पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपई की प्रथम पुण्यतिथि, ग्वालियर में हुआ था जन्म

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपई की प्रथम पुण्यतिथि, ग्वालियर में हुआ था जन्म

Gaurav Sen | Updated: 16 Aug 2019, 12:04:32 PM (IST) Gwalior, Gwalior, Madhya Pradesh, India

former prime minister Atal Bihari Vajpayee first death anniversary: उनकी छवि ऐसे राजनेताओं में होती थी जिनका राजनीति में कोई शत्रु नहीं रहा।

ग्वालियर। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपई की आज पहली पुण्यतिथि है। साल 2018 अगस्त 16 को उनका 93 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। निधन के दौरान भी वेे अस्पताल में भर्ती थे। अटल बिहारी वाजपई के निधन पर पूरा देश गमगीन हुआ था। उनकी छवि ऐसे राजनेताओं में होती थी जिनका राजनीति में कोई शत्रु नहीं रहा। ग्वालियर में जन्में अटल बिहारी वाजपई के निधन की खबर जब शहर में फैली थी तो पूरा शहर शून्य हो गया था। लोगों की आंखों में आंसू थे। उनके ग्वालियर स्थित निवास पर हजारों लोगों की भीड़ इकठ्ठा हो गई थी। उनकी प्रथम पुण्यतिथि पर पीएम मोदी ने दिल्ली में उनके स्मृति स्थल सदैव अटल पर पहुंचकर नमन किया और पुष्प अर्पित किए। उनके साथ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सहित कई नेता मौजूद रहे।

ग्वालियर की रग-रग में अटल बिहारी वाजपई समाहित हैं। ग्वालियर में उनका नाम बड़े ही गर्व के साथ लिया जाता है। क्योंकि ग्वालियर की गलियों से निकलकर एक युवा देश का प्रधानमंत्री बना वो भी एक बार नहीं तीन-तीन बार। ग्वालियर में 25 दिसंबर 1924 को जन्मे। अटल जी मूलत कवि थे और शिक्षक भी रह चुके थे। 1951 में जनसंघ की स्थापना हुई और अटलजी ने राजनीति में प्रवेश किया। 1957 में वाजपेयी मथुरा से लोकसभा चुनाव लड़े लेकिन हार गए।
हालांकि,बलरामपुर सीट से वे जीत गए। 1975-77 के आपातकाल के दौरान वे गिरफ्तार किए गए। 1977 के बाद जनता पार्टी की मोरारजी देसाई की सरकार में वे विदेश मंत्री भी रहे। 1980 में उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी की नींव रखी। वे 10 बार लोकसभा सदस्य रहे।

अटल जी का मंदिर, जहां होती है भगवान की तरह पूजा

अटल बिहारी वाजपेयी के नाम सुनते ही भारत देश के राजनीति का एक ऐसा अध्याय हमारे सामने खुल के आ जाता है जिसे कोई कभी नहीं भूल सकता। राजनीति के भद्रपुरूष कहे जाने वाले अटर बिहारी वाजपेयी का राजनीतिक करियर इतना प्रभावशाली है कि राजनीति में कभी कोई उनका दुश्मन नहीं बना। हर कोई अटल जी की इज्जत देते हैं। मध्यप्रदेश के ग्वालियर से ताल्लुक रखने वाले अटल बिहारी वाजपेयी की कई यादें यहां से जुड़ी हुई हैं। जिनमें से एक है अटल जी का मंदिर। यह मंदिर विजय सिंह चौहान द्वारा बनावाया गया है।

former prime minister Atal Bihari Vajpayee first death anniversary

विजय सिंह चौहान ने शहर के सत्यनारायण टेकरी मंदिर पर हिंदी माता का मंदिर स्थापित करने के लिए जमीन खरीदी। वहां हिंदी माता का मंदिर बनाया। इसके बाद 1995 में नजदीक ही संयुक्त राष्ट्र संघ में अटल जी के हिंदी में भाषण की स्मृति में उनका मंदिर बना दिया। विजय सिंह ने बताया कि मंदिर के लिए अटल बिहारी की प्रतिमा बनवाई थी, लेकिन स्थापना से पूर्व उनके मंदिर के पास ही बने हिंदी माता मंदिर में स्थापित मूर्ति चोरी हो गई थी, लिहाजा अटल जी की प्रतिमा विजय सिंह ने उनके आवास पर जाकर उन्हीं को भेंट कर दी थी।

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