मेडिको लीगल मामलों में मेडिकल रिपोर्ट स्पष्ट और पठनीय हो

- हाईकोर्ट ने शासन को दिए निर्देश कहा तीन माह में करें पालन, बलात्कार की रिपोर्ट की तरह ही प्रदान की जाए रिपोर्ट

ग्वालियर। उच्च न्यायालय ने अग्रिम जमानत के एक मामले में राज्य शासन को निर्देश दिए हैं कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और निदेशक अभियोजन भोपाल सभी ड्यूटी डॉक्टरों के लिए निर्देश जारी करें कि उनकी मेडिकल रिपोर्ट स्पष्ट और पठनीय हो। यदि संभव हो तो बलात्कार जैसे मामलों में जिसमें डॉक्टर की राय टाइप करके प्रदान की जाती है उसी प्रकार अन्य मामलों में प्रारुप तैयार कर टाइप कर रिपोर्ट पेश की जानी चाहिए। न्यायालय ने कहा कि हमें उम्मीद है कि अधिकारी तीन माह में इस संबंध में सकारात्मक कदम उठाएंगे।

न्यायमूर्ति आनंद पाठक ने आरोपी विजय यादव, सत्यप्रकाश यादव तथा करन सिंह यादव को सशर्त अग्रिम जमानत देते हुए उक्त आदेश दिए हैं। न्यायमूर्ति पाठक ने यह भी कहा कि इस प्रकार से तैयार की गई रिपोर्ट निश्चित रुप से न्यायिक कार्य में मददकारी होगी बल्कि यह विश्वास की भावना भी उत्पन्न करेगी। न्यायालय ने इसके साथ ही यह भी निर्देश दिए कि स्वास्थ्य विभाग एवं निदेशक अभियोजन डॉक्टरों के लिए कार्यशालाएं भी आयोजित करे, जिससे कि एेसे प्रकरणों में आने वाली परेशानियों से बचा जा सकेगा।

चिकित्सा उपकरणों से नहीं कलम से भी कौशल दिखाएं डॉक्टर

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि डॉक्टर का कर्तव्य है कि वह चोटों के बारे में स्पष्ट शब्दों में उसका उल्लेख करे, क्योंकि उसकी राय किसी के जीवन को प्रभावित कर सकती है। उनसे यह उम्मीद की जाती है कि वे अपने चिकित्सकीय उपकरणों चाकू-कैंची के अलावा कलम का भी कौशल दिखाएंगे।

पहली रिपोर्ट में था फ्रेक्चर, मेडिकल बोर्ड ने कहा नहीं था

मारपीट के इस मामले में एक रिपोर्ट में तो डॉक्टर ने शिकायतकर्ता को सिर में फ्रेक्चर बताया था जबकि दूसरी जांच जीआर मेडिकल कॉलेज के मेडिकल बोर्ड द्वारा करने पर पाया गया शिकायतकर्ता को फ्रेक्चर नहीं है। इस मामले में पूर्व की रिपोर्ट देने में या तो डॉक्टर से गलती हुई या फिर आरोपियों को कठोर सजा हो इसलिए रिपोर्ट में वे तथ्य डाले गए जो वास्तव में नहीं हुए। इसी तथ्य को आधार बनाते हुए जमानत का लाभ दिए जाने का निवेदन किया गया। आवेदकों का कहना था कि शिकायतकर्ता को कभी फ्रेक्चर हुआ ही नहीं । तीनों आरोपियों के खिलाफ भादसं की धारा ३२३, ३२४, ३२६, ३४१, ३३६, २९४, ५०६, ३४ के तहत भांडेर थाने में मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों ने कहा कि इस मामले में उन्हें झूठा फंसाया गया है। इस मामले में दोनों पक्षों ने एक दूसरे के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।

Rajendra Talegaonkar Desk/Reporting
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