LIVE : भाजपा 1,46,842 मतों से जीती, मोदी लहर में विवेक ने जीता ग्वालियर का रण

LIVE : भाजपा 1,46,842 मतों से जीती, मोदी लहर में विवेक ने जीता ग्वालियर का रण

Gaurav Sen | Publish: May, 24 2019 10:25:19 AM (IST) | Updated: May, 24 2019 12:22:30 PM (IST) Gwalior, Gwalior, Madhya Pradesh, India

अशोक सिंह: अपनी ही पार्टी में अकेले पड़ गए थे, जीत कैसे पाते........

ग्वालियर। ग्वालियर संसदीय क्षेत्र की जनता ने दो बार के महापौर और भाजपा के प्रत्याशी विवेक शेजवलकर को जिताकर इस सीट पर भाजपा के कब्जे को बरकरार रखा है। वहीं जनता ने कांग्रेस सरकार के मंत्री व विधायकों के दावों को झुठला दिया है जिसमें उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी अशोक सिंह को अपने विधानसभा क्षेत्र से जिताने का दावा किया था। ग्वालियर संसदीय क्षेत्र की आठों विधानसभा सीट में से सिर्फ दो सीटों डबरा और भितरवार में कांग्रेस भाजपा से आगे रही।

नीलिमा ने उतारी आरती
भाजपा प्रत्याशी विवेक शेजवलकर को जैसे ही बढ़त की जानकारी मिली, वैसे ही वे घर से निकले, उनकी पत्नी नीलिमा ने उनकी आरती उतारी। विवेक ने अपने इष्ट देवता के दर्शन किए और सीधे मतगणना स्थल पर पहुंचे। करीब दो घंटे बैठने के बाद देर शाम मोदी हाउस कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचे।

"मैं वचन देता हूं... पूरी मेहनत, ईमानदारी के साथ जनता और विकास मेरी प्राथमिकता है, इसके लिए काम करूंगा। जनता की कोई भी समस्या का निराकरण तत्काल हो, इसका प्रयास करूंगा और ग्वालियर का चहुमुंखी विकास हो और सुन्दर बने, इसमें जन सहयोग लिया जाएगा।

विवेक शेजवलकर , भाजपा

जीते विवेक नारायण शेजवलकर वोट मिले : 6,27,250 वोट: 52.67 %
निकटतम प्रतिद्वंद्वी अशोक सिंह वोट मिले 4,80,408 वोट : 40.34 %
अन्य प्रत्याशी मिलाकर कुल वोट पड़े : 11,90,753 वोट :59.60 %

अशोक सिंह ने स्वीकारा जनता का निर्णय
मैंने इस बार लोकसभा का चुनाव कार्यकर्ताओं की मेहनत और पूरी ताकत से लड़ा। देश में जिस तरह के परिणाम आए उससे लगता है कि मोदी के नाम पर जनता ने भाजपा को वोट दिया है। जनता ने मुझे जो अपना निर्णय दिया है, उसे मैं स्वीकारता हूं, आगे भी जनता की सेवा करता रहूंगा।

सभी विधानसभा क्षेत्रों से मिला वोट

ग्वालियर संसदीय क्षेत्र से हारे हुए कांग्रेस प्रत्याशी अशोक सिंह कहते हैं कि इस संसदीय क्षेत्र की जनता से मेरे मधुर संबंध रहे हैंं। मैं उनके सुख-दुख में हमेशा शामिल रहा हूं। मेरे पक्ष में फूलबाग मैदान पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने चुनावी सभा ली थी, जिसमें उन्होंने मुझे लेकर यह कहा था कि यह टिकट मेरा है, उस दिन से मुझे जनता का अच्छा सपोर्ट मिलने लगा था। कार्यकर्ताओं की टोली भी लगातार जनसंपर्क भी कर रही थी। मोदी ने गुमराह किया इसलिए कांग्रेस को हार मिली। विवेक शेजवलकर से मेरे पारिवारिक संबंध रहे हैं, उनको मैं बधाई देता हूं।

