सोना चांदी खरीदने से पहले जरूर पढ़ लें यह खबर, कहीं आपके साथ तो नहीं हो रही ठगी

ग्वालियर संभाग सराफा कारोबारियों की संख्या करीब ढाई हजार से अधिक है

By: monu sahu

Updated: 24 Jul 2020, 04:11 PM IST

ग्वालियर। देश में इस समय कोरोना का कहर चल रहा है। इसके बाद भी सोने की कीमत आसमान को छू रही हैं। खास बात यह है कि सोने चांदी की कीमतों में बढोत्तरी के बाद भी प्रदेश के ग्वालियर शहर में लोग सोने की दुकानों पर खरीदारी करने के लिए पहुंचे। सोने के रेट में शुक्रवार को 300 रुपए की गिरावट से लोगों के चेहरे खिले हुए नजर आए। लेकिन हम आपको बता दें कि सोना-चांदी खरीदने से पहले यह जानना जरूरी है कि वह असली है या नकली।सोना चांदी खरीदने से पहले हर किसी को इस बात का डर रहता है कि कहीं उसके साथ धोखा तो नहीं हो रहा है,लेकिन ज्वेलरी पर हॉलमार्क की मुहर के बाद उसकी विश्वसनीयता बढ़ जाती है। प्रदेश में जहां 100 से अधिक हॉलमार्क सेंटर काम कर रहे हैं।

वहीं ग्वालियर चंबल में इनकी संख्या सिर्फ एक ही है। जबकि ग्वालियर संभाग सराफा कारोबारियों की संख्या करीब ढाई हजार से अधिक है।सरकार की ओर से सोने और चांदी के गहनों की हॉल मार्किंग में 14 कैरेट (58 फीसदी),18 कैरेट (75 फीसदी) और 22 कैरेट (91.6 फीसदी) को मान्यता है। कारोबारी चाहते हैं कि 20 कैरेट (83.30 फीसदी) को भी मान्यता दी जानी चाहिए। शहर में हॉल मार्किंग सेंटर पर एक बार जांच कराने के 200 रुपए तक वसूले जा रहे हैं वहीं दूसरी जगहों पर ये जांच 50 से 100 रुपए में हो जाती है।

ऐसे पहचानें असली हॉलमार्क
शहर के व्यापारी राजनीश नीखरा ने बताया कि हॉल मार्किंग में किसी उत्पाद को तय मापदंडों पर प्रमाणित किया जाता है। भारत में बीआईएस वह संस्था हैजो ग्राहकों को उपलब्ध कराए जा रहे गुणवत्ता स्तर की जांच करती है। यदि सोना-चांदी हॉलमार्क है तो इसका मतलब है कि उसकी शुद्धता प्रमाणित है। लेकिन कई ज्वैलर्स बिना जांच प्रकिया पूरी किए ही हॉलमार्क लगा रहे हैं। ऐेसे ग्राहकों को यह देखना जरूरी है कि हॉलमार्क ओरिजनल है या नहीं।

असली हॉलमार्क पर भारतीय मानक ब्यूरो का तिकोना निशान होता है। उस पर हॉलमार्किंग सेंटर के लोगो के साथ सोने की शुद्धता भी लिखी होती है। उसी में ज्वैलरी निर्माण का वर्ष और उत्पादक का लोगो भी होता है। ग्राहकों को भी हॉलमार्क देखकर ही सोने चांदी की खरीदारी करनी चाहिए।सराफा ऐसोसिएशन के हुकुमचंद ने बताया कि प्रदेश भर में करीब 100 हॉलमार्किंग सेंटर काम कर रहे हैं। इनके सेंटर और बढाए जाना जरूरी है क्योंकि आने वाले समय में सरकार सभी को लाइसेंस लेना अनिवार्य करने वाली है। ग्वालियर संभाग में अभी केवल दो ही सेंटर हैं। हॉलमार्किंग कराने से विश्वसनीयता बढ़ती है।

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