मृत पति के क्लेम सेटलमेंट की स्पीड पोस्ट डाकिए ने पत्नी को नहीं दी, बोला- जिसके नाम से आई है डाक उसी को देंगे

लगभग एक साल पहले पति की हो चुकी है मौत

By: monu sahu

Published: 01 Jul 2019, 04:42 PM IST

ग्वालियर। पति की असमय मौत के सदमे से उबरने की कोशिश कर रही रिचा मिश्रा उस समय अवाक रह गई जब पीएफ ऑफिस से आई क्लेम सेटलमेंट संबंधी स्पीडपोस्ट डाकिए ने उन्हें देने से इनकार कर दिया। दरअसल, स्पीड पोस्ट आई थी उनके स्वर्गीय पति के नाम से और डाकिया इस बात पर अड़ा था कि जिसके नाम से डाक है उसी को सौंपी जा सकती है। परेशान रिचा ने डाकिए को बताया या कि उनके पति लगभग एक साल पहले गुजर चुके हैं, पीएफ ऑफिस ने उन्हीं से जुड़े क्लेम के दस्तावेज भेजे हैं। वे समझाकर थक गईं, लेकिन डाकिया नहीं माना। इसके बाद स्पीडपोस्ट लेने वे पोस्टऑफिस गईं, लेकिन वहां भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी।

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विनय नगर सेक्टर- 3 निवासी रिचा मिश्रा अपनी दो बच्चियों के पालन-पोषण को लेकर बेहद परेशान हैं। पति के असमय गुजर जाने के बाद उन्हें पति के पीएफ सेटलमेंट से मिलने वाले पैसों का बड़ा आसरा है। वे हरसंभव कोशिश कर रही हैं कि ये पैसा उन्हें जल्द से जल्द मिल जाए। पीएफ ऑफिस की तमाम आपत्तियों का निराकरण करते-करते वे मानसिक रूप से परेशान हो गई हैं। छोटे से तकनीकी प्रश्न का समाधान करने के लिए भी उन्हें स्कूल से छुट्टी लेना होता है। इसीलिए पीएफ ऑफिस से आया स्पीडपोस्ट उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण था। लेकिन डाकिया उन्हें यही समझाता रहा कि स्पीडपोस्ट तो सुरेन्द्र कुमार मिश्रा के नाम से आई है, उन्हीं को ही दी जा सकती है।

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रिचा ने डाकिए को बताया कि उनका स्वर्गवास हो चुका है, मैं उनकी पत्नी हूं और ये डाक आप हमें दे दीजिए। डाकिए ने कहा, मैं तो डाक नहीं दे सकता। ये आपको पोस्ट ऑफिस से ही मिलेगी। रिचा तुरंत शब्द प्रताप आश्रम स्थित पोस्ट ऑफिस पहुंची। पोस्टमास्टर अशोक शर्मा को मामले की पूरी जानकारी दी और स्पीडपोस्ट मांगी। पोस्टमास्टर ने भी उन्हें डाक देने से मना कर दिया। उन्होंने नियम बताया, ये डाक जहां से आई है उसी विभाग को वापस भेजी जाएगी। आप इसे वहीं से ले सकती हैं।

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पीएफ कार्यालय ने कैसे जारी कर दी स्पीड पोस्ट
पोस्ट ऑफिस के नियम के मुताबिक जिस व्यक्ति के नाम से स्पीड पोस्ट आई है और यदि उसकी मौत हो चुकी है तो वह डाक वापस जहां से आई थी उसे वहीं भेजा जाता है। ऐसे में पीएफ कार्यालय की ओर से भेजी गई ये स्पीड पोस्ट भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि जब ऐसा नियम है तो फिर पीएफ कार्यालय की ओर से मृत व्यक्ति के नाम से स्पीड पोस्ट क्यों भेजी गई?

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रिचा का सवाल, नियम इतने बेतुके क्यों?
पीडि़ता रिचा मिश्रा ने बताया कि डाक विभाग का ये कैसा बेतुका नियम है। आधार, पैनकार्ड, वोस्टर कार्ड जैसे सरकारी आईकार्ड का मतलब ही क्या जो इस तरह के पुराने नियमों का समाधान न कर सकें। मैंने घर आए डाकिए और पोस्ट ऑफिस जाकर पोस्टमास्टर को सभी दस्तावेज दिखाए, लेकिन वे एक ही रट लगाए रहे। क्या वे लोग समझ सकते हैं कि ऐसे बेतुके नियम से हम जैसे लोगों को कितनी परेशानी उठानी पड़ती है।

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जहां से आई थी वहीं जाएगी स्पीड पोस्ट
डाक विभाग प्रवर अधीक्षक एसके ठाकरे ने बताया कि स्पीड पोस्ट जिस व्यक्ति के नाम से आई थी और यदि उसकी मौत हो चुकी है तो परिजनों को डाक नहीं दी जाती है। यह डाक जिस जगह से आई थी उसे वहीं दोबारा से भेज दिया जाता है। इस स्पीड पोस्ट को भी वापस भेजा जाएगा।

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