दूसरों की नजरों में उठना पर अपनी आत्मा की नजरों में कभी मत गिरना

मुनिश्री के सानिध्य में भगवान पाष्र्वनाथ की रथयात्रा गाजेबाजे के साथ निकाली

ग्वालियर. भगवान महावीर का मार्ग कषाय वालों का और कायरों का नहीं, आत्म वीरों और आत्म कल्याण करने वाले वीरों का मार्ग है। यह कच्चे बच्चों का नहीं यहां सच्चों का काम है। यदि संसार के वैभव में आनंद होता तो भगवान बनने वाले संसार के सारे वैभव को त्याग करके भगवान नहीं बनते। बाहर के वैभव का प्रकाश भगवान नहीं बनाता आत्मा का वास्तविक स्वरूप, आत्मा की पवित्रता, भगवान बनकर निज चेतना को पा जाती है। यह विचार जैन मेडिटेषन विहसंत सागर मुनिराज ने आज मंगलवार को आनंद नगर स्थित जैन मंदिर के वार्षिकोत्सव समपान के दौरान धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। मुनिश्री विश्वसूर्य सागर महाराज भी मौजूद थे।
मुनिश्री ने कहा कि चिंतन करना कि आपने आत्मा की वास्तविकता जानने के लिए क्या किया। आप वैभव पाकर दूसरों की नजरों में उठ सकते हैं, सम्माननीय हो सकते हैं पर अपनी आत्मा आपको कितना सम्मानित करती है सोचना। दूसरों की नजरों में उठना पर अपनी आत्मा की नजरों में कभी मत गिरना। अपनी आत्मा को नजरों मे उठाना चाहते हो तो सर्वप्रथम अपने किए अपराधों की दूसरों से क्षमा मांग कर प्रायश्चित, पश्चाताप की अग्नि में जलकर निवृत्त हो जाना। जब तक स्वयं पर विश्वास नहीं होगा तब तक कल्याण नहीं हो सकता। यदि अपने आप पर विश्वास है तो दूसरे पर भी विश्वास होगा और दूसरे के विश्वासपात्र भी बन सकोगे। अपने विश्वास को जागृत रखकर अपनी मूल्यवान मानव पर्याय से अपनी आत्मा की कीमत पहचानें। इस मौके पर ओम प्रकाष जैन, विवेक जैन, पदमचंद जैनविकास जैन, सतोंश जैन, प्रवक्ता सचिन जैन एवं महिला मंडल की उशा जैन, रीता जैन, कमलेष जैन, नैसी जैन, बेबी जैन, सुनीता जैन, सुशमा जैन, कुसुम जैन प््रामुख रूप से उपस्थित थी।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि रथयात्रा आनंद नगर श्री दिगंबर जैन मन्दिर से मुनिश्री विहसंत सागर महाराज एवं मुनिश्री विष्वसूर्य सागर महाराज के सानिध्य में षुरू हुई, रथयात्रा में चाॅदी के रथ के अन्दर मूल नायक भगवान पाष्र्वनाथ की मूर्ति लेकर संजय कुमार जैन बैठे एवं रथ के सारथी प्रेमचंद्र जैन थे। यह रथयात्रा जैन मंदिर से प्रारंभ होकर मुख्य मार्गो से होती हुई घूमकर वापस जैन मंदिर पहुची। यात्रा में धार्मिक भजनों की धुन पर सफेद वस्त्र पहने हुए भक्तगण युवा और पुरूश जयकारो के बीच नृत्य करते हुए चल रहे थे। जैन समाज के लोगो अपने घरों प्रतिश्ठानों के आगे रंगोली सज्जकर भगवान पाष्र्वनाथ की भव्य आगवानी कर भव्य आरती उतारी व मुनिश्री के पादप्रक्षलान कर आषीर्वाद लियां।

राजेंद्र ठाकुर Desk
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