

ग्वालियर. आमतौर पर मंदिरों में भगवान पर चढऩे वाले फूल बाद में ऐसे ही कचरे में फेंक दिए जाते हैं, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। भगवान पर चढ़ाए गए फूलों का जाने-अनजाने में अनादर ना हो और ये फूल फिर से भगवान के चरणों में ही खुशबू बिखेरें तो कैसा हो। सुनकर थोड़ा अजीब लगता है पर इसी सोच को चरितार्थ कर रहे हैं जाने-माने पर्यावरण एवं अपशिष्ट प्रबंध विशेषज्ञ प्रो.ओमप्रकाश अग्रवाल।
उन्होंने शहर के मंदिरों से गुलाब, गेंदा, मोगरा आदि को इक_ा कर सुगंधित धूपबत्ती तैयार करने का बीड़ा उठाया है। हालांकि अभी इस प्रोजेक्ट को शुरू किए थोड़ा ही समय हुआ है फिर भी हर रोज 30 से 40 किलो धूपबत्ती बनकर तैयार हो रही है।


प्रोजेक्ट का नाम भी मंदिर से मंदिर तक
प्रो. ओमप्रकाश अग्रवाल ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के पीछे मेरा उद्धेश्य यही है कि मंदिरों में चढऩे वाले फूलों को अनादर ना हो। इस प्रोजेक्ट का नाम भी मंदिर से मंदिर तक रखा गया है। साथ ही बाजार में ये धूपबत्ती नो प्रॉफिट नो लॉस पर उपलब्ध करा रहे हैं। 10 किलो गुलाब के फूल को सुखाकर उसके पाउडर से करीब 25 किलो धूपबत्ती तैयार की जा रही है।


यहां भी चल रहा प्राजेक्ट
इस तरह का प्रोजेक्ट ऋषिकेश में भी चल रहा है, जिसे वहां की नगर निगम सहयोग प्रदान कर रही है। उन्होंने आगे बताया कि इससे पूर्व हम केंचुआ खाद भी बना चुके हैं। सराफा बाजार निवासी बृजेश नागर ने बताया कि सर के निर्देशन में हम धूपबत्ती तैयार कर रहे हैं। वाकई इस प्रोजेक्ट से मंदिर के फूल खुशबू के रूप में लोगोंं के पास पहुंच रहे हैं। धूपबत्ती में गाय के गोबर सहित ग्वार गम और जड़ी-बूटियोंं को मिलाया जाता है।

रिज़वान खान Desk
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