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ये कैसा पुर्नगठन : मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने ऊर्जा मंत्री के ग्वालियर-चंबल संभाग को ही दिखाया ठेंगा

- राज्य सलाहकार समिति के पुर्नगठन के हर वर्ग में प्रदेश के सभी शहर के लोग किए हैं शामिल, ग्वालियर को दरकिनार किया

ग्वालियर

Published: January 14, 2022 10:21:31 am

ग्वालियर. मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने हाल ही में राज्य सलाहकार समिति का पुर्नगठन किया है। समिति के सदस्यों के रूप में मध्यप्रदेश के लगभग सभी प्रमुख शहरों के लोगों को शामिल किया है, लेकिन ग्वालियर-चंबल संभाग को इससे अछूता रखा गया है। खास बात यह है कि ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर का यह गृह क्षेत्र है और उन्हीं के क्षेत्र को यहां ठेंगा दिखाते हुए रिक्त छोड़ दिया गया है।
ये कैसा पुर्नगठन : मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने ऊर्जा मंत्री के ग्वालियर-चंबल संभाग को ही दिखाया ठेंगा
ये कैसा पुर्नगठन : मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने ऊर्जा मंत्री के ग्वालियर-चंबल संभाग को ही दिखाया ठेंगा
इन्हें किया है शामिल
समिति के वाणिज्य वर्ग में सतना के विवेक अग्रवाल, उद्योग वर्ग में सीहोर के महेन्द्र पी.खंते, कृषि वर्ग में जबलपुर के प्रहलाद सिंह और धार के दयाराम पाटीदार, श्रमिक-मजदूर वर्ग में इंदौर केके तिवारी, गैर सरकारी संगठन वर्ग में भोपाल की स्मिता सक्सेना और जबलपुर की अर्चना भटनागर, शैक्षणिक एवं अनुसंधान वर्ग में भोपाल के बीए सावले, उद्योग वर्ग में भोपाल के विपिन कुमार जैन और रायसेन के सीबी मालपानी, ट्रांसपोर्ट वर्ग में जबलपुर के डीएल मीना, कृषि वर्ग में होशंगाबाद के राकेश कुमार गौर, वाणिज्य वर्ग में जबलपुर के रवि गुप्ता और नोएडा उत्तरप्रदेश के एसएन गोयल, शैक्षणिक वर्ग में इंदौर के डॉ.प्रवीण कुमार पानिग्रही, भोपाल के राहुल चौधरी और प्रो.मयूर आलम को शामिल किया गया है।
बिजली से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए सलाह देगी समिति
आमजन को बिजली की दर एवं अन्य समस्याओं को देखते हुए मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने राज्य स्तरीय सलाहकार समिति का गठन किया है। इसके तहत बिजली से जुड़े मुद्दों को लेकर लोगों को सलाह दी जाएगी। मप्र विद्युत नियामक आयोग बिजली की दरें घोषित करने के नियमों में बदलाव और बिजली को लेकर आने वाली समस्याओं पर लोगों की राय लेगा। इसके लिए आयोग ने राज्य स्तरीय सलाहकार समिति का गठन किया है। यह सभी बिजली से जुड़े मुद्दों को लेकर लोगों के हित में अपने सुझाव देंगे। इसके आधार पर आयोग आगामी योजना का खाका तैयार करेगा। इसके सभी सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष का रहेगा।
मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता हूं
मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के फैसले पर मैं कोई टिप्पणी नहीं कर सकता हूं, भले ही मैं ऊर्जा मंत्री हूं क्योंकि नियामक आयोग संवैधानिक रूप से स्वतंत्र है।
- प्रद्युम्न सिंह तोमर, ऊर्जा मंत्री मप्र शासन

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