इतिहास से न हो छेड़छाड़, पुराने वैभव में लौटे गूजरी महल का संगीत कक्ष

संगीत कक्ष के झरोखे से रानी मृगनयनी सुननी थीं बैजू बावरा को, किताबों में भी उल्लेख

By: Mahesh Gupta

Published: 22 Jul 2021, 11:29 AM IST

ग्वालियर.

एक ओर जहां यूनेस्को सिटी ऑफ म्यूजिक में शहर को शामिल कराए जाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए प्रशासन पूरा जोर लगा रहा है। सांगीतिक क्षेत्रों को डवलप कराने की रूपरेखा तैयार हो रही है। वहीं गूजरी महल स्थित संगीत कक्ष हथियार गैलरी का रूप ले चुका है। यहां पर्यटक ग्वालियर पुलिस के हथियार देखकर लौट रहे हैं। पत्रिका के प्रकाशित खबर 'गूजरी महल को बना दिया हथियार गैलरीÓ के बाद शहर के संगीत गुरुओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किला बहुत बड़ा है। अन्य जगह हथियार प्रदर्शित किए जा सकते हैं। संगीत कक्ष की अपनी एक गरिमा है। उसके इतिहास के साथ छेड़छाड़ नहीं किया जाना चाहिए।

संगीत से जुड़े वाद्ययंत्र रखे जा सकते हैं, हथियार नहीं
गूजरी महल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थल है। इसका सांगीतिक पहलू बरकरार रहना चाहिए। संगीत कक्ष में संगीत से जुड़े वाद्ययंत्र तो रखे जा सकते हैं, लेकिन हथियार कदापि नहीं। इस सुधार के लिए गूजरी महल से जुड़े अधिकारी, शासन एवं प्रशासन को ध्यान देना होगा और संगीत कक्ष को मूल स्वरूप में लौटाना होगा।
प्रो. पं. साहित्य कुमार नाहर, कुलपति, संगीत विश्वविद्यालय


कलाकार गुजारिश कर सकता है, व्यवस्था जिम्मेदार करें
ग्वालियर संगीत के लिए जाना जाता है। शहर को यूनेस्को सिटीज ऑफ म्यूजिक में शामिल कराने की प्रक्रिया भी चल रही है। ऐसे में संगीत को आगे बढ़ाने की बात होनी चाहिए, इसके विपरीत गूजरी महल के संगीत कक्ष में हथियार रखे जा रहे हैं। यह शर्मनाक है। कलाकार गुजारिश कर सकता है। व्यवस्था जिम्मेदार करें। संगीत कक्ष को वही वैभव प्रदान करें।
उमेश कम्पू वाले, संगीत गुरु


संगीत से जुड़ी किताबों में भी संगीत कक्ष का उल्लेख
पुरातत्व विभाग को मूल स्वरूप में परिवर्तन नहीं करना चाहिए। गूजरी महल का संगीत कक्ष विशेष रूप से आनंद और आमोद के लिए डिजाइन किया गया था। यहां स्वर लहरियां ही गूंजनी चाहिए। किला बहुत बड़ा है। हथियार का प्रदर्शन कहीं और भी हो सकता है। गूजरी महल के इस कक्ष का उल्लेख संगीत से जुड़ी कई किताबों में मिलता है।
अशोक आनंद, सचिव, श्रीरंग संगीत एवं कला संस्थान


इतिहास को संवारने के बजाए बिगाड़ा न जाए
ग्वालियर संगीत की नगरी है। यहां संगीत से जुड़े जितने भी स्थल हैं, उन्हें आगे बढ़ाना चाहिए। उनके वैभव से युवा पीढ़ी को परिचित कराना चाहिए। गूजरी महल में संगीत कक्ष में रखे हथियार किस बात का संदेश दे रहे हैं। उसे रियाज कक्ष होना चाहिए। संगीत के विद्यार्थी यहां आकर खासियत जान सकें व रियाज कर सकें। इतिहास को संवारने के बजाए बिगाड़ा न जाए।
प्रो. रंजना टोणपे, संगीत गुरु

संगीत वैभव वहीं से उत्पन्न हुआ, हथियार गैलरी होना गलत
राजा मानसिंह को संगीत से बहुत प्रेम था। उन्होंने ही रानी मृगनयनी के लिए गूजरी महल में संगीत कक्ष बनवाया था। संगीत वैभव जहां से उत्पन्न हुआ है, वहां छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए थी। उसे पूर्ववत अवस्था में लौटाया जाना चाहिए। ताकि आगे आने वाली पीढ़ी संगीत के उस वैभव को जान एवं समझ सके। हथियार गैलरी का दूसरा स्थान तय हो।
संजय देवले, संगीत गुरु

Mahesh Gupta
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned