'सर' पर भिड़ गए हैं डॉक्टर और अफसर, सरकार नहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया करेंगे 'पंचायत'

डॉक्टरों ने कहा दिया था कि हमलोग कमिश्नर और कलेक्टर को सर नहीं कहेंगे

By: Muneshwar Kumar

Published: 27 Nov 2019, 03:28 PM IST


ग्वालियर/ कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने सभी सोशल अकाउंट से कांग्रेस का नाम हटा दिया है। वह अब सिर्फ पब्लिक सर्वेंट हैं। लेकिन सिंधिया एक बार फिर मध्यप्रदेश में एक बड़ी पंचायत करने आने वाले हैं। सरकारी महकमे के दो लोग आपस में सर कहने को लेकर भिड़े हुए हैं। सरकारी महकमे के लोग हैं तो हस्तक्षेप भी सरकार को ही करनी चाहिए। मगर सिंधिया इस विवाद को सुलझाएंगे।

दरअसल, मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले में डॉक्टर और अफसर आपस में ही भिड़ गए हैं। डॉक्टर सरकारी अधिकारियों के आदेश और हस्तक्षेपों से अजीज आकर कहा कि हम उन्हें सर नहीं कहेंगे। उसके बाद से दोनों पक्षों के बीच तकरार बढ़ गया। अफसरों ने भी दो टूक कह दिया था कि हमें सर कहलाने की कोई लालसा नहीं है। बात यहां तक बढ़ गई थी कि अफसरों ने कुछ डॉक्टरों को नोटिस भी जारी किए थे। डॉक्टरों के बगावती तेवर को देखते हुए अफसर भी बैकफुट पर आ गए।


यह हुआ था विवाद
20 नवंबर को जजराराजा मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने बैठक कर प्रशासनिक अधिकारियों पर दखलअंदाजी का अरोप लगाते हुए गुस्से का इजहार किया था। डॉक्टरों ने यहां तक कह दिया था कि वह कलेक्टर और कमिश्नर को सर नहीं कहेंगे, न किसी कार्यक्रम में बुलाएंगे। उसके अगले ही दिन प्रशासन ने ग्यारह अस्पतालों में कई कमियां निकालकर नोटिस चस्पा किए थे, साथ ही निगम के अधिकारियों से ऐसे अस्पतालों की सूची मांग गई थी जो तालघर में चल रहे हैं।

सिंधिया करेंगे पंचायत
अब ग्वालियर में अफसर और डॉक्टर आमने-सामने हैं। इस विवाद को सुलझाने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया का इंतजार है। वो आएंगे तो उनके साथ स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट भी आएंगे। कहा जा रहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया 28 नवंबर को ग्वालियर आने वाले हैं। वह ग्वालियर दौरे के दौरान के जेएएच अस्पताल भी जाएंगे। उनके सामने चिकित्सक अपनी बात रखेंगे।


पिछले दौरे के दौरान ली थी अधिकारियों की बैठक
ऐसी चर्चा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर दौरे के दौरान अधिकारियों और डॉक्टर को एक साथ बैठाकर इस विवाद को सुलझाएंगे। पिछली बार भी जब सिंधिया ग्वालियर के दौरे पर आए थे तो उन्होंने जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। उस पर विवाद भी हुआ था, बीजेपी ने सवाल किया था कि आखिर सिंधिया किस हैसियत से अधिकारियों की बैठक ले रहे हैं। अब सबकी निगाहें 28 नवंबर पर टिकी है।

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