दो साल बाद भी जीएसटी को लेकर कारोबारियों ने कही यह बात, जानिए

आज दो साल का हुआ, जीएसटी व्यापारियों की परेशानी बरकरार

By: monu sahu

Updated: 01 Jul 2019, 06:41 PM IST

ग्वालियर. जीएसटी को लागू हुए आज दो साल पूरे हो रहे हैं, लेकिन अभी भी इसे लेकर व्यापारी से लेकर कर सलाहकार तक सभी परेशान हैं। जीएसटी में सबसे अधिक परेशानी पोर्टल की है, जिसके चलते कारोबारी समय पर रिटर्न दाखिल नहीं कर पाते हैं। अभी भी कुछ बदलावों को लेकर नोटिफिकेशन जारी होते रहते हैं। एक देश,एक कर के नारे के साथ 1 जुलाई 2017 को नई कर प्रणाली जीएसटी को लागू किया था, लेकिन दो साल बाद भी यह परफेक्ट नहीं है। कारोबारी चाहते हैं कि सरकार को इसमें सुधार करना चाहिए।

 

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कारोबारी पर साल में 25 हजार का खर्च बढ़ा
जीएसटी लागू होने से पहले वैट टैक्स में एक कारोबारी सालभर के खर्च के रूप में रिटर्न आदि के लिए 4 से 5 हजार रुपए कर सलाहकार को देते थे। ये खर्च अब 10 से 12 हजार रुपए तक लिया जा रहा है। वहीं जीएसटी ऑडिट के लिए भी कारोबारी को सीए को 20 हजार रुपए साल के देने पड़ेंगे। इस तरह एक कारोबारी को अब 25 से 30 हजार रुपए तक देने पड़ रहे हैं। वहीं रिटर्न भरने की बात की जाए तो पूर्व में जहां कारोबारी खरीद और बिक्री के सालभर में 8 रिटर्न भरते थे, अब एक साल में 24 रिटर्न दाखिल करने पड़ रहे हैं।

 

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एक नजर यहां भी

  • जीएसटी से ग्वालियर जोन में गत वर्ष से 35 फीसदी राजस्व की ग्रोथ
  • शहर में जीएसटी में पंजीकृत व्यापारी 30 हजार
  • वाहनों की जांच में पिछले साल 70 लाख रुपए जमा हुए थे, जो इस साल दो करोड़ का आंकड़ा पार कर गए हैं

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सुधार की गुंजाइश
मप्र चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष विजय गोयल ने बताया कि जल्दबाजी में लाया जीएसटी अभी भी परफेक्ट नहीं हो पाया है। व्यापारियों के साथ इसके रिटर्न भरने वाले कर सलाहकार और सीए भी इसे समझने में लगे हुए हैं। पोर्टल हैंग रहने का खामियाजा व्यापारी को पेनल्टी जमा करके भुगतना पड़ता है।

 

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अपडेट करने की जरूरत
जीएसटी स्टेट ज्वॉइंट कमिश्नर यूएस बैस ने बताया कि जीएसटी में अभी भी अपडेट किए जाने की जरूरत है। ये बात सही है कि व्यापारियों को अभी भी दिक्कतें आ रही हैं। सबसे अधिक परेशानी पोर्टल के सर्वर डाउन की आती है। वैसे रिटर्न सरलीकरण पर काम हो रहा है। कर चोरी रोकने लिए निरंतर वाहनों की जांच कर रहे हैं। साथ ही आईटीसी में गड़बड़ी करके बोगस फर्म से काम करने वालों पर कार्रवाई शुरू कर दी है।

 

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सरकार को और प्रयास करने होंगे
एमपी टैक्स लॉ बार ऐसोसिएशन उपाध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि जीएसटी आने के बाद से व्यापारियों पर रिटर्न भरने के खर्चे काफी बढ़ गए हैं। वैट में लेट फीस नहीं लगती थी। इसमें सरकार की कमी का खामियाजा व्यापारी भुगत रहे हैं। दो साल में भी सरकार इसके पोर्टल को ठीक नहीं कर सकी है। हाल ही में आए जीएसटीआर-9 का फॉर्मेट कर सलाहकारों को समझ नहीं आ रहा है। जीएसटी के लिए सरकार को और प्रयास करने होंगे।

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