बेहमई हत्याकांड : बीहण पर राज करने वाली दस्यु सुंदरी ने इस वजह से किया था आत्मसमर्पण

foolan devi surrender to cm arjun singh story :खबर में आगे पढि़ए की फूलन के नाम के आगे देवी कैसे लगा और कैसे एक साधारण सी महिला खूंखार डकैत बन गई।

By: Gaurav Sen

Published: 06 Jan 2020, 02:40 PM IST

ग्वालियर/भिण्ड। दस्यु सुंदरी के नाम से प्रसिद्ध फूलन देवी एक बार फिर चर्चा में है क्योंकि बेहमई हत्याकांड पर सोमवार को फैसला आना है। साथ ही फूलन देवी की हत्या करने वाले शेरसिंह राणा की शादी हुई है जिसमें उन्होंने दहेज में मिली करोड़ो की दौलत को वापस कर दिया औरसिर्फ चांदी का सिक्का लेकर शादी रचाई। खबर में आगे पढि़ए की फूलन के नाम के आगे देवी कैसे लगा और कैसे एक साधारण सी महिला खूंखार डकैत बन गई।

खेलने कूदने की उम्र से ही फूलन देवी को कई संकटों से जूझना पड़ा था। फूलन देवी के साथ लगातार अत्याचार हुए। फूलन ने इन्हीं अत्याचारों का बदला लेने के लिए बीहड़ को जंगलों में कूद पड़ी। डकैत गिरोह की मेंबर बनी। लेकिन, लगातार 9 साल तक बीहड़ी जीवन से तंग आकर दस्यू सुंदरी फूलन देवी ने सन् 1983 में भिण्ड के एमजेएस मैदान में मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ आत्म समर्पण कर दिया था। फूलन को बागी जीवन से बाहर निकालने के लिए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक भिण्ड राजेंद्र चतुर्वेदी तथा उनकी पत्नी दीपा चतुर्वेदी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। समर्पण के समय उसके ऊपर 48 संगीन मामले दर्ज थे। फूलन देवी को करीब 11 साल तक ग्वालियर के केंद्रीय कारागार में रहना पड़ा।

इसके बाद उत्तर प्रदेश ने उसके ऊपर लगे सारे मुकद्दमे वापस ले लिए। वर्ष 1990 में जेल से छूटने के बाद फूलन देवी ने समाजवादी पार्टी (सपा) ज्वॉइंन किया। सन् 1996 में हुए लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें मिर्जापुर-भदौही लोकसभा सीट से टिकट दिया। वे भारी मतों से विजयी हुईं और लोकसभा पहुंचीं। वे सपा से दो बार सांसद चुनी गईं। 25 जुलाई 2001 को दिल्ली में उनके आवास के बाहर ही शेर सिंह नाम के एक युवक ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। फूलन का जन्म 10 अगस्त 1963 को गुरहा का पुरा जालौन में हुआ था। फूलन के पिता देवी दीन खेत मजदूर थे। महज 11 साल की उम्र में दस्यू सुंदरी की शादी 24 साल के पुत्तीलाल से कर दी गई। शादी से दुखी तथा चाचा से विवाद के चलते उसकी निकटता डकैत बाबू गुर्जर से बढ़ गई। बाबू ने उस पर जब बुरी नजर डाली तो उसी की मल्लाह जाति के विक्रम ने बाबू की हत्या कर दी।

फूलन तथा विक्रम ने अपना अलग गिरोह बनाया। इसके बाद बीहड़ में सक्रिय लालाराम श्रीराम ने विक्रम की हत्या कर फूलन के साथगैंगरेपकिया था। इसका बदला लेने के लिए फूलन ने बेमई (कानपुर देहात) में ठाकुर जाति के 20 लोगों की हत्या कर दी। बेमई कांड के बाद फूलन आतंक का पर्याय बन गई थी।

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