साख सहकारिता में पंजीयन कराया, माइक्रो बैंकिंग से निवेश कराकर लोगों से धोखाधड़ी

लगभग एक लाख निवेशकों से धोखाधड़ी करने वाली चिटफंड कंपनियों द्वारा किए गए फर्जीवाड़े पर नकेल कसने के बाद लोगों का पैसा हड़पने वालों ने सहकारिता विभाग में साख सहकारिता समिति पंजीकृत...

ग्वालियर. लगभग एक लाख निवेशकों से धोखाधड़ी करने वाली चिटफंड कंपनियों द्वारा किए गए फर्जीवाड़े पर नकेल कसने के बाद लोगों का पैसा हड़पने वालों ने सहकारिता विभाग में साख सहकारिता समिति पंजीकृत करवाकर काम जारी रखा है। माइक्रो बैंकिंग के नाम पर लोगों को बचत का झांसा देकर पांच साल के लिए पैसा जमा कराने वाली इन समितियों के आधे से ज्यादा संचालक अब पैसा वापसी में आनाकानी कर रहे हैं।
यह मामला तब बाहर आया जबकि शहर की रहवासी दो बचत खाताधारकों ने ग्वालियर मर्कें टाइल साख सहकारिता मर्यादित द्वारा पैसा वापस न देेने की शिकायत की। मां-बेटी ने बताया है कि बैंक संचालक ने हर महीने पांच सौ रुपए लिए हैं और अब जब हम अपनी रकम वापस मांग रहे हैं तो गायब है। इस शिकायत के बाद अब प्रशासन जिले की सभी साख सहकारिता समितियों की जानकारी इक_ी करवा रहा है। पूरी जानकारी इक_ी होने के बाद इनका रिकॉर्ड चेक किया जाएगा। इसके साथ ही इन समितियों के दस्तावेजों की वास्तविकता का भी पता लगाया ाजाएगा। शिकायत करने वालों द्वारा दिया गया संस्था संचालक का मोबाइल नंबर लगातार प्रयास के बाद भी कवरेज के बाहर बता रहा है। जबकि बचत खाता धारकों की पूर्व में इसी नंबर पर बात होती थी।

यह है शिकायत
ग्वालियर मर्केंटाइल साख सहकारिता मर्यादित ग्वालियर ने बचत का रैकरिंग एकाउंट खोला था।
खाताधारकों को आश्वासन दिया गया था कि वे अपनी राशि कभी भी वापस ले सकते हैं।
तीन साल में राशि वापस लेने पर कम फायदा होगा और पांच साल मेंं राशि वापसी पर पूरा ब्याज सहित पैसा मिलेगा।
जरूरत पडऩे पर अब खाताधारक अपनी राशि वापस मांग रहे हैं तो समिति के नाम पर बैंकिंग कर रहा संचालक गायब है।
-2018 में हर महीने 500 रुपए की राशि जमा कराने के लिए खाता खोला था।
खाताधारक के अभी तक लगभग 14500 रुपए जमा हो चुके हैं। अन्य खाताधारकों की भी लगभग इतनी ही राशि जमा है।
-माइक्रो सेविंग के लिए रैकरिंग एकाउंट खोलकर राशि जमा कराने के लिए समिति का एजेंट हर महीने लगातार आता रहा है।

ऑफिस भी किया खाली
लोगों को बचत के नाम पर पैसा जमा कराने वाली ग्वालियर मर्केटाइल साख सहकारिता मर्यादित का कार्यालय माधौगंज में था। लोगों ने पैसे मांगने शुरू किए तो यह जगह खाली कर दी। अब संचालक गिर्राज से सिर्फ फोन पर संपर्क हो रहा है। बचत खाता खुलवाने वाले खाताधारक सिर्फ फोन पर ही संपर्क कर पा रहे हैं। इस मामले में पुलिस से भी शिकायत हो चुकी है। खास बात यह है कि पैसे जमा कराने वाला संचालक पुलिस के बुलाने पर भी दो दिन से थाने नहीं पहुंचा है। पुलिस ने अब शनिवार तक का फिर से समय दिया है, अगर आज सुबह 10 बजे तक संचालक थाने नहीं पहुंचा तो कार्रवाई शुरू की जाएगी।


निम्न तबके को बना रहे निशाना
साख सहकारिता मर्यादित के नाम पर बैंकिंग कर रही 10 से अधिक संस्थाओं ने तीनों उपनगरों में गली-मौहल्लों में छोटी-छोटी शाखाएं खोल रखी हैं। डबरा में भी इस तरह की 10 संस्थाएं काम कर रही हैं, जिनमें से दो संस्थाओं पर खाताधारकों से धोखाधड़ी के मामले में प्रकरण भी दर्ज हो चुके हैं। इसके अलावा भितरवार, पिछोर, आंतरी, मोहना, चीनोर सहित अन्य छोटी जगहों पर भी संस्थाओं द्वारा बैंक बताकर आम जन से धोखाधड़ी की जा रही है।


जमीन में कर देते हैं पैसा निवेश
बैंक बचत के नाम पर खाताधारकों की गाढ़ी कमाई का पैसा वसूल कर संस्था संचालित करने वाले जमीन में निवेश कर रहे हैं। इसके साथ ही व्यापारियों को भी निश्चित राशि वापसी के नाम पर पैसा दिया जा रहा है। जबकि यही पैसा खाताधारकों द्वारा मांगे जाने पर वापसी में आनाकानी की जा रही है। डबरा और ग्वालियर के शहरी क्षेत्र में साख सहकारी मर्यादित के नाम से सबसे ज्यादा बैंकिंग की जा रही है, जबकि पूरे जिले में नागरिक सहकारी बैंक, जिला सहकारी बैंक, रानी लक्ष्मीबाई सहकारी बैंक सहित पांच संस्थाओं को ही बैकिंग की पात्रता है। इसके अलावा दूसरी जितनी भी संस्थाएं हैं, वे लोगों को बैंक बताकर गुमराह कर रही हैं।


इनका कहना है

- मैंने 500 रुपए महीने का खाता खोला था, तब उन्होंने कहा था कि तीन साल में भी पैसा निकाल सकते हैं। अब कंपनी के अधिकारी कह रहे हैं कि पांच साल में ही पैसा मिलेगा, जबकि खाता खोलते समय तीन साल में पैसा देने का आश्वासन दिया था।
कीर्ति राठौर, खाताधारक


- पांच हजार उनसे लिए थे, उस पर ब्याज मांग रहा है, जबकि हमारे इस बैंक में 8 हजार रुपए जमा है, इसका हिसाब नहीं दे रहा है। हमने लगभग चार साल पहले खाता खुलवाया था। हमारा पैसा है, हमको ही वापस नहीं मिल रहा है।
निर्मला राठौर, खाताधारक

रिज़वान खान Desk
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