संशय में प्रशासन: एक हजार करोड़ की 902 बीघा जमीन किसकी, अफसर झाड़ रहे पल्ला

पर्दे के पीछे कोई बड़ा खेल खेला जा रहा है, क्योंकि इस जमीन की कीमत करीब एक हजार करोड़ से अधिक की है। फिलहाल इस जमीन को खुर्द-बुर्द करने का काम तेजी से

By: Gaurav Sen

Published: 26 Jan 2018, 11:38 AM IST

ग्वालियर। गोला का मंदिर भिंड रोड पर स्थित करीब ९०२ बीघा सरकारी जमीन किस विभाग की है इसे लेकर अफसर अजांन बनने की कोशिश कर हरे हैं या पर्दे के पीछे कोई बड़ा खेल खेला जा रहा है, क्योंकि इस जमीन की कीमत करीब एक हजार करोड़ से अधिक की है। फिलहाल इस जमीन को खुर्द-बुर्द करने का काम तेजी से चल रहा है।

सत्ता से जुड़े लोग यहां तेजी से अवैध तरीके से प्लॉटिंग करा रहे हैं, इसके लिए वह नगर निगम से मिलकर अमृत योजना के तहत अवैध कॉलोनी में पानी और सीवर का काम करा रहे हैं। जब इस मामले में पत्रिका ने उद्योग विभाग से बात की तो अफसरों ने कह दिया कि यह जमीन उद्योग विभाग की नहीं हैं। इसे १९९७ में राजस्व विभाग को सरेंडर कर दिया है। जब राजस्व विभाग के अफसरों से बात की गई तो वह कहने लगे कि इस उद्योग विभाग की जमीन की जांच कराएंगे, जिससे स्पष्ट हो गया कि भू माफियाओं का नेटवर्क किस तरह से एक हजार करोड़ की जमीन को ठिकाने लगाने में किस हद तक सफल हो रहा है।

बहरहाल सरकारी जमीन पर अवैध कॉलोनी में सरकारी पैसे से सुविधाएं पहुंचाई जा रहीं हैं, जिससे अवैध कॉलोनी काटने वालों के हौसले बुलंद हो गए हैं। निगम अफसरों से साठगंाठ कर बनाई गई अवैध कॉलोनी में अमृत योजना से काम कराने के लिए एक्टिव हो गए हैं, जिसकी चर्चा निगम गलियारों में बनी हुई है।


मौत की जांच शुरू, मौके पर काम बंद

ग्वालियर। सरकारी जमीन पर बसी नारायण विहार कॉलोनी में अमृत योजना के तहत बिना टं्रक लाइन के ही ब्रांच लाइनों का काम करते वक्त दो मजदूर दब कर मर गए। इस मामले की जांच करने ईपीएफ विभाग का दल निगम मुख्यालय पहुंचा और अमृत योजना के अफसरों से मजदूरों के ईपीएफ एकाउंट के बारे में जानकारी मांगी। वहीं मौके पर गुरुवार को रास्ता बंद का बोर्ड लगाते हुए काम बंद कर दिया गया है। वहीं मामले की जांच के लिए निगम आयुक्त विनोद शर्मा ने अधीक्षण यंत्री प्रदीप चतुर्वेदी को नियुक्त किया, लेकिन वह गुरुवार को घटना स्थल पर नहीं पहुंचे, जिससे जांच की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

पत्रिका ने किया खुलासा
दो मजदूरों की मौत के बाद पत्रिका ने मामले की पड़ताल कर खुलासा किया कि किस तरह से अफसर सरकारी जमीन पर बस रही अवैध कॉलोनी में करोड़ों रुपए की लागत से सीवर और पानी का काम करा रहे हैं। उक्त मामले का खुलासा पत्रिका द्वारा 25 जनवरी के अंक में प्रमुखता से किया गया।


कार्रवाई के निर्देश
बैठक में यह मामला सामने आया था, जिसमें उद्योग विभाग से वापस हुई भूमि पर मंडी बनाने की चर्चा हुई थी। मामले में एसडीएम लश्कर और मुरार को जांच करने के निर्देश दिए हैं।
राहुल जैन, कलेक्टर


इस जमीन पर हम कोई अतिक्रमण नहीं करा रहे हैं, यह जमीन हमारे उपयोग की नहीं हैं। इसे हम राजस्व विभाग को वर्ष 1996 में सरेंडर कर चुके हैं।
अरविंद बोहरे, जीएम जिला उद्योग केंद्र


जमीन कहां किसकी है, कितने पर अतिक्रमण है, इसकी जांच की जा रही है, जल्द ही जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
स्वाति जैन, एसडीएम

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