GSTR-1 RETURN: अब देनी पड़ेगी 250 रुपए रोज लेट फीस, नेटवर्क कर रहा परेशान

GSTR-1 RETURN:  अब देनी पड़ेगी 250 रुपए रोज लेट फीस, नेटवर्क कर रहा परेशान

Gaurav Sen | Publish: Jan, 12 2018 03:03:15 PM (IST) Gwalior, Madhya Pradesh, India

जीएसटी के लिए रिटर्न जमा करने वाले कारोबारी एवं कर सलाहकारों के लिए जीएसटीएन नेटवर्क परेशानी बनता जा रहा है।

ग्वालियर। जीएसटी के लिए रिटर्न जमा करने वाले कारोबारी एवं कर सलाहकारों के लिए जीएसटीएन नेटवर्क परेशानी बनता जा रहा है। जीएसटीआर-1 के लिए 10 जनवरी आखिरी तारीख थी, लेकिन नेटवर्क और सर्वर डाउन की समस्या ने खासा परेशान किया। जीएसटीआर-1 रिटर्न दाखिल करने की तिथि बढ़ाकर 31 दिसंबर से 10 जनवरी कर दी गई थी। इस अवधि में भी अधिकांश कारोबारियों का रिटर्न दाखिल नहीं हो सका है। जिन व्यापारियों ने जुलाई से नवंबर तक के जीएसटीआर-1 फाइल नहीं किए हैं उन पर पांच माह के रिटर्न की 50 रुपए प्रति रिटर्न के हिसाब से 250 रुपए रोज की लेट फीस लगेगी।


पोर्टल बन रहा बड़ी समस्या

जीएसटीआर-1 में रजिस्टर्ड व्यापारियों को विक्रय किए बिलों की बिल वाइज जानकारी भरनी होती है। बिल वाइज जानकारी पूर्ण भरने के बाद जीएसटीआर-1 के मुख्य पेज पर उन सबकी कुल राशि प्रदर्शित होती है। इसमें प्रमुख समस्या यह है कि सारे बिलों की जानकारी भरने के बावजूद भी मुख्य पृष्ठ पर बिलों की कुल राशि आने में 24 घंटे से अधिक का समय भी लग जाता है वहीं रिटर्न सब्मिट करने के बाद जब रिटर्न फाइल करते हैं तो उसमें भी पोर्टल 15 से 20 मिनट के पहले रिटर्न फाइल नहीं करता है। ऐसे में व्यापारी-करदाताओं को काम करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।


अपडेट नहीं हो रहा नेटवर्क
जीएसटीआर-1 या 3 बी की अंतिम तिथि के दो से चार दिन पहले तक तो नेटवर्क ठीक-ठाक चलता है, लेकिन उसके बाद इसकी गति बेहद धीमी हो जाती है। जीएसटी के इस पोर्टल को यदि अपडेट कर दिया जाए तो काफी हद तक समस्या का निदान हो सकता है।


दाखिल नहीं कर पाएंगे जीएसटीआर-3बी
जीएसटीआर-3बी रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 20 जनवरी है। व्यापारियों को ध्यान रखना होगा कि जिन व्यापारियों के जीएसटीआर-1 देरी से फाइल हो रहे हैं उस लेट फीस फाइलिंग की फीस का भुगतान किए बिना जीएसटीआर-3बी फाइल ही नहीं कर सकेंगे।

शासन काम करे
शासन को पोर्टल पर काम करना चाहिए क्योंकि व्यापारी और कर सलाहकारों की समस्या जीएसटी से कम जीएसटी पोर्टल से अधिक है। यदि पोर्टल ठीक से काम करे तो शायद इतनी परेशानियों का सामना न करना पड़े। साथ ही किसी भी माह के रिटर्न फाइल करने में देरी नहीं होगी।
अनिल अग्रवाल, उपाध्यक्ष, एमपी टैक्स लॉ बार एसोसिएशन

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