अच्छे लीडर के लिए विनम्रता और टीम भावना जरूरी

लायंस क्लब ग्वालियर का आयोजन

By: Mahesh Gupta

Updated: 10 May 2020, 10:20 PM IST

ग्वालियर.

किसी भी लीडर के लिए सबसे आवश्यक लक्षण विनम्रता है। यदि लीडर विनम्र रहेगा तो लोगों का लगाव और जुड़ाव उसके प्रति सरल और सहज रहेगा। उसे नॉलेज होना और उस ज्ञान को सही लोगों के बीच सही समय पर पहुंचाना उसकी लीडरशिप क्वालिटी है। यह बात स्पीकर के रूप में उपस्थित इस्कॉन के प्रभु अमोग लीला दास ने वेबिनार के दौरान कही। वह लायंस क्लब ग्वालियर की ओर से आयोजित 'लीडरशिप लेसन फ्रॉम लॉर्ड कृष्णाÓ विषय पर बोल रहे थे। मुख्य अतिथि के रूप में डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अशोक ठाकुर रहे। स्वागत उद्बोधन संस्था के अध्यक्ष संदीप अग्रवाल ने दिया। सूत्रधार वीडीजी-2 सुनील गोयल रहे।

कड़क व्यक्तिव के लोग परिवर्तन को स्वीकार नहीं करते
अमोग लीला दास ने कहा कि लीडर को भगवान कृष्ण की तरह मार्गदर्शक होना चाहिए, जो एक सारथी की तरह अपने रथी को मार्ग दिखाए एवं विषम स्थितियों में उचित मार्गदर्शन भी दें। लीडर में लचीलापन आवश्यक होता है, जिससे जहां उचित मार्ग मिले अपनी राह को रोके बिना गति को लगातार कायम रख सके। कड़क व्यक्तिव के लोग परिवर्तन को स्वीकार नहीं करते, जिससे विकास में अवरोध उत्पन्न होता है। वेबिनार में 155 प्रतिभागियों ने भाग लिया। आभार सचिव राकेश अग्रवाल ने व्यक्त किया।


उदाहरण से समझाया
1. एक अच्छे लीडर में एक अच्छे श्रोता का गुण भी होना अति आवश्यक है, जिस प्रकार भगवान कृष्ण ने कुरुक्षेत्र में अर्जुन की सभी धर्म संकट की बातें ध्यान से सुनीं। उसके बाद उसका मार्गदर्शन भगवत गीता के उपदेशों के माध्यम से किया।

2. आपदा प्रबंधन लीडर की विशेषता होती है। जब आचार्य द्रोण के वध के उपरांत अश्वथामा द्वारा नारायण के शस्त्र के उपयोग पर उस शस्त्र को प्रणाम करने का आदेश कृष्ण ने पांडवों व उनकी सेना को दिया, ताकि वे उसके प्रभाव से बच सकें, लेकिन भीम द्वारा न झुकने पर तत्काल जाकर उसको झुकाना आपदा प्रबंधन का लक्षण था।

3. लीडर का हर व्यक्ति तक पहुंचना आवश्यक है। भगवान कृष्ण ने रास लीला में सभी गोपियों के साथ रास किया जबकि वे एक ही थे लेकिन सभी गोपियों को लगा कि सिर्फ मेरे साथ ही रास कर रहें हैं।


ये भी कहा
- लीडर को लोगों के दिलों में स्थान बनाना आवश्यक है। क्योंकि लोगों से प्रेम करने को प्राथमिकता देने पर वस्तुओं पर प्राथमिकता गौंड हो जाती हैं।

-लीडर को आनंद के क्षेत्र से बाहर रहना बहुत जरूरी है। यदि वो बाहर नहीं आएगा, तो अपना शत प्रतिशत नहीं दे पाएगा।

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