दर्द से कराहती बूड़ी मां बोली- मुझे मेरी बहू से बचा लो, बहुत मारती है अब नहीं सहा जाता

दर्द से कराहती इस बूड़ी मां बोली- मुझे मेरी बहू से बचा लो, बहुत मारती है अब नहीं सहा जाता

By: Gaurav Sen

Published: 24 May 2018, 10:15 AM IST

ग्वालियर। मेरी उम्र 78 वर्ष हो चुकी है, अब आखिरी वक्त में इच्छा है कि जीवन सुख से निकले, लेकिन हमारी छोटी बहू चैन से जीने नहीं दे रही है, चाहे जब मारती-पीटती है, उलटे हमारी ही पुलिस में शिकायत कर देती है। हम चाहते हैं कि वह जहां भी रहे सुख से रहे, अपनी जिंदगी अच्छे से जिए, बस हमको चैन से जीने दे। इस बार फिर से 21 तारीख को रात में मारा और उसके बाद चली गई।

 

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साहब, जीवन दुश्वार कर दिया है, इस बहू ने अब हम यहां तक आ तो गए, लेकिन दिल बहुत घबरा रहा है कहीं उसने रात में आकर फिर मारा तो क्या होगा। यह आपबीती कंपू निवासी विजय कुमारी ने एसडीएम आरके पांडेय को सुनाई है। उनका कहना है कि छोटी बहू जनपद पंचायत मुरार में सरकारी कर्मचारी है और हमको लगातार डराती-धमकाती रहती है।


बुधवार को भरण पोषण अधिनियम के अंतर्गत हुई सुनवाई के दौरान शिवाजीनगर निवासी बुजुर्ग महिला विजयकुमारी और बड़ी बहू संगीता कलेक्ट्रेट आए। यहां आकर उन्होंने एसडीएम झांसी रोड के न्यायालय मेंं आकर छोटी बहू द्वारा प्रताडि़त किए जाने की बात कहते हुए बचाने की गुहार की। इस दौरान अन्य प्रकरणों में भी एसडीएम सुनवाई करके आगे की डेट दी है। विजयकुमारी के प्रकरण की सुनवाई अब अगले सप्ताह होगी।

 

 

बहू ने दिखाई चोटें
सास के साथ आई बड़ी बहू संगीता ने बताया कि दो दिन पहले जब देवर की पत्नी ने सास के साथ मारपीट की तो हम घर नहीं थे,उसके बाद हमारे सामने भी मारपीट की। जब हमने मां को बचाने की कोशिश की तो हमको भी मारा, जिससे आंख, कंधे सहित अन्य जगहों पर चोट के नीले निशान पड़ गए हैं। सरकारी कर्मचारी होने के कारण वो हमेशा कहती है कि कलेक्टर, सीईओ सहित दूसरे अधिकारी उसकी पहचान के हैं, कितनी शिकायत कर लो, मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकोगे। यहां आने के बाद अब हमको डर है कि वह फिर से मारपीट कर सकती है। इस पर एसडीएम ने उनको समझाइश दी कि उनकी सुरक्षा का ध्यान रखा जाएगा और कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकेगा।

 

मामला क्लीयर है, इसमें भरण पोषण अधिनियम के अंतर्गत जानमाल की सुरक्षा का भी अधिकार है। इसके अंतर्गत हम इनके साथ हैं और कानून अपना काम करेगा।
आरके पांडेय, एसडीएम

Gaurav Sen
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