ग्वालियर के आईडिया पर देश कर रहा तरक्की लेकिन शहर में हो रही बेकद्री

ग्वालियर के आईडिया पर देश कर रहा तरक्की लेकिन शहर में हो रही बेकद्री

Gaurav Sen | Updated: 14 Jul 2019, 11:50:04 AM (IST) Gwalior, Gwalior, Madhya Pradesh, India

अधिकारियों की लापरवाही... खामियाजा भुगत रहा शहर

धर्मेन्द्र त्रिवेदी @ ग्वालियर

शहर में हुए जिन नवाचारों को देश ने अपनाया हमारे अधिकारी उनकी बेकद्री करने में लगे हुए हैं। जनवरी 2016 में दिल्ली हुए से सेमिनार में नवाचारों के पांच मॉडल को केन्द्र सरकार ने सबसे बेहतर बताकर इन्हें पूरे देश में लागू करने की घोषणा की थी। इसके बाद देश के अन्य हिस्सों में ग्वालियर के मॉडल को और परिस्कृत कर अपना लिया गया है,

लेकिन यहां के अधिकारियों ने ई-गवर्नेंस के नाम पर 6 राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त नवाचारों का मखौल बना दिया है। न तो बायोमेट्रिक हाजिरी का पालन हो रहा है, न सोशल मीडिया पर अधिकारी रिस्पॉन्स दे रहे हैं। दिव्यांगों को भी सकारात्मक वातावरण नहीं मिल रहा है। नगर निगम के अधिकारी 5 लाख पौधे लगाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन कहां लगाए हैं और उनकी स्थिति क्या है, यह नहीं बता पा रहे हैं।

हरियाली: बंजर पहाडिय़ां बनीं आईएएस का स्टडी सेंटर
बंजर पहाडिय़ों पर कम लागत में नीम व अन्य पेड़ रोपकर 80 प्रतिशत से अधिक उत्तर जीविता हासिल करने में सफलता मिलने पर जिले की पहाडिय़ों को आईएएस अकादमी के स्टडी टूर में शामिल किया गया था। अभी तक यहां आईएएस के 7 बैच आकर पौधे लगाने की तकनीक समझ चुके हैं और वर्तमान में जिन क्षेत्रों में ये अधिकारी पदस्थ हैं वहां लागू कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें : रंजिश के चलते मां को मारी गोली, बेटे के सिर पर दे मारा डंडा

 

अब: अनियमितताओं से 20 फीसदी पौधे ही जिंदा
हरियाली के इस मॉडल को पुरस्कार मिलने के बाद कागजी बना दिया गया है। बीते समय में सरकारी दावों के मुताबिक 8 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं, लेकिन इनमें पेड़ बमुश्किल 20 से 25 फीसदी ही बन पाए हैं। निचले स्तर पर आर्थिक अनियमितताओं के कारण शहर हरियाली से वंचित रह गया।

यह भी पढ़ें : बुजुर्ग महिला से दिनदहाड़े हुई शर्मनाक हरकत, पढ़ें पूरी खबर


सोशल मीडिया: शिकायतों पर त्वरित रिस्पॉन्स
कलेक्टर के फेसबुक अकाउंट के साथ वाट्स ऐप, ईमेल सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आई शिकायतों और सुझावों को लेकर त्वरित रिस्पॉन्स देना शुरू किया गया था। पुलिस ने भी इस तरह की कोशिश शुरू की थी।

Smart city Gwalior: अपनी लाज बचाने निगम अब जनता के आसरे, लोगों को रटाए जा रहे हैं जवाब

 

अब: अधिकारी नहीं देते जवाब
सिर्फ कलेक्टर के फेसबुक या वाट्स ऐप पर रिप्लाई मिलता है, बाकी अधिकारी न फोन पर रिस्पॉन्स देते हैं, न मैसेज का उत्तर दिया जाता है।

दिव्यांगों के लिए बाधा रहित वातावरण की पहल
दिव्यांगों के लिए प्रत्येक शासकीय और निजी कार्यालय में बाधा रहित वातावरण तैयार करने रैंप बनाने की पहल की गई थी। इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा मिली। राष्ट्रीय स्तर पर तत्कालीन कलेक्टर पी नरहरि को पुरस्कार मिला।

अब: स्थिति बेहतर नहीं
कलेक्ट्रेट को छोडकऱ अधिकतर शासकीय कार्यालयों में समस्या का सामना करना पड़ता है। शहर के चारों एसडीएम अपने कार्यालयों को पूरी तरह बाधा रहित नहीं कर पाए हैं। नगर निगम कार्यालय में भी स्थिति बेहतर नहीं है।

बायोमेट्रिक हाजिरी सरकारी कर्मचारियों को समय से कार्यालय में उपस्थिति दर्ज कराने के लिए सबसे पहले ग्वालियर जिला पंचायत और जनमित्र केन्द्रों पर बायोमेट्रिक मशीन लगाई गई थी।
अब: अंगूठा लगाकर चले जाते कर्मचारी सरकारी कार्यालयों में मशीनें नाम के लिए हैं। कर्मचारियों का पुराना तरीका जारी है। कर्मचारी 10 से 11 के बीच अंगूठा लगाकर गायब हो जाते हैं।
गर्भपात दवा:बिना पर्चे नहीं : गर्भपात की दवाएं प्रतिबंधित करने दवा विक्रेताओं को डॉक्टर के पर्चे के बिना न देने की चेतावनी दी गई थी। इस तरह की खरीद और बिक्री का रिकॉर्ड मेंटेन करने कहा गया था।
अब: किसी को भी दे देते हैं दवा विक्रेता यह देखने की कोशिश नहीं करते कि दवा लिखने वाला डॉक्टर है भी या नहीं। मेडिकल स्टोर खरीद व बिक्री का रजिस्टर मेंटेननहीं कर रहे।

जो कमियां दिख रही हैं जल्द ठीक कराएंगे
जितने भी नवाचार हुए हैं उन सभी में जो भी कमियां सामने आ रही हैं हम उनको जल्द से जल्द ठीक कराने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए लगातार कार्यालय और शहर का भ्रमण जारी है। इसके साथ ही सुधार की प्रक्रिया भी शुरू कर रहे हैं।
अनुराग चौधरी, कलेक्टर

gwalior city innovative ideas followed by other cities of india
gwalior city innovative ideas followed by other cities of india

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned