खदानों की तीन सौ करोड़ की रॉयल्टी न चुकाने के मामले में शासन को नोटिस

२३ क्रेशर संचालकों ने बिना रॉयल्टी चुकाए खनन कर खदानों से निकाला पत्थर, प्रशासन की जांच में आया था मामला सामने, फिर भी नहीं की वसूली

ग्वालियर। तीन सौ करोड़ रुपए की रॉयल्टी चुकाए बिना खदानों से पत्थर का खनन करने के मामले में प्रस्तुत जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय ने शासन को नोटिस जारी किया है।
न्यायमूर्ति शील नागू तथा न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी की युगलपीठ ने लखन चौरसिया द्वारा प्रस्तुत जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिए हैं। इस मामले में अगली सुनवाई २ मार्च को होगी। न्यायालय ने प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश शासन, सचिव लोकायुक्त संगठन, पुलिस महानिदेशक, खनिज विभाग के डायरेक्टर, कलेक्टर व अन्य को यह नोटिस जारी किए गए हैं। यह याचिका एडवोकेट जीपी चौरसिया के माध्यम से प्रस्तुत की गई है। याचिका में कहा गया कि प्रशासन ने वर्ष २०१७ में क्रेशरों की जांच की थी जिसमें पाया गया था कि २३ क्रेशर संचालकोकं ने बिना रायल्टी के पत्थर खनन किया है। इन संचालकों खदान से गिट्टी निकालकर उसे बेचे जाने पर जांच करने वाली टीम ने तीन सौ करोड रुपए की वसूली निकालते हुए कलेक्टर को अपनी रिपोर्ट पेश कर दी थी।
वसूली के लिए नहीं की कार्रवाई
जिला प्रशासन ने एसडीएम की रिपोर्ट पर वसूली के लिए कोई कार्रवाई नहीं की। इस कारण को शासन को जो तीन सौ करोड़ मिलना चाहिए थे वह शासन के खाते में जमा नहीं हो सके। वर्ष २०१७ में आई इस रिपोर्ट पर किसी ने ध्यान भी नहीं दिया। याचिकाकर्ता ने इस मामले में आरटीआई के जरिए जानकारी ली जिसमें पता चला कि तीन सौ करोड़ रुपए का यह घोटाला कर शासन को नुकसान पहुंचाया गया है।

Rajendra Talegaonkar
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