ग्वालियर-चंबल पानी में डूबा- सारे डैम फुल, नदीयां उफान पर, नहरों में आया पानी, जनजीवन हुआ अस्त-व्यस्त

ग्वालियर-चंबल पानी में डूबा- सारे डैम फुल, नदीयां उफान पर, नहरों में आया पानी, जनजीवन हुआ अस्त-व्यस्त

Gaurav Sen | Publish: Sep, 09 2018 12:57:39 PM (IST) Gwalior, Madhya Pradesh, India

ग्वालियर-चंबल पानी में डूबा- सारे डैम फुल, नदीयां उफान पर, नहरों में आया पानी, जनजीवन हुआ अस्त-व्यस्त

शनिवार को श्योपुर सीमा में स्थित अपर ककेटो बांध से पानी ओवर फ्लो होकर ककेटो बंाध में पहुंचा। यह दोनों बांध पार्वती नदी पर बने हैं। जैसे ही पानी ने अपर ककेटो की ऊंचाई को लांघना शुरू किया तो उसको पेहसारी की लिंक कैनाल को खोल दिया गया, लेकिन पानी का फ्लो इतना तेज था कि कके टो वियर से करीब 3 फीट ऊंचाई से पानी पार्वती नदी में आगे बढ़ता रहा, जिसको देखते हुए एरिगेशन ने ककेटो बांध को सील कर दिया और लोगों को आगे जाने से रोक दिया। जो पानी ककेटो से पार्वती नदी में गया है वह सुल्तानगढ़ होते हुए हरसी डैम पानी जमा होने से फुल हो गया। देर रात रमौआ के लिए पानी छोड़ दिया।

अब ग्वालियर शहर और उसके आसपास का जल संकट और वर्षों का सूखा खत्म होने की निशान पर पहुंच गया है। इसके साथ ही शहर के लोगों के लिए, जंगल में घूम रहे लाखों पशु पक्षियों और वन्य जीवों के लिए पर्याप्त पानी हो गया है। जिसके चलते पहले सिरसा बांध भरा, फिर तिघरा और अब ककेटो बांध को भी पानी लांघ चुका है। अब तिघरा के ऊपर केवल पेहसारी बांध बचा है जिसका लेवल पिछले दो दिनों में दो फीट से अधिक बढ़ चुका है।

इसमें अब केवल 7 फीट पानी और चाहिए, फिर यहां से सांक नदी को भरने वाली नहर को खोल दिया जाएगा। इसके साथ ही शहर में प्रतिदिन पानी सप्लाई करने में अफसरों को कोई परेशानी नहीं होगी। वहीं जल संसाधन विभाग ने सांक पिकअप वियर से नून पिक अप वियर और आसपास के छोटे बड़े बांधों का सर्वे भी शुरू कर दिया है, ताकि जरूरी पानी को खाली बांध और ताल तलैया तक पहुंचाकर तिघरा से ओवर फ्लो होकर बहने वाले पानी को ग्वालियर सीमा में ही रोका जा सके।

तिघरा के गेट फिर खोले
शनिवार 1 सितंबर से शनिवार 8 सितंबर तक तिघरा के गेटों को पांचवी बार खोला गया। शनिवार से शुरू हुआ गेट खोलने का सिलसिला दूसरे शनिवार को भी जारी रहा। इस दौरान दोपहर में करीब 3 बजे से शाम 7 बजे तक तिघरा के गेटों को करीब 4 घंटे तक खोला गया। इस दौरान करीब 40 एमसीएफटी पानी को तिघरा से बाहर किया गया।

बांधों की स्थिति
श्योपुर का अपर ककेटो ग्वालियर का ककेटो
समुद्रतल से बांध की सतह 1190.94 फीट 1050.49 फीट
समुद्रतल से बांध की ऊंचाई 1213.91 फीट 1124.47 फीट
बांध में पानी स्टोर की क्षमता 1844.83 एमसीएफटी 2794.09 एमसीएफटी
नोट : उक्त दोनों बांधों में करीब 4638.92 एमसीएफटी पानी भर चुका है। श्योपुर का अपर ककेटो ग्वालियर के ककेटो बांध से करीब 140.45 फीट की ऊंचाई पर है। जिससे ग्रेविटी के जरिए पानी अपर ककेटो से ककेटो में पहुंचता है।

बराबर निगरानी
हम सभी नहरों का नेटवर्क चेक कर रहे हैं, सभी छोटे बड़े बांधों के साथ ही ताल तलैया को भी आवश्यकतानुसार भरने के लिए प्रतिदिन हमारे इंजीनियर बांधों की गतिविधियों पर बराबर नजर बनाए हुए हैं।
राजेश चतुर्वेदी, कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग

