18 साल से शहर के दिल में बसी रानी की दहाड़ हुई शांत

18 साल से शहर के दिल में बसी रानी की दहाड़ हुई शांत

By: Gaurav Sen

Updated: 10 Jan 2019, 08:16 PM IST

Gwalior, Gwalior, Madhya Pradesh, India

ग्वालियर। चिडिय़ाघर में 18 साल से दहाड़ रही वयोवृद्ध मादा शेरनी रानी ने 9 जनवरी को प्रात: करीब 10:30 बजे अंतिम सांस ली। उसकी मृत्यु के बाद शव परीक्षण पशु चिकित्सा सेवा ग्वालियर के पशु चिकित्सक डॉ सूर्य प्रकाश उपाध्याय, डॉ उपेंद्र यादव के द्वारा किया गया। बाद में उपमंडल अधिकारी घाटीगांव की मौजूदगी में रानी के शव का अंतिम संस्कार किया गया।

" चिडिय़ाघर में सुबह 10.30 बजे ली अंतिम सांस "


दिखना हो गया था बंद, छोड़ दिया था खाना-पीना
चिडिय़ाघर की वयोवृद्ध सदस्य शेरनी रानी जिसकी आयु लगभग 24 वर्ष थी, वह लंबे समय से अस्वस्थ्य चल रही थी। रानी को कई दिनों से आंखों से दिखाई देना भी बंद हो गया था और उसने खाना-पीना भी लगभग छोड़ दिया था, साथ ही रानी चलने फि रने में भी असमर्थ थी।

हुआ था हेल्थ चेक अप
चिडिय़ाघर में पिछले 18 वर्षों से दहाड़ रही मादा शेरनी रानी का हेल्थ चेकअप करने के लिए शुक्रवार को वन्य प्राणी फोरेंसिक डायरेक्टर जबलपुर डॉ. एबी श्रीवास्तव आए थे। जिन्होंने उम्र के आखरी पड़ाव पर चल रही शेरनी का परिक्षण कर डाइट आदि पर भी अपने सुझाव दिए थे।

शान थी चिडिय़ाघर की
रानी चिडिय़ाघर में जब लाई गई थी तब वह करीब 6 वर्ष की थी। आम तौर पर जंगलों में शेरों की औसत उम्र 14 से 15 वर्ष होती है लेकिन जू में उचित देखरेख से इनकी उम्र में इजाफा हो जाता है। अभी उसे मांस की जगह चिकन, अंडा, दूध दिया जा रहा है ताकि वह आसानी से उक्त आहार को पचा सके।

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