मदद करने से लौट सकती है किसी परिवार की खुशियां

स्टूडेंट्स ने नुक्कड़ नाटक से दिया संदेश

एक्सीडेंट में घायल युवक की यदि हम मदद कर उसे हॉस्पिटल तक पहुंचाते हैं, तो शायद हम उसके परिवार की खुशी को लौटा सकते हैं। क्योंकि कई बार सिर जैसी जगह में चोट लगने पर व्यक्ति की जान भी जा सकती है और समय रहते यदि वह हॉस्पिटल पहुंच गया, तो बच भी सकता है। इसलिए हमें एक्सीडेंट पर घायल की मदद के लिए आगे आना चाहिए, न कि वीडियो बनाना चाहिए। कुछ ऐसा ही संदेश स्टूडेंट्स ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से दिया। मौका था रोट्रेक्ट क्लब ग्वालियर रीगल की ओर से हजीरा स्थित एक्सीलेंट पब्लिक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम का, जो पत्रिका के कैंपेन से प्रभावित होकर किया गया था।

युवकों को हुआ गलती का एहसास
नुक्कड़ नाटक में दिखाया कि एक ऑटो से युवक घायल होकर रोड पर गिर जाता है। वह कराह रहा होता है कि उसकी मदद करो, लेकिन लोग मदद करने के बजाए उसका वीडियो बनाने में मशगूल होते हैं। वहीं दो गल्र्स आती हैं और उसे उठाकर हॉस्पिटल लेकर जाती हैं। तब वहीं खड़े एक बुजुर्ग उन युवकों को समझाते हैं कि यदि उनके परिवार का कोई सदस्य इस तरह पड़ा होता तो भी क्या वे वीडियो ही बनाते। यह सुन वे युवक अपनी गलती मानते हैं और आगे से लोगों की मदद करने की बात कहते हैं।

स्टूडेंट्स ने पेश किए उदाहरण
इस दौरान स्टूडेंट्स ने कई ऐसी घटनाएं भी शेयर किए, जिसमें लोग वीडियो बनाते नजर आए। साथ ही अपने द्वारा लोगों की मदद करने के उदाहरण भी पेश किए। स्कूल के संचालक जीतेंद्र सिंह भदौरिया ने पत्रिका के अभियान की सराहना करते हुए कहा इससे समाज में सकारात्मक माहौल बनेगा और लोग मदद के लिए आगे आएंगे। इस अवसर क्लब से पवित्र तिवारी, गजैंद्र भदौरिया, शुभम जैन, आकाश बरुआ सहित काफी संख्या में स्टूडेंट्स मौजूद रहे।

Mahesh Gupta
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