मेडिकल वेस्ट अस्पतालों के बाहर पड़ा रहता है, पैसा बचाने के लिए नहीं पहुंचाते इंसीनेटर तक

मेडिकल वेस्ट अस्पतालों के बाहर पड़ा रहता है, पैसा बचाने के लिए नहीं पहुंचाते इंसीनेटर तक

Rajesh Shrivastava | Publish: Sep, 08 2018 07:11:31 PM (IST) Gwalior, Madhya Pradesh, India

अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट को सडक़ पर ही फेंकने से आमजन और जानवरों की जान को खतरा पहुंचा रहा

ग्वालियर. सरकारी व प्राइवेट अस्पताल प्रबंधन द्वारा अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट को सडक़ पर ही फेंक दिया जाता है, जो कि आमजन और जानवरों की जान को खतरा पहुंचा रहा है। नियमानुसार अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट को नष्ट कराया जाना चाहिए, लेकिन अस्पतालों से निकलने वाला मेडिकल वेस्ट कई दिनों तक सडक़ों पर ही सड़ता रहता है। इससेे चाटने से कई जानवरों की मौत भी हो चुकी है, क्योंकि यह मेडिकल वेस्ट काफी खतरनाक होता है। सडक़ों पर पड़ा मेडिकल वेस्ट शहर के लिए हॉट इश्यू बनता जा रहा है, इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस मामले में गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।

अस्पतालों में रोजाना ही इंजेक्शन, सीरिंज, ग्लूकोज बोतल, दस्ताने सहित अन्य सामग्री मेडिकल वेस्ट के रूप में निकलती है, इसे नष्ट करने के लिए जेएएच के इंसीनेटर तक भिजवाया जाना चाहिए, लेकिन अस्पताल प्रबंधन द्वारा मेडिकल वेस्ट को नष्ट न कराते हुए उसे अस्पतालों के बाहर सडक़ों पर खुले में ही डलवा दिया जाता है, जो कई दिनों तक सडक़ों पर पड़ा रहता है। ऐसे में कई बार दस्तानों और पट्टियों पर लगे खून को आवारा जानवर चाटते रहते हैं, यह खून काफी खतरनाक हो जाता है, जिसके चलते इसे चाटने और खराब दवाओं के कारण जानवरों की हालत बिगडऩे लगती है और कई बार तो जानवर मर भी जाते हैं।

अस्पताल प्रबंधन पर नहीं हो रही कार्रवाई
अस्पताल परिसर में खुले में पड़े मेडिकल वेस्ट के कारण आने वाली दुर्गंध और यहां पनपने वाले संक्रामक जीवों के संपर्क में आने से स्वस्थ व्यक्ति भी बीमारियों का शिकार हो जाता है। ऐसे में उसे तुरंत उपचार की जरूरत पड़ती है। सडक़ पर पड़े मेडिकल वेस्ट से आने वाली दुर्गंध के कारण कई बार लोग मौके पर ही उल्टीयां कर देते हैं, जो कि लोगों के लिए सबसे खतरनाक साबित होता है। इसके बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा खुले में फैके जा रहे मेडिकल वेस्ट को लेकर अस्पताल प्रबंधनों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है, जिसका ही फायदा अस्पतालों के स्टाफ द्वारा उठाया जा रहा है।

पैसा बचाने के लिए नहीं पहुंचाते इंसीनेटर तक
अधिकारिक जानकारी के मुताबिक जयारोग्य अस्पताल में स्थापित इंसीनेटर में पंजीकृत 381 स्वास्थ्य संस्थाओं से हर रोज करीब 925 किलो मेडिकल वेस्ट जलने के लिए पहुंचता था। इसके एवज में पलंग संख्या के हिसाब से पैसा दिया जाता है। यानि एक पलंग से निकलने वाले वेस्ट के एवज में पांच रूपए वसूले जाते हैं, लेकिन स्वास्थ्य संस्थाएं समय पर पैसा उपलब्ध नहीं कराती है। ऐसे में जेएएच के स्टाफ द्वारा कई अस्पतालों पर राशि बकाया निकाली गई थी। ऐसे में पैसा बचाने के लिए ही अस्पताल प्रबंधनों द्वारा मेडिकल वेस्ट को जेएएच में स्थापित इंसीनेटर तक नहीं पहुंचाया जा रहा है।

जान को रहता है खतरा

-खुले में पड़े मेडिकल वेस्ट काफी खतरनाक होता है, यह वेस्ट संक्रामक बीमारियां फैलाते हैं, जिसका असर लोगों के फैफड़ों पर पड़ता है। मेडिकल वेस्ट के संपर्क में आने से संक्रामक जीवाणु लोगों के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और स्वस्थ व्यक्ति भी गंभीर बीमारी का शिकार हो जाता है। ऐसे में मरीजों को लंबे समय तक उपचार कराना पड़ता है। खुले में पड़े मेडिकल वेस्ट से लोगों की जान को खतरा बना रहता है। - डॉ. ध्यानेन्द्र सिंह, एक्सपर्ट

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