विवेक शेजवलकर: मोदी के नाम व संघ की नेटवर्किंग से मिली जीत
ग्वालियर संसदीय क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी विवेक शेजवलकर के नाम की घोषणा हुई तब पार्टी के कुछ लोगों ने उनका विरोध किया था, लेकिन इस विरोध के आगे विवेक डरे नहीं, क्योंकि उनको टिकट दिए जाने की पैरवी आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने ग्वालियर प्रवास के समय एक चर्चा के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से की थी। विवेक को टिकट मिलने के बाद आरएसएस के स्वयं सेवकों ने भी भाजपा कार्यकर्ताओं की तरह गांव-गांव गली-मोहल्लों में मोर्चा संभाला ओर स्थानीय मुद्दे कम देश को सुरक्षित करने के लिए नरेन्द्र मोदी को दोबारा पीएम बनाए जाने के लिए अपना वोट देने का आग्रह किया था। वहीं विवेक इस चुनाव को मोदी-राहुल फैक्टर के बीच होने की बात कहते रहे। यह बात भी सच है कि ग्वालियर संसदीय क्षेत्र की जनता ने मोदी को देश की बागडोर सौंपने के लिए जनसमर्थन दिया, जिसका परिणाम यह है कि विवेक एक लाख 46 हजार से अधिक वोटों से जीते। जबकि मोदी लहर में 2014 में नरेन्द्र सिंह तोमर 29 हजार वोटों से जीते थे। वहीं पीएम नरेन्द्र मोदी की सभा भी जीत का हिस्सा बनी।


भाजपा: जीत के प्रमुख कारण
1. देश में नरेन्द्र मोदी की लहर, जीत का प्रमुख कारण रहा।
2. बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की लेते रहे बैठक।
3. चुनावी मैनेजमेंट और कोर कमेटी की मेहनत।
4. महिला कार्यकर्ताओं का डोर- टू डोर जनसंपर्क।
5. साफ-सुथरे, ईमानदार और भले आदमी की छवि।

gwalior loksabha seat winner vivek narayan shejwalkar

अशोक सिंह: अपनी ही पार्टी में अकेले पड़ गए थे, जीत कैसे पाते
ग्वालियर संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस अंतिम समय तक एकजुट नहीं हो पाई। अशोक सिंह का नाम घोषित होने से पहले टिकट के लिए पार्टी में जमकर खींचतान चलती रही। चुनाव के दौरान कई नेता गुना-शिवपुरी में प्रचार करने चले गए। हालांकि, अशोक सिंह के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने फूलबाग मैदान पर आमसभा को संबोधित किया, जिसमें सिंधिया उपस्थित नहीं थे। इसके कई माइने निकाले गए। नेताओं ने भी प्रचार के नाम पर दिखावा और भितरघात किया। ग्वालियर सीट को लेकर कांग्रेस में सिंधिया गुट और दिग्विजय गुट आमने-सामने थे। दिग्विजय सिंह गुट ने अशोक सिंह को टिकट दिलाकर सिंधिया को घर में ही शिकस्त दे दी थी। हालांकि, अशोक सिंह यह कहते रहे कि उन्हें सिंधिया के कारण टिकट मिला है। यह सही है कि सिंधिया की सहमति के बाद ही उन्हें टिकट मिला, लेकिन सिंधिया इस बार यहां से टिकट बदलवाना चाहते थे और इसके लिए दो-तीन नाम सामने भी आए थे, बाद में सिंधिया ने अशोक सिंह के लिए सभा भी ली। इसी बीच मुरैना के कांग्रेस नेता रिंकू मावई के बयान ने भी उल्टा काम किया। चुनाव प्रबंधन भी इस बार बिखरा हुआ रहा।

कांग्रेस: हार के प्रमुख कारण
1. मोदी लहर के आगे चुनाव प्रचार फीका पड़ गया।
2. प्रत्याशी अशोक सिंह अकेले ही लड़ाते रहे किला।
3. कांग्रेस कार्यकर्ताओं का ग्वालियर से गुना चले जाना।
4. स्टार प्रचारक सिंधिया द्वारा ग्वालियर में कम समय दिया गया।
5. लगातार तीन चुनाव हारने का भी नकारात्मक असर पड़ा।

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