पीडि़ता की नहीं सुनी गुहार, टीआई पर एफआईआर

-एसपी से कहा २ दिसंबर तक एफआईआर दर्ज कर पेश करें रिपोर्ट, एसआईटी ने अब तक क्या किया इसकी भी देना होगी जानकारी

ग्वालियर। नाबालिग लडक़ी द्वारा थाने में मौजूद युवक पर बलात्कार का आरोप लगाए जाने के बाद भी तत्कालीन थाना प्रभारी अनिल सिंह भदौरिया द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने पर उच्च न्यायालय अनिल सिंह भदौरिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दो दिसंबर को प्रतिपालन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश एसपी ग्वालियर को दिए हैं।


न्यायमूर्ति जीएस अहलुवालिया ने यह आदेश पीडि़ता के परिवार की ओर से पीडि़ता के गायब होने पर प्रस्तुत बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त आदेश दिए हैं। न्यायालय ने लडक़ी की बरामदगी के लिए गठित
एसआईटी ने क्या कार्रवाई की इसकी रिपोर्ट भी दो दिसंबर को अदालत में प्रस्तुत करने को कहा है। न्यायालय के ६ नवंबर १६ के आदेश पर एसपी ग्वालियर ने इस मामले की प्रारंभिक जांच कराते हुए जांच रिपोर्ट अदालत में पेश की। इस रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय ने उक्त निर्देश दिए। पीडि़ता एक बार गायब होने के बाद फिर गायब हुई है।


जांच में पाया दोषी, किया निलंबित
एसपी द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में कहा गया कि नगर पुलिस अधीक्षक की जांच में पाया गया कि तत्कालीन पडाव थाना प्रभारी अनिल सिंह भदौरिया के सामने गुमशुदा लडक़ी ने बरामद होने पर थाने में मौजूद योगेश नरवरिया पर बलात्कार का गंभीर आरोप लगाया था। इसके बावजूद अनिल सिंह ने इस मौखिक रिपोर्ट को गंभीरता से नहीं लिया और उस पर कोई कार्रवाई नहीं की। इस प्रकार टीआई ने पदीय कर्तव्यों के उल्लंघन एवं कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही व उदासीनता बरती है। इस पर अनिल सिंह को २४ नवंबर को निलंबित कर दिया गया। वहीं गुमशुदा की तलाश के लिए एसआईटी का गठन किया गया।


परिवार ने भी नहीं लिया नोटिस
निरीक्षक अनिल सिंह के कार्यालय में उपस्थित न होने पर उसके निवास पर नोटिस भेजा गया, उनके घर पर नहीं होने पर परिजनों ने नेाटिस लेने से इंकार कर दिया। दुबारा फिर नोटिस नहीं मिला तो उनके घर पर नोटिस चस्पा किया गया। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि एक गुमशुदा नाबालिग बालिका के बरामद होने पर जब उसके द्वारा थाने में मौजूद योगेश पर बलात्कार का आरोप लगाए जाने के बाद भी आरोपी को थाने से बिना किसी कार्रवाई के जाने देना बड़ी गलती और लापरवाही है। जबकि उन्हें आरोपी के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज करना था। एसपी को इस मामले में उन पर कार्रवाई करनी थी जो उन्होंने नहीं की, इसलिए टीआई के खिलाफ धारा १६६, १६६ ए, १६७ और २०१ आईपीसी के तहत तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए।

Rajendra Talegaonkar Desk/Reporting
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