फोक डांस में भारतीय कला और संस्कृति का दिखाया रूप,चारों धाम के कराए दर्शन

बिजि जावा बिजि हे खोली का गणेशा,मोरी का नरेणा मंगल नृत्य गीत के माध्यम से उतरांचल के कलाकारों ने गणेश वंदना कर लोक नृत्य की प्रस्तुति दी

By: monu sahu

Published: 15 Jan 2018, 08:41 PM IST

ग्वालियर। बिजि जावा बिजि हे खोली का गणेशा,मोरी का नरेणा मंगल नृत्य गीत के माध्यम से उतरांचल के कलाकारों ने गणेश वंदना कर लोक नृत्य की प्रस्तुति दी, तो उन्होंने भारतीय संस्कृति व सभ्यता के विविध और बेजोड़ रूप के दर्शन भी कराए। जिन्हें देखकर सैलानी मंत्रमुग्ध हो गए। मौका था ग्वालियर व्यापार मेला में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में रविवार को उतरांचल लोक नृत्य की प्रस्तुति का। इंडियन परफ ॉर्मिंग आट्र्स एंड क्राफ्ट सेंटर लखनऊ की ओर से उत्तराखंड की संस्कृति और सभ्यता के दर्शन कराए।

 

संस्था के कलाकार हेमंत एवं साथियों ने देवों के दवे आदिदेव शिवजी की आराधना स्थली बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगौत्री, यमुनोत्री, पंचकेदार, पंचप्रयाग, सोमनाथ, जागेश्वर, बागेश्वर एवं गौरादेवी आदि देवों धार्मिक रूप और उनके महत्व से रूबरू कराया। वहीं उत्तराखंड की लोक संस्कृति, लोकगीतों, लोकवाद्यों और नृत्य का सुखद संगम कराया।

 

गढ़वाली नृत्य से कराया खुशी का अहसास
गायक कलाकार माधुरी भंडारी और विपिन राणा ने छपेली लोक गीत प्रस्तुत कर उत्तराखंड की संस्कृति से परिचित कराकर अपनी मखमली आवाज का जादू चलाया। कलाकारों ने गढ़वाली नृत्य की विभिन्न विद्याओं का प्रदर्शन करते हुए सैलानियों का मन मोह लिया। मेला नृत्य गीतए नंदादेवी राजजात गढ़वाली नृत्य में महिला कलाकारों ने सामूहिक रूप से अपनी खुशियों का अहसास कराया।

 

हुड़किया बोल में छाईं खुशियां
पर्वतीय इलाके के किसानों द्वारा कृषि कार्य के शुरू करने से पहले अपने ईष्ट देव को प्रशन्न करने के लिए तथा अच्छी पैदावार की कामना के लिए स़्त्री और पुरुषों द्वारा हुड़कियां बोल नृत्य कर धान की रोपाई वाला नृत्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की।

 

लोकगीत में दिखी जुगलबंदी
हुड़का उत्तराखंड का पारम्परिक वाद्य यंत्र है और छुंडका दराती में लगे घुंघरू। लोकगीतों में दोनों की जुगलबंदी दर्शायी गई थी। नायक ने जेब अपने हाथ में हुडंका और नायिका छुडंका को थामे नृत्य प्रस्तुत कर रहे तब घुंघरू की आवाज अलग खनक बिखेर रही थी। कार्यक्रम के दौरान कलाकारों ने अनेक प्रस्तुतिया दीं। इनमें झौंड़ा चांचरी और हारूल के भी मंच पर रंग छाए रहे। सैलानियों ने कलाकारों की एक से बढ़ कर एक प्रस्तुतियों पर जमकर तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साह वर्धन किया।

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