ईश्वर की मेहरबानी
ईश्वर मेहरबान हैं अंचल में अच्छी बारिश हो रही है। अब अफसरों को चाहिए कि वह पेहसारी को फुल होने से तीन फीट पहले ही नहर को खोल दें, ताकि शहर से लगे सभी बांधों को भरा जा सके।
भूपेंद्र ङ्क्षसह कुशवाह, एक्सपर्ट नगर नेटवर्क

पत्रिका में खबर छपने के बाद हरकत में आए अफसर
जल संसाधन विभाग के अफसरों ने सिरसा बांध की पार पर मिट्टी और रेत से भरे प्लास्टिक के कट्टे डाल कर तोड़ी गई दीवार से पानी की निकासी रोक दी है। बांध में से पानी को बहाने के लिए इंजीनियरों ने दीवार को तुड़वा दिया था, यही पानी सांक नदी के जरिए तिघरा डैम में पहुंच रहा था, जिसके चलते तिघरा के गेट 4 बार खोलने पड़े हैं, जबकि पानी की निकासी वॉल्व खोलकर भी की जा सकती थी इस मामले पर पत्रिका ने 7 सितंबर के अंक में फिर लापरवाही, सिरसा बांध की दीवार तोडकऱ बहा रहे सैकड़ों एमसीएफटी पानी, खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इसके बाद हरकत में आए जल संसाधन विभाग के इंजीनियरों ने पानी की बर्बादी रोकने के लिए टूटी हुई दीवार से पानी का बहाव रोकने के लिए कार्रवाई की।

करोड़ों का पानी बर्बाद
उक्त पानी को नून पिकअप वियर की लिंक नहर से छोडकऱ शहर के आसपास के बांधों को भरा जा सकता था, लेकिन अफसरों ने पानी बचाने के प्लान की जगह पानी को तिघरा बांध से छोड़ देने के प्लान पर ज्यादा फोकस किया। इसके चलते करोड़ों रुपए का पानी बर्बाद हो गया।

बना रहे प्रस्ताव
सिरसा बांध तिघरा और पेहसारी के बीच स्थित है। जल संसाधन विभाग के अफसरों की अनदेखी का शिकार बांध की दीवारों पर पेड़ उग आए थे जिन्होंने इसे नुकसान पहुंचाया। इसके चलते 1 सितंबर को जब बांध के लीकेज से पानी निकला तो अफसर घबरा गए और पानी छोडऩे दीवार तोड़ दी जब पत्रिका ने मामले का खुलासा किया तो अब अफसर इसके संधारण के लिए करीब 10 लाख रुपए का प्रस्ताव बना रहे हैं।

हम कर रहे काम
तिघरा और आसपास के बांधों को भरने के लिए काम कर रहे हैं। सिरसा बांध की पार पर पानी को रोक दिया है। इसके संधारण कार्य के लिए कार्रवाई की जा रही है।
राजेश चतुर्वेदी, कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग

कूनो नदी पर पानी, नहीं चलीं बसें
श्योपुर और शिवपुरी जाने वाली बसें शनिवार को नदियों में ज्यादा पानी आने से नहीं चल सकीं। श्योपुर जाने के लिए कूनों नदी पर बने पुल को पार करना पड़ता है। पानी ज्यादा होने से इस रास्ते को पर यातायात बंद करना पड़ा। इसके चलते सुबह से ही आम खो बस स्टैंड पर यात्रियों की भीड़ इधर- उधर घूमती रही।

पिछले दिनों नैरोगेज को भी किया था बंद
ग्वालियर से श्योपुर और शिवपुरी के लिए आम खो से ही सुबह से शाम तक 7- 8 बसें जाती हैं। वहीं श्योपुर जाने के लिए नैरोगेज ट्रेन पिछले कई दिनों से ग्वालियर से श्योपुर तक नहीं जा पा रही हैं। रेलवे ट्रैक पर भी अधिक पानी के कारण नैरोगेज ट्रेन चार- पांच दिनों से ग्वालियर से सबलगढ़ तक ही जा रही है। वहीं वापसी में भी सबलगढ़ से ही ट्रेनें लौटकर आ रही हैं। इससे श्योपुर जाने वाले यात्री ट्रेनों से भी नहीं पहुंच पा रहे है। नैरोगेज ट्रेन अभी दो तीन दिन और नहीं चलेंगी।

ककेटो लबालब: काफी अर्से बाद ग्वालियर-चंबल संभाग में अच्छे मानसून के बाद बारिश के पानी से लगभग सभी बांध फुल हो गए हैं।

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