बच्चों को मुफ्त पढ़ाकर बना रहे टॉपर, कई ऐसे जिन्हें दुनिया करती है सलाम, ऐसी है इनकी कहानी

Happy teachers day 2019 : bn sharma story in hindi मिडिल स्कूल भितरवार में हेडमास्टर और हायर सेकंडरी स्कूल बिलौआ में प्राचार्य रहे शिक्षक

By: monu sahu

Published: 05 Sep 2019, 12:01 PM IST

ग्वालियर। आज के भौतिकवादी युग में क्या कोई बिना फीस लिए किसी को ट्यूशन पढ़ा सकता है। इस सवाल का जवाब है शिक्षक बीएन शर्मा। उन्होंने ऐसा कर दिखाया है। सेवानिवृत होने के बाद शर्मा अपने घर में ही बच्चों को शैक्षिक रूप से मजबूत कर रहे हैं। (teachers day 2019 ) उनकी शैक्षिक समस्या का बेहद संजीदगी से निराकरण करते हैं।

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मिडिल स्कूल भितरवार में हेडमास्टर और हायर सेकंडरी स्कूल बिलौआ में प्राचार्य रहे शर्मा वर्ष 2014 में बीआरसी भितरवार के पद से सेवा निवृत हुए।। वे अंग्रेजी विषय के शिक्षक रहे। उनके अंदर शुरू से ही बच्चों को पढ़ाने का जज्बा दिखा। पहले इन्हें सरकार वेतन देती थी अब वे बिना वेतन के उसी तनमयता से बच्चों को पढ़ा रहे हैं। अपने घर पर करीब 10 से 12 छात्र-छात्राओं को हर रोज नि:शुल्क पढ़ाते हैं।

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वैसे तो वे सभी विषय का अध्ययन कराते हैं लेकिन उनका मुख्य फोकस अंग्रेजी पर रहता है। उनके यहां कक्षा 9 से लेकर 12 वीं तक के छात्र-छात्राएं आते हैं। वे पिछले पांच साल से बच्चों को अध्ययन करा रहे हैं। शर्मा ने बताया कि उनके घर आने वाले बच्चे 10 वीं और 12 वीं की कक्षा में अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हुए हैं। 12 की परीक्षा में एमपी बोर्ड में दो छात्राओं ने 92 प्रतिशत और एक छात्र ने 88 प्रतिशत अंक पाए हैं। इसी तरह हाईस्कूल में भी एक छात्र ने 88 प्रतिशत अंक अर्जित किए। शर्मा ने बताया कि पवन पाठक नामक छात्र वर्तमान में सरकारी डॉक्टर हैं।

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बिलौआ स्कूल में रिटायर्ड होने के बाद ली क्लास
रिटायर होने के बाद भी भितरवार के हायर सेकंडरी स्कूल में काफी समय तक बिना किसी पारिश्रमिक के क्लास लेने जाते रहे। वे कहते हैं कि बच्चों के ऊपर पढ़ाई को थोपा नहीं जाना चाहिए, जिस स्तर का बच्चा है उसी स्तर से उसे आगे बढ़ाना चाहिए। हाईस्कूल का बच्चा है उसे ग्रामर नहीं आती तो उसके बेसिक पर फोकस करना चाहिए।

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शर्मा ने बताया कि वे शिक्षा देने के साथ ही गरीब बच्चों की हर तरह से मदद करते हैं। अगर किसी छात्र या छात्रा के पास किताब या कापी के लिए पैसे नहीं होते हैं तो वे उसे अपनी तरफ से मुहैया कराते हैं। यहां तक कि वे फीस में भी मदद करते हैं।